वो क्यों नहीं आई !

23 जुलाई 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (97 बार पढ़ा जा चुका है)

वो क्यों नहीं आई !

लाठी की टेक लिए चश्मा चढाये,

सिर ऊँचा कर मां की तस्वीर पर,

एकटक टकटकी लगाए,

पश्चाताप के ऑंसू भरे,

लरजती जुवान कह रही हो कि,

तुम लौट कर क्यों नहीं आई,

शायद खफा मुझसे,बस,

इतनी सी हुई,

हीरे को कांच समझता रहा,


ALONE

समर्पण भाव को मजबूरी का नाम देता,

हठधर्मिता करता रहा,जानकर भी,

नकारता रहा,फिर, पता नहीं कौन सी बात,

दिल को लगा बैठी,और एक दिन यूं रूठकर चली गई

अपने आप को कोसता रहा,लौट आने की,

मंदिरों में मन्नतें मांगता रहा,गुहार करता रहा,

तुमसे दो शब्द कहना चाहता हूँ,तुम तो दया की मूरत,

मेरे प्रतिकारो को,विस्मृत करके लौट आओ,

लेकिन समझता हूं कि,तुम्हारे लौट के ना आने का....

अगला लेख: उम्मीदों की मशाल



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
17 जुलाई 2018
कोईअस्तित्व न हो शब्दों का, यदि हो न वहाँ मौन का लक्ष्य |कोईअर्थ न हो मौन का,यदि निश्चित नहो वहाँ कोई ध्येय |मौनका लक्ष्य है प्रेम,मौन मौन कालक्ष्य है दया मौनका लक्ष्य है आनन्द,और मौन मौन काहै लक्ष्य संगीत भी |मौन, ऐसा गीत जो कभीगाया नहीं गया,फिरभी मुखरित हो गया |मौन, ऐसा
17 जुलाई 2018
15 जुलाई 2018
जीवन पानी का बुलबुला, पानी के मोल मत समझो, जीवन का हैं दूसरा नाम , प्रकृति का अमूल्य उपहार, जीवनदायिनी तरल, पानी की तरह मत बहाओ, पूज्यनीय हमारे हुए अनुभवी, घाट- घाट का पानी पीकर, जिन्हें हम, पिन्डा पानी देते, तलवे धो- धोकर हम पीते, ×---×----×-----×---×--× सामाजिक प्राणी है, जल में रहकर, मगर
15 जुलाई 2018
24 जुलाई 2018
गो
काव्य मंचों के अपरिहार्य ,नैसर्गिक प्रतिभा के धनी,प्रख्यात गीतकार ,पद्मभूषण से सम्मानित,जीवन दर्शन के रचनाकार,साहित्य की लम्बी यात्रा के पथिक रहे,नीरज जी का जन्म उत्तर प्रदेश के जिला इटावा के पुरावली गांव में श्री ब्रज किशोर सक्सेना जी के घर ४ जनवरी,१९२५ को हुआ था.गरीब परिवार में जन्मे नीरज जी की ज
24 जुलाई 2018
19 जुलाई 2018
मेरा अन्तर इतनाविशाल समुद्र से गहरा/ आकाश से ऊँचा / धरती सा विस्तृत जितना चाहे भरलो इसको / रहता है फिर भी रिक्त ही अनगिन भावों काघर है ये मेरा अन्तर कभी बस जाती हैंइसमें आकर अनगिनती आकाँक्षाएँ और आशाएँजिनसे मिलता हैमुझे विश्वास और साहस / आगे बढ़ने का क्योंकि नहीं हैकोई सीम
19 जुलाई 2018
16 जुलाई 2018
मै
मैं और मेरा शहर सौन्दर्यीकरण का अद्भुत नमूना शोरगुल भरें, चकाचौंध करते जातपात, धर्म वाद से परे पर अर्थ वाद की व्यापकता बचपन की यादों से जुडा मेरी पहचान का वो हिस्सा जानकर भी अनजान बने रहते आमने सामने पड जाते तो कलेजा उडेल देते प्रदूषण, शोर, भीड़ भरा शहर ना पक्षियों की चहचहाहट भोर होने का एहसास करात
