वो क्यों नहीं आई !

23 जुलाई 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (80 बार पढ़ा जा चुका है)

वो क्यों नहीं आई !

लाठी की टेक लिए चश्मा चढाये,

सिर ऊँचा कर मां की तस्वीर पर,

एकटक टकटकी लगाए,

पश्चाताप के ऑंसू भरे,

लरजती जुवान कह रही हो कि,

तुम लौट कर क्यों नहीं आई,

शायद खफा मुझसे,बस,

इतनी सी हुई,

हीरे को कांच समझता रहा,


ALONE

समर्पण भाव को मजबूरी का नाम देता,

हठधर्मिता करता रहा,जानकर भी,

नकारता रहा,फिर, पता नहीं कौन सी बात,

दिल को लगा बैठी,और एक दिन यूं रूठकर चली गई

अपने आप को कोसता रहा,लौट आने की,

मंदिरों में मन्नतें मांगता रहा,गुहार करता रहा,

तुमसे दो शब्द कहना चाहता हूँ,तुम तो दया की मूरत,

मेरे प्रतिकारो को,विस्मृत करके लौट आओ,

लेकिन समझता हूं कि,तुम्हारे लौट के ना आने का....

अगला लेख: उम्मीदों की मशाल



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
23 जुलाई 2018
ठहरे पानी में पत्थर उछाल दिया है । उसने यह बड़ा कमाल किया है ।वह तपाक से गले मिलता है आजकल । शायद कोई नया पाठ पढ़ रहा है आजकल । आँखों की भाषा भी कमाल है । एक गलती और सब बंटाधार है ।
23 जुलाई 2018
04 अगस्त 2018
रामू की माँ तो अपने पति के शव पर पछाड़ खाकर गिरी जा रही थी.रामू कभी अपने छोटे भाई बहिन को संभाल रहा था ,तो कभी अपनी माँ को.अचानक पिता के चले जाने से उसके कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ आ पड़ा था.पढ़ाई छोड़,घर में चूल्हा जलाने के वास्ते रामू काम की तलाश में सड़को की छान मारता।अंततःउसने घर-घर जाकर रद्दी बेच
04 अगस्त 2018
17 जुलाई 2018
या
समय समय की बात यातना का जरिया बदला आमने सामने से ना लेते देते अब व्हाटसअप, फेसबुक से मिलती। जमाना वो था असफल होने पर बेटे ने बाप की लताड से सीख अव्वल आकर बाप का फक्र से सीना चौडा करता, पर अब तो, लाश का बोझ कंधे पर डाल दुनियां से ही अलविदा हो चला। सासूमां का बहू को सताना सुधार का सबक होता था नखरे
17 जुलाई 2018
10 जुलाई 2018
हँसमुखी चेहरे पर ये कोलगेट की मुस्कान,बिखरी रहे ये हँसी,दमकता रहे हमेशा चेहरा,दामन तेरा खुशियों से भरा रहे,सपनों की दुनियां आबाद बनी रहे,हँसती हुई आँखें कभी नम न पड़े,कालजयी जमाना कभी आँख मिचौली न खेले,छलाबी दुनियां से ठग मत जाना,खुशियों की यादों के सहारे,दुखों को पार लगा लेना,कभी ऐसा भी पल आये जीवन
10 जुलाई 2018
19 जुलाई 2018
मेरा अन्तर इतनाविशाल समुद्र से गहरा/ आकाश से ऊँचा / धरती सा विस्तृत जितना चाहे भरलो इसको / रहता है फिर भी रिक्त ही अनगिन भावों काघर है ये मेरा अन्तर कभी बस जाती हैंइसमें आकर अनगिनती आकाँक्षाएँ और आशाएँजिनसे मिलता हैमुझे विश्वास और साहस / आगे बढ़ने का क्योंकि नहीं हैकोई सीम
