भुजंग प्रयात छंद "नोट बन्दी"

14 मई 2021   |  बासुदेव अग्रवाल 'नमन'   (444 बार पढ़ा जा चुका है)

(भुजंग प्रयात छंद)


हुई नोट बन्दी ठगा सा जमाना।

किसी को रुलाना किसी को हँसाना।।

कहीं आँसुओं की झड़ी सी लगी है।

कहीं पे खुशी की दिवाली जगी है।।


इकट्ठा जिन्होंने किया वित्त काला।

उन्हीं का पिटा आज देखो दिवाला।।

बसी थी जहाँ अल्प ईमानदारी।

खरे लोग देखो सभी हैं सुखारी।।


कहीं नोट की लोग होली जलाते।

कहीं बन्द बोरे नदी में बहाते।।

किसी के जगे भाग खाते खुला के।

कराए जमा नोट काले धुला के।।


सभी बैंक में आ गई भीड़ सारी।

लगी हैं कतारें मचा शोर भारी।।

कमी नोट की सामने आ रही है।

नहीं जानते क्या हुआ ये सही है।।

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*भुजंग प्रयात छंद* विधान:


4 यगण (122) यानि कुल 12 वर्ण प्रत्येक चरण में।

चार चरण दो दो समतुकांत।

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

तिनसुकिया

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