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मोदी जी , आपको अपने घर में लगी आग बुझाने का ख़याल नहीं आता ?

5 जनवरी 2016

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featured image'बेकसूर लोग मारे गए और राजनेता तुच्छ बयानबाजी में उलझे रहे.' 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद एक अंग्रेजी अखबार ने इन्हीं शब्दों में देश के हालात बयां किए थे. साल बदले, सत्ता बदली लेकिन हालात बिल्कुल वैसे ही हैं. देश में आतंकी हमला होता है. जवान शहीद होते हैं. घायल होते हैं. उनका परिवार बिलखता है. देश का बच्चा-बच्चा उनके लिए रोता है. लेकिन हमारे 'सो कॉल्ड' नेताओं के लिए तो यह जैसे यह एक 'बड़ा मौका' है. राजनीति चमकाने क्ा्. सत्ता संभालने से पहले लाउडस्पीकर लेकर पाकिस्तान को धूल चटा देने का ढिंढोरा पीटने वाले नरेंद्र मोदी पीएम बने तो अब उसी देश में जाकर अपना पसंदीदा साग खाने लगे. कश्मीर का मुद्दा भले ना सुलझे लेकिन पाकिस्तान में बैठकर कश्मीरी चाय भी पी आए, देश का क्या है...बेगुनाह मरते रहे हैं, मरते रहेंगे. कौन सी बड़ी बात है नेताओं के लिए. बहुत होगा तो यही कहेंगे कि हमले का मुंह तोड़ जवाब देंगे, कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, फलाना..ढिमकाना. बीते शनिवार को जब आतंकियों ने पठानकोट में हमला किया तो उसकी जानकारी खुफिया एजेंसियों को 24 घंटे पहले मिल गई, फिर भी हमला हो गया. जवान शहीद होते रहे, घायल होते रहे और देश के प्रधानमंत्री मैसूर में फिर लाउडस्पीकर पर दहाड़ रहे थे- 'हमें जवानों पर गर्व है.' लेकिन मुझे इस बात पर शर्म आती है कि 'देश नहीं झुकने दूंगा' का राग अलापने वाला प्रधानमंत्री खुली आंखों से देश को तबाह होते देख रहा है. मंच पर मोदी इस बात का गुणगान कर रहे थे कि उन्होंने योग दिवस का आयोजन कराया और दुनिया भर में भारत को सिर आंखों पर बिठा लिया गया. जिस वक्त उन्हें आतंक से निपटने के लिए रणनीति बनाने और जवानों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए उस वक्त वह घटना स्थल से सैकड़ों कोस दूर राजनीतिक गोटियां फिट करने में व्यस्त थे. उनके पास इतना भी वक्त नहीं होता कि वह हालात का सही से जायजा भी ले सकें और एयरपोर्ट पर ही रक्षा मंत्री से गुफ्तगू करते हैं. देश के गृह मंत्री कहते हैं कि इससे भी बड़ा नुकसान हो सकता है. शायद उन्हें परिवार में किसी को खोने का गम मालूम नहीं. हमारे सैनिकों ने मुंह तोड़ जवाब दिया, हमारे जांबाजों ने बड़ा हमला नाकाम किया... ये राग अलाप रहे गृह मंत्री अपनी सरकार की नाकामी छुपा रहे हैं. उस सिस्टम की नाकामी छुपा रहे हैं जिसकी वजह से जवान शहीद हो रहे हैं और वो गर्व से कह रहे हैं कि 'ज्यादा नुकसान' नहीं हुआ है. गृह मंत्री साहब को उन शहीद जवानों के परिवार वालों से नजरें मिलाकर ये शब्द कहने चाहिए थे तब देश उनके चेहरे का रंग देखता. दुनिया भ्रमण पर निकले प्रधानमंत्री ने हर जगह आतंकवाद मिटाने की रट तो लगाई लेकिन अपने ही घर में लगी आग बुझाने का ख्याल उ्््न्््को नहीं आता. गुरदासपुर, उधमपुर और अब पठानकोट में हुआ आतंकी हमला इस बात पर मुहर लगाता है कि सरकार इस मोर्चे पर फेल है. सिर्फ अपना झूठा गुणगान कर सकती है, हकीकत कुछ और है. ऐसा नहीं कि आतंकी हमले पहले नहीं हुए. हर सरकार में होते हैं, लेकिन तब शायद गुजरात के तत्कालीन सीएम साहेब भूल गए थे कि क्या कहे जा रहे हैं. और विपक्ष वाले तो हर तरफ से थके-हारे बैठे थे. कुछ मिल नहीं रहा था, सो बैठे-बिठाए पठानकोट का मुद्दा मिल गया और लगे भुनाने. 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' टाइप मामला है. कभी विपक्षी सरकार पर यह कहते हुए कि 'पाकिस्तान को लव लेटर लिखना बंद करिए', निशाना साधने वाले मोदी क्या खुद इस बात पर अमल कर पाए हैं? साड़ी, शॉल और पगड़ी के तोहफे बंट रहे हैं और सेना के जवानों की वर्दी खून से रंग रही है. 'मन की बात' करने वाले प्रधानमंत्री जरा इस राज से पर्दा हटाएं कि असल में उनके मन में चल क्या रहा है?