16 जुलाई 2018
15 जुलाई 2018
बीते 30 जून को हैदराबाद में इरडा ( इन्सुरेंस रेग्युलेटरी डेवलोपमेन्ट ऑथारिटी ऑफ इंडिया ) की हुई बोर्ड मीटिंग में सरकार के उस फैसले को मंजूरी मिल गयी जिसमें सरकारी बैंक आईडीबीआई में जीवन बीमा निगम (एलआईसी
15 जुलाई 2018
11 जुलाई 2018
हर इंसान की ज़िन्दगी में एहसास का मतलब बहुत की महत्वपुर्ण होता है क्यूंकि एहसास किसी भी तरीके का हो हर एक ही ज़िन्दगी में होता ज़रूर है बस उसके रूप फरक होते है. कोई अपने रिश्तो के एहसास से खुश है तो कोई अपनी सफलता से. आज यहाँ भ
11 जुलाई 2018
09 जुलाई 2018
भ्
कैसे- कैसे भ्रम पाल रखे हैं. .... सोते से जाग उठी ख्याली पुलाव पकाती उलझनों में घिरी मृतप्राय जिन्दगी में दुख का कुहासा छटेगा जीने की राह मिलेगी बोझ की गठरी हल्की होगी जीवन का अल्पविराम मिटेगा हस्तरेखा की दरारें भरेगी विधि का विधान बदलेगा उम्मीद के सहारे नैय्या पार लग जायेगी बचनों मे विवशता का पुल
09 जुलाई 2018
02 अगस्त 2018
गु
क्षण-प्रतिक्षण,जिंदगी सीखने का नाम सबक जरूरी नहीं,गुरु ही सिखाएजिससे शिक्षा मिले वही गुरु कहलाये जीवंत पर्यन्त गुरुओं से रहता सरोकार हमेशा करना चाहिए जिनका आदर-सत्कार प्रथम पाठशाला की गुरु माँ बनी दूजी शाला के शिक्षक गुरु बने सामाजिकता का पाठ माँ ने सिखाया शैक्षणिक स्तर शिक्षक ने उच्च बनाया नैतिक श
02 अगस्त 2018
06 अगस्त 2018
बू
आसमां से धरती तक पदयात्रा करती हरित पर्ण पर मोती सी चमकती बूंद बूंद घट भरे बहती बूंदे सरिता बने काली ने संहार कर एक एक रक्त बूंद चूसा बापू ने रक्त बूंद बहाये बिना नयी क्रांति का आह्वान किया बरसती अमृत बूंदें टेसू पूनम की रोगी काया को निरोगी करे मन को लुभाती ओस की बूंदें क्षणभंगुर सम अस्तित्व का ज
06 अगस्त 2018
05 अगस्त 2018
रा
राषटर् कविमानस भवन में आरय़जनजिसकी उतारे आरती।भगवान भारतव्रष मेंगूंजें हमारी भारती।। हिंदी साहित्य के राष्ट्र कवि पद्मभूषण से सम्मानित श्री मैथलीशरणगुप्त जी का जन्म ३ अगस्त,१८८५में उत्तर प्रदेश के जिला झाँसी के चिरगांव में हुआ था.हम सब प्रतिवर्ष जयंती कोकवि दिवस के रूप में मनाते हैं.अपनी पहली काव्य
05 अगस्त 2018
23 जुलाई 2018
ठहरे पानी में पत्थर उछाल दिया है । उसने यह बड़ा कमाल किया है ।वह तपाक से गले मिलता है आजकल । शायद कोई नया पाठ पढ़ रहा है आजकल । आँखों की भाषा भी कमाल है । एक गलती और सब बंटाधार है ।
23 जुलाई 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x