ईश्वर और भगवान का भेद

16 अगस्त 2017   |  रोमिश ओमर   (122 बार पढ़ा जा चुका है)

*ईश्वर और भगवान का भेद*

*ऐश्वर्यस्य समग्रस्य धर्मस्य यशसः श्रियः ।*

*ज्ञानवैराग्ययोश्चैव षण्णां भग इतीरणा ।। -(विष्णु पुराण 6/5/74)* *

अर्थ―*सम्पूर्ण ऐश्वर्य,धर्म,यश,श्री,ज्ञान और वैराग्य--इन छह का नाम भग है।इन छह गुणों से युक्त महान पुरुष को भगवान कहा जा सकता है। श्रीराम व श्री कृष्ण, के पास ये सारे ही गुण थे(भग थे)।इसलिए उन्हें भगवान कहकर सम्बोधित किया जाता है। वे भगवान् थे, ईश्वर नहीं थे ईश्वर के गुणों को वेद के निम्न मंत्र में स्पस्ट किया गया है

*स पर्यगाच्छुक्रमकायमव्रणमस्नाविरं शुद्धमपापविद्धम् ।*

*कविर्मनीषी परिभू: स्वयम्भूर्याथातथ्यतोऽर्थान् व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्यः ।। (यजुर्वेद अ. ४०। मं. ८)*

अर्थात - वह ईश्वर सर्वशक्तिमान,शरीर-रहित,छिद्र-रहित,नस-नाड़ी के बन्धन से रहित,पवित्र,पुण्ययुक्त,अन्तर्यामी,दुष्टों का तिरस्कार करने वाला,स्वतःसिद्ध और सर्वव्यापक है।वही परमेश्वर ठीक-ठीक रीति से जीवों को कर्मफल प्रदान करता है भगवान अनेकों होते हैं। लेकिन ईश्वर केवल एक ही होता है।

अगला लेख: Azaad Bharat: 4 साल से बापू आशारामजी को बेल नही मिलने के पीछे राजनैतिक दलों का हाथ: माँ चेतनानंद



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
16 अगस्त 2017
*योगीराज, निति निपुण पराक्रमी वीर योद्धा , गोपालक, महान कूटनीतिज्ञ सत्यधर्मी सदाचारी एकपत्निव्रत (माता रुक्मिणी) ब्रह्मचारी वेदंज्ञ महात्मा धर्मात्मा दुष्टनाशक परोपकारी आर्य (श्रेष्ठ) पुरुष राष्ट्र धर्म स्त्री रक्षक सर्व परा* *पाप दोष रहित निष्कलंक शुद्ध पवित्र चरित्र..*_*योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण ज
16 अगस्त 2017
16 अगस्त 2017
सबसे पहले तो हम देश को गुलामी से आजाद कराने वाले क्रान्तिकारि- स्वतन्त्रता आन्दोलन में कई संगठनो ने महत्वपूर्ण योगदान दिया उन्हीं में से एक अमर नाम 'आर्यसमाज' का भी रहा हैं |आर्यसमाज के प्रवर्तक *स्वामी दयानन्द सरस्वती ने 1885 मे अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश मे स्वदेशी राज्य का उदघोष करते हुए कहा...*"
16 अगस्त 2017
13 अगस्त 2017
तुष्टिकरण की पराकाष्टा : हिन्दुओ के बनाये ध्रुव स्तम्भ को कुतुब्दीन ऐबक का कुतबमीनार बता दिया गयादिल्ली में हिन्दुओ ने ध्रुव स्तम्भ बनायापर वामपंथी इतिहासकारो, और सेकुलरों ने इसे लूले और गुलाम कुतुब्दीन ऐबक का कुतुबमीनार बता दियाइसकी दीवारों पर अरबी में कलमा वलमा गुदवा दि
13 अगस्त 2017
16 अगस्त 2017
जन गण मन गुलामी का गीत जो पहली बार सत्र 1911 में अंग्रेजो के राजा जॉर्ज पंचम के सम्मान में गाया गया, जिसे अंग्रेजो के चाटुकार रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा । क्या आपको इस गीत के शब्दों का मतलब पता है ? नहीं ना , तो सच्चाई जानने के लिए इस वीडियो को अवश्य देखें और अगली बा
16 अगस्त 2017
13 अगस्त 2017
अगस्त 12, 2017गोवा : सनातन संस्था द्वारा हुए एक कार्यक्रम के दौरान उत्तरप्रदेश, डासना, चंडीदेवी मंदिर सिद्धपीठ की महंत यति माँ #चेतनानंद सरस्वती ने एक चैनल में इंटरव्यू देते हुए कई सवाल उठाते हुए कहा कि #सनातन संस्था बहुत ही #पवित्र कार्य कर रही है, इसके माध्यम से अलग-अलग
13 अगस्त 2017
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x