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गौरी कान्त शुक्ल

गौरी कान्त शुक्ल

सही बिलकुल सही कहा आपने ! नेताओं को अपनों को खोने को दर्द क्या मालूम यदि किसी का बेटा सहीद हो तो दर्द मालूम हो सेना के जवानों/और उनके परिवार की सुरछा की किसी को चिंता नहीं है

6 जनवरी 2016

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त्योहारों से जुड़े कारोबार में अपार संभावनाएं

13 अप्रैल 2015
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दुनियां की कुल आबादी के १७.५ % हिस्सेवाला पृथ्वी पर ऐसा कौन सा देश होगा,जहां ७०० से ज्यादा त्यौहार करोड़ों लोगों द्वारा मनाये जाते हैं. भारत के अलावा दूसरे किसी देश की ये खासियत नहीं है. लेकिन इसके बाबजूद हम इसका फायदा नहीं उठा पा रहे हैं. चीनी लोगों को ये बात समझ आ गयी है और वे हमारे बाजार

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बिक्री बढ़ानी है तो सीधे ग्राहक से जुड़िये

14 अप्रैल 2015
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पीटर ड्रकर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मार्केटिंग गुरु माने जाते हैं. उन्होंने एक मंत्र दिया - "बिक्री बढ़ानी है तो सीधे ग्राहक से जुड़िये." कैडबरी इंडिया ने इस मंत्र को पूरी तरह अपनाया. वह अपने ग्राहकों से सीधे जुडी,उनके ख़ुशी के पलों को उनके साथ मिलकर सेलिब्रेट किया,लोगों के दिल में जगह बनायीं... और

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बेटा,हमसे हमारा "जीवन" ना छीनो ....

13 मई 2015
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मैं एक बात पिछले कई दिनों से नोटिस कर रहा था......, हर सुबह जब मैं जॉगिंग के जाता,तो एक अंकल-आंटी को पार्क के कोने पर पड़ी एक बेंच पर गुमसुम बैठे देखता. मन में कई बार आता की मैं कुछ देर उनके साथ बैठकर बात करूँ. लेकिन १-२ दिन तो सोचते हुए ही निकल गए. एक दिन मैं उनके पास बेंच पर जा बैठा. देखने में

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जानिए कैसे पता करें सिलेंडर की एक्सपायरी डेट, कैसे मिलेगा बीमा

10 जुलाई 2015
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आप के घर में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर की एक्सपायरी डेट क्या है? आप की रसोई में लगे गैस सिलेंडर से हादसा हो जाने पर आपको कितना बीमा मिलता है? ये ऐसे सबाल हैं जिनके जबाव सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले शायद 1 फीसद उपभोक्ता भी नहीं जानते होंगे। जागरुकता कम होने के कारण ज्यादातर लोग सिलेंडर बिना एक्सपाय

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स्वाभिमान

10 जुलाई 2015
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महाराणा प्रताप ने जंगलों में अपार कष्टों को झलते हुए एक बार मन की कमज़ोरी का अहसास हुआ . वन में बच्चों को बनायीं हुई घास की रोटी भी कोई जानवर उठा ले गया तो वे मानसिक रूप से टूट गए . उस समय उन्होंने खुद को दयनीय स्थिति में पाकर अकबर से संधि कर लेनी चाही. उनके एक भक्त सेवक चारण को इस बात का प

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R.T.I. डालने हेतु पत्र तैयार करने का तरीका - (उदाहरणार्थ - अस्पताल में दवाइयों की कमी)

2 अगस्त 2015
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सेवा में, जन सूचना अधिकारी, विषय- ..................... महोदय, ........स्थित .......अस्पताल के सम्बंध में निम्न सूचनायें उपलब्ध करायें- 1. दिनॉक ......से ........के बीच अस्पताल के लिये कुल कितनी रकम की दवाईयॉ खरीदी गयीं ? दवाईयों के खरीदने व उन्हें अस्पताल / चिकित्सा केन्द्र के स्टॉक में रखे

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तुलसी का महत्व क्या है.....???