19 जुलाई 2018
15 जुलाई 2018
बीते 30 जून को हैदराबाद में इरडा ( इन्सुरेंस रेग्युलेटरी डेवलोपमेन्ट ऑथारिटी ऑफ इंडिया ) की हुई बोर्ड मीटिंग में सरकार के उस फैसले को मंजूरी मिल गयी जिसमें सरकारी बैंक आईडीबीआई में जीवन बीमा निगम (एलआईसी
15 जुलाई 2018
02 अगस्त 2018
गु
क्षण-प्रतिक्षण,जिंदगी सीखने का नाम सबक जरूरी नहीं,गुरु ही सिखाएजिससे शिक्षा मिले वही गुरु कहलाये जीवंत पर्यन्त गुरुओं से रहता सरोकार हमेशा करना चाहिए जिनका आदर-सत्कार प्रथम पाठशाला की गुरु माँ बनी दूजी शाला के शिक्षक गुरु बने सामाजिकता का पाठ माँ ने सिखाया शैक्षणिक स्तर शिक्षक ने उच्च बनाया नैतिक श
02 अगस्त 2018
16 जुलाई 2018
मै
मैं और मेरा शहर सौन्दर्यीकरण का अद्भुत नमूना शोरगुल भरें, चकाचौंध करते जातपात, धर्म वाद से परे पर अर्थ वाद की व्यापकता बचपन की यादों से जुडा मेरी पहचान का वो हिस्सा जानकर भी अनजान बने रहते आमने सामने पड जाते तो कलेजा उडेल देते प्रदूषण, शोर, भीड़ भरा शहर ना पक्षियों की चहचहाहट भोर होने का एहसास करात
16 जुलाई 2018
11 जुलाई 2018
तड़के सुबह से ही रिश्तेदारों का आगमन हो रहा था.आज निशा की माँ कमला की पुण्यतिथि थी. फैक्ट्री के मुख्यद्वार से लेकर अंदर तक सजावट की गई थी.कुछ समय पश्चात मूर्ति का कमला के पति,महेश के हाथो अनावरण किया गया.कमला की मूर्ति को सोने के जेवरों से सजाया गया था.एकत्र हुए रिश्तेदार समाज के लोग मूर्ति देख विस्म
11 जुलाई 2018
12 जुलाई 2018
टे
मुंह अँधेरे ही भजन की जगह,फोन की घंटी घनघना उठी,घंटी सुन फुर्ती आ गई,नही तो,उठाने वाले की शामत आ गई,ड्राईंग रूम की शोभा बढाने वाला,कचड़े का सामान बन गया,जरूरत अगर हैं इसकी,तो बदले में कार्डलेस रख गया,उठते ही चार्जिंग पर लगाते,तत्पश्चात मात-पिता को पानी पिलाते,दैनान्दनी से निवृत हो,पहले मैसेज पढ़ते,बा
12 जुलाई 2018
10 जुलाई 2018
हँसमुखी चेहरे पर ये कोलगेट की मुस्कान,बिखरी रहे ये हँसी,दमकता रहे हमेशा चेहरा,दामन तेरा खुशियों से भरा रहे,सपनों की दुनियां आबाद बनी रहे,हँसती हुई आँखें कभी नम न पड़े,कालजयी जमाना कभी आँख मिचौली न खेले,छलाबी दुनियां से ठग मत जाना,खुशियों की यादों के सहारे,दुखों को पार लगा लेना,कभी ऐसा भी पल आये जीवन
10 जुलाई 2018
17 जुलाई 2018
कोईअस्तित्व न हो शब्दों का, यदि हो न वहाँ मौन का लक्ष्य |कोईअर्थ न हो मौन का,यदि निश्चित नहो वहाँ कोई ध्येय |मौनका लक्ष्य है प्रेम,मौन मौन कालक्ष्य है दया मौनका लक्ष्य है आनन्द,और मौन मौन काहै लक्ष्य संगीत भी |मौन, ऐसा गीत जो कभीगाया नहीं गया,फिरभी मुखरित हो गया |मौन, ऐसा
17 जुलाई 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x