यूनिवर्सिटी में वैलेंटाइन का ख़ुमार !!!

11 फरवरी 2018   |  नीरज अग्रहरि   (260 बार पढ़ा जा चुका है)

यूनिवर्सिटी में वैलेंटाइन का ख़ुमार !!!

छूकर उसकी खुश्बू मेरे मन को ,

पागल कर गई आज |

पर मै भी पगला बेवजह ताकता रहा ,

और हो गई सांझ |

मन ने कहा नहीं आएगी वो आज ,

पर दिल भी कहा आने वाला था बाज़ |

कहा वो आएगी ज़रूर ,

चाहे उसे छोड़ना पड़े काम और काज |

सेमेस्टर का एग्जाम खत्म हो जायेगा आज ,

पर कैसे उससे कहू अपने दिल की बात |

की मै पहनाना चाहता हूँ ,

अपने मोहब्बत का ताज |

दिल है ज़ोरो से धड़क रहा ,

और साँसे है तेज |

चाहता हु की ये कविता ,

दू उसको भेज |

पर क्या मिलेगा जवाब ,

ये सोच कर घबराऊ |

पीछे हटू मै अब या ,

आगे बढ़ जाऊ |

कुछ भी हो जाए आज कह के रहूँगा ,

अपने दिल की बात |

चाहे मुझे मैजिक मै ही जाना पड़े ,

फैज़ाबाद तक उसके साथ |

फरवरी 14 तक कैसे करूँगा मै उसका इंतज़ार ,

पर कर भी क्या सकता हु, हु मै लाचार|

अभी मै बना ही रहा था मिलने का विचार ,

की वो चली गई कुमारगंज बाजार |

नीरज अग्रहरि ( न0दे0कृ0 प्रो0वि0वि0 )

यूनिवर्सिटी में वैलेंटाइन का ख़ुमार !!!

अगला लेख: जब करने लगे दाँत दर्द !!!



रेणु
11 फरवरी 2018

युवा मन की स्वाभाविक कल्पना -- सुंदर !!!!!!

जी बिलकुल |

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x