12 नवम्बर 2015
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तुलसी का पौधा बता देगा, आप पर कोई मुसीबत आने वाली है।सभी मित्रों के लिए महत्वपूर्ण है ।क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि आपके घर, परिवार या आप पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी के पौधे पर होता है। आप उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें धीरे-धीरे वो पौधा सूखन

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ये गंदगी तो महल वालो ने फैलाई है “साहिब”

14 नवम्बर 2015
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ये गंदगी तो महल वालो ने फैलाई है “साहिब”वरना गरीब तो सङको से थैलीयाँ तक उठा लेते है ! -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------“समुद्र बड़ा होकर भी,अपनी हद में रहता है,जबकि इन्सान छोटा होकर

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ये गंदगी तो महल वालो ने फैलाई है “साहिब”

23 नवम्बर 2015
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ये गंदगी तो महल वालो ने फैलाई है “साहिब”वरना गरीब तो सङको से थैलीयाँ तक उठा लेते है ! -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------“समुद्र बड़ा होकर भी,अपनी हद में रहता है,जबकि इन्सान छोटा होकर

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यही है अपना प्यारा डिजिटल इंडिया

24 नवम्बर 2015
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मैं स्वप्न-लोक में एक के बाद एक, कई-कई जगहों के कई-कई दृश्य देख रहा था। पहला दृश्य: झमाझम बरसात, न कम और न ज्यादा। दूसरा: हरे-भरे खेत पूर्ण यौवन पर। तीसरा: बालियों से लदे धान के खेत झूमते हुए।सरकारी विज्ञापनों में दिखाया जाने वाला रंगीन पगड़ीधारी किसान नए-नवेले ट्रैक्टर के बगल में खड़ा मुस्कराता हुआ

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आखिर ये बेवफाई और वफ़ा क्या है ....???

5 दिसम्बर 2015
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मेरी मोहब्बत मेरे दिल की गफलत थीमैं बेसबब ही उम्र भर तुझे कोसता रहा…..आखिर ये बेवफाई और वफ़ा क्या हैतेरे जाने के बाद देर तक सोचता रहा……मैं इसे किस्मत कहूँ या बदकिस्मती अपनीतुझे पाने के बाद भी तुझे खोजता रहा….सुना था वो मेरे दर्द मे ही छुपा है कहींउसे ढूँढने को मैं अपने ज़ख्म नोचता रहा…

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ओशो के दस विचार, जो लोगों में आत्मविश्वास भरते हैं :-

15 दिसम्बर 2015
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प्रसिद्ध धर्म गुरु रजनीश ओशो का 11 दिसंबर को जन्मदिन है। रजनीश मूल रूप से फिलॉसफी के टीचर थे। धर्म और दर्शन की स्थापित मान्यताओं से अलग व्याख्या कर वह विवादित हो गए थे। बहुत कम लोग जानते हैं कि ओशो ने अपने शिक्षण करियर की शुरुआत रायपुर के संस्कृत कॉलेज से की थी, जहां उन्होंने डेढ़ साल साल अपनी सेवाएं

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दम तोड़ती संवेदनाएं …

18 दिसम्बर 2015
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     बारिश का मौसम था, गली में पानी भरा था, सरकारी स्कूलों की छुट्टी हुई थी . गली में कुछ बच्चे हुर्दंग मचाते एक -दूसरे पर पानी के छींटे मारते जा रहे थे . मैं अपने छोटे से बेटे के साथ घर की बालकनी पर खड़ा ये नज़ारा देख रहा था . तभी मैंने एक अजीब सा हाद्सा देखा . खेलते- खेलते एक बच्चा अचानक बेसुध सा हो

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भगवान कृष्ण से सीखें ये 10 सक्‍सेस मंत्र :-

21 दिसम्बर 2015
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श्रीकृष्ण की सिखाई गई बातें युवाओं के लिए इस युग में भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितनी अर्जुन के लिए रहीं. इस बार शि‍क्षक दिवस और जन्माष्टमी एक ही दिन हैं तो जानिए कि उनके दिए व्यवहारिक ज्ञान का सार कैसे आज के प्रतियोगी युग में भी सफलता की गारंटी देता है :-1. कृष्ण हर मोर्चे पर क्रांतिकारी विचारों के

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सुबह गुनगुने पानी में शहद डालकर पीने के लाभ :-

21 दिसम्बर 2015
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       इस बात से हम सभी वाकिफ हैं कि सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस और शहद मिलाकर पीना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा होता है। शहद को गर्म पानी के साथ लेने से वजन कम होता है। और इसके नियमित सेवन से सेहत से जुड़ी कई समस्याओंसे हमेशा के लिए निजात मिल सकती है। 1. पाचन सुधारे :-अच्छे पाचन के लिए

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जब देश में एक चपरासी के लिए योग्यता तय है , तो नेताओं के लिए योग्यता निर्धारित होनी चाहिए या नहीं …?

