जब करने लगे दाँत दर्द !!!

12 फरवरी 2018   |  नीरज अग्रहरि   (128 बार पढ़ा जा चुका है)

जब करने लगे दाँत दर्द !!!

जब करने लगे दांत दर्द ,

और बहने लगे हवा सर्द |

जब सोना पड़े चटाई पर ,

और रोना पड़े पढाई पर |

जीवन हो जाये भागम भाग ,

और एग्जाम भी आ जाये एकदम पास |

जब मैगी पर रहना हो ज़िंदा ,

तो नीरज भइया कैसे रहे चंगा |

जब सारी दूध पी जाये बिल्ली ,

और दोस्त भी मिलकर उड़ाए खिल्ली |

जूते मै हो गया है छेद ,

डर है कही खुल जाये न भेद |

होते नहीं है ठीक से पास ,

और नीरज भइया लगाए है आई ए एस की आस |

जिस कमरे मे है जीव जन्तुओ का सबसे ज्यादा वास ,

वही है नीरज भइया का निवास |

गैस चूल्हा तो लै है आये ,

पर यह ना पता की कैसे जलाये |

फेसवाश नीविआ का लगाए ,

पर चेहरे से फिर भी कील न जाये |

लाइट का है न अता न पता ,

नीरज भइया भी कमरे से हरदम लापता |

अब जल्दी से घर जाना है ,

मम्मी को ये सब सुनाना है |

की आपका लाडला विपत्तियों से गया है घिर ,

और कही चकरा न जाये उसका सिर |

रोज़ सुबह उठकर करते है पूजा ,

ताकि कोई विपत्ति न आ जाये दूजा |

ये है नीरज के आम जीवन का हाल ,

इससे ज्यादा न सुनो नहीं तो मच जायेगा बवाल |

' नीरज अग्रहरि '


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रेणु
16 फरवरी 2018

प्रिय नीरज -- बहुत ही सार्थक व्यंग से भरी रचना मुझे बहुत अच्छी लगी | आज कल ऐसी रचनाये दुर्लभ सी हो गयी हैं -- जो होंठो पर बरबस मुस्कान ले आयें | और अपने आप और अपने हालात पर हंसना सबसे सुखद हास्य है | खुश रहिये -- मस्त रहिये | सस्नेह ------

बहुत खूब हास्य

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