23 दिसम्बर 2015
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sachin sharma's Knowledge Tonic

25 दिसम्बर 2015
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सिर्फ पढ़े - लिखे ही बनें जनप्रतिनिधि

26 दिसम्बर 2015
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      अधिकतर गैर-बीजेपी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय की कटु आलोचना की है, जिसमें उसने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित वाले हरियाणा सरकार के कानून को वाजिब करार दिया है। न्यायालय ने कहा कि ‘यह सिर्फ शिक्षा है जो मनुष्य को सही-गलत, अच्छे-बुरे में भेद करने का सामर्थ्य

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इन सबको खाने से भला कौन रोक सकता है :-

26 दिसम्बर 2015
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    हे वत्स ! सब नेताओं की नीति एक है। भले ही इनकी पार्टी अलग-अलग है। भले ही इनके झंडे अलग-अलग हैं। भले ही इनकी टोपियां अलग-अलग हैं। भले ही इनके चुनाव चिन्ह भी अलग हैं। तू इनका झंडा, इनकी टोपी, इनका चिन्ह और इनके नाना प्रकार के रंग देखकर भ्रम‌ित मत हो। ये मन कर्म और वचन से एक ही हैं। तू इन्हें बुद्ध

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वयस्क हैं तो अपने स्मार्टफोन में जरूर रखें ये 5 ऐप

28 दिसम्बर 2015
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       ये ऐप उन लोगों के लिए सेहत की चाबी साबित हो सकता है जो अक्सर पानी पीना भूल जाते हैं। कितना और कब पानी पिएं, इस बात की चिंता इस ऐप पर छोड़ दीजिए। प्लांट नैनी एक ऐप है जो आपको आपकी जरूरत के अनुसार पानी पीने के लिए रिमाइंडर देता है। इस ऐप के जरिए एक छोटा प्लांट बडी आपके फोन स्क्रीन पर पानी का रि

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बोर्ड एग्‍जाम में कम नंबर लाने वाले बेटे के नाम पिता का खुला खत

29 दिसम्बर 2015
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    बोर्ड एग्‍जाम में कम नंबर आने से अक्‍सर हम निराशा हो जाते हैं, लेकिन अगर पेरेंट्स बच्‍चे का साथ दें तो मुश्किल आसान हो जाती है. एग्‍जाम में कम नंबर लाने वाले ऐसे ही एक बेटे का नाम पिता का खत :-  मेरे प्रिय बेटे,   आज तुम्‍हारे फोन का इंतजार कर रहा था. हर रोज की तरह तुम मुझसे पूछते हो कि पापा ऑफि

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स्मार्टफोन, कंप्यूटर और फेसबुक के साइड इफेक्ट

30 दिसम्बर 2015
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 शायद तकनीक को ज्यादा इस्तेमाल करने वाले दंपति ऐसा महसूस कर रहे होंगे कि व्हाट्सऐप और फेसबुक ने उनके बीच दूरियां बढ़ा दी है। अपने अपने नेटवर्क में व्यस्त रहना और आपस में संवाद कम करना ही तकनीक का सबसे बड़ा नुकसान है। आजकल कपल्स के बीच तकनीक के चलते जो दूरी आ गई है वो आने वाले दिनों में बढ़ने वाली है

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"बेटियाँ मंदिर की घंटियाँ होती हैं"

1 जनवरी 2016
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बेटियाँ रिश्तों-सी पाक होती हैंजो बुनती हैं एक शालअपने संबंधों के धागे से।बेटियाँ धान-सी होती हैंपक जाने पर जिन्हेंकट जाना होता है, जड़ से अपनीफिर रोप दिया जाता है जिन्हेंनई ज़मीन में।बेटियाँ मंदिर की घंटियाँ होती हैं,जो बजा करती हैंकभी पीहर तो कभी ससुराल में।बेटियाँ पतंगें होती हैंजो कट जाया करती ह

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ज़िंदगी यूँ भी जली, यूँ भी जली मीलों तक : कुँअर बेचैन

3 जनवरी 2016
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ज़िंदगी यूँ भी जली, यूँ भी जली मीलों तक,चाँदनी चार क‍़दम, धूप चली मीलों तक /प्यार का गाँव अजब गाँव है जिसमें अक्सर,ख़त्म होती ही नहीं दुख की गली मीलों तक /प्यार में कैसी थकन कहके ये घर से निकली,कृष्ण की खोज में वृषभानु-लली मीलों तक /घर से निकला तो चली साथ में बिटिया की हँसी,ख़ुशबुएँ देती रही नन्हीं

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वर्ना रो पड़ोगे :-

4 जनवरी 2016
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बंद होंठों में छुपा लोये हँसी के फूलवर्ना रो पड़ोगे।हैं हवा के पासअनगिन आरियाँकटखने तूफान कीतैयारियाँकर न देना आँधियों कोरोकने की भूलवर्ना रो पड़ोगे।हर नदी परअब प्रलय के खेल हैंहर लहर के ढंग भीबेमेल हैंफेंक मत देना नदी परनिज व्यथा की धूलवर्ना रो पड़ोगे।बंद होंठों में छुपा लोये हँसी के फूलवर्ना रो पड

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मोदी जी , आपको अपने घर में लगी आग बुझाने का ख़याल नहीं आता ?

5 जनवरी 2016
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'बेकसूर लोग मारे गए और राजनेता तुच्छ बयानबाजी में उलझे रहे.' 26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद एक अंग्रेजी अखबार ने इन्हीं शब्दों में देश के हालात बयां किए थे. साल बदले, सत्ता बदली लेकिन हालात बिल्कुल वैसे ही हैं. देश में आतंकी हमला होता है. जवान शहीद होते हैं. घायल होते हैं. उनका परिवार बिलखता है. देश

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"तनावमुक्ति के उपाय"

7 जनवरी 2016
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   आधुनिक जीवन में तनाव न हो यह संभव नहीं है. जीवन मिला है तो रोजमर्रा की परेशानियां भी मिली हैं. गरीब, मध्यवर्गीय, धनी, धनकुबेर – सभी किसी-न-किसी कारण से चिंतित रहते हैं और तनाव उनके शरीर को खोखला करता रहता है. समस्याओं की प्रतिक्रिया करने से तनाव उपजता है. तनाव जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. हांला

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10 विचार जो आपको देंगे हर हालत में जीतने का जज्बा

10 जनवरी 2016
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मंजिल पर पहुंचने से पहले का रास्ता थकाने और हिम्मत तोड़ने वाला होता है. ऐसे में कोई भी हार कर बैठ सकता है. लेकिन जो अपने जज्बे को बनाए रखते हैं, वे बाद में किस्मत के धनी कहलाते हैं. अगर आप भी इस श्रेणी में आना चाहते हैं तो दुनिया की कुछ बड़ी हस्तियों की इन 10 बातों को जरूर याद रखें -1. सत्य से बड़ा

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रामजन्मभूमि मुद्दे पर सेमिनार के आयोजन को लेकर "दिल्ली विश्वविद्यालय" सियासी अखाड़े में बदल गया है. क्या एक शैक्षिक संस्थान को विवादों में लाना उचित है ?

10 जनवरी 2016
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मनुबेन की डायरी के अंश: दुनिया जो कहती है वह कहती रहे....

11 जनवरी 2016
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महात्मा गांधी की अंतरंग सहयात्री की हाल ही में मिली डायरी बताती है कि ब्रह्मचर्य को लेकर किए गए उनके प्रयोग ने मनुबेन के जीवन को कैसे बदल डाला. वह भारतीय इतिहास का एक जाना-पहचाना चेहरा है जो आखिरी दो साल में ‘सहारा’ बनकर साये की तरह महात्मा गांधी के साथ रही. फिर भी यह चेहरा लोगों के लिए एक पहेली है.

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आज के दौर में….

14 जनवरी 2016
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ऊँची इमारतों से मकान मेरा घिर गया,कुछ लोग मेरे हिस्से का सूरज भी खा गए।गिन गिन के सिक्के हाथ मेरा खुरदरा हुआजाती रही वो स्पर्श की नरमी,बुरा हुआ।कौन सा शेर सुनाऊँ मैं तुम्हे, सोचता हूँ,नया उलझा है बहुत, और पुराना मुश्किल।सब का ख़ुशी से फासला एक कदम है,हर घर में बस एक ही कमरा कम है।अपनी वज्हे-बर्बादी स

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