shabd-logo

परदेशिया

30 दिसम्बर 2023

28 बार देखा गया 28


अबकी बार देखा...

कुछ झुकी और अभिशप्त

खामोश सी निगाहें,

जिनमें थीं मजबूरियां

साथ साथ कातर विवशता..

जिन्हें समझा था बेवफा

बस

भरते रहें आहें........

अबकी बार देखा

वो गलियां अब सूनी थीं,

गुजारा जहां बचपन...

सम्हाला अपना होश..

और देखा अबकी बार...

होकर मजबूर उठे दो हाथ,

मिला था सहारा जिनसे..

देते हैं आशीष व दुआएं.

देखा मैंने

उनका छूटता हुआ साथ.................

..........🙁🙁🙁🙁🙁🙁🙁🙁


Pawan Kumar Pathak "Roshan" की अन्य किताबें

मीनू द्विवेदी वैदेही

मीनू द्विवेदी वैदेही

बहुत सुंदर लिखा है आपने 👌 आप मुझे फालो करके मेरी कहानी प्रतिउतर पर अपनी समीक्षा जरूर दें 🙏

30 दिसम्बर 2023

Pawan Kumar Pathak "Roshan"

Pawan Kumar Pathak "Roshan"

30 दिसम्बर 2023

जरूर। समीक्षा के लिए बहुत बहुत आभार ।

5
रचनाएँ
Pawan Kumar Pathak "Roshan" की डायरी
0.0
इस किताब में मेरे द्वारा लिखी गई कुछ कहानियों कविताओं का संग्रह है । आपके आशीर्वाद की कामना करते हैं ।।।
1

परदेशिया

30 दिसम्बर 2023
1
1
2

अबकी बार देखा... कुछ झुकी और अभिशप्त खामोश सी निगाहें, जिनमें थीं मजबूरियां साथ साथ कातर विवशता.. जिन्हें समझा था बेवफा बस भरते रहें आहें........ अबकी बार देखा वो गलियां अब सूनी

2

यादों का बरगद

30 दिसम्बर 2023
1
1
2

वो एक बहुत ही पुराना बरगद का पेड़ था जिसके बगल से होकर रेलवे लाइन गुजरती है। उससे सटा हुआ रास्ता कच्चा व कीचड़ भरा होने के कारण आदमियों की भीड़ से दूर रहता है। जब से बारहवीं पास करके विद्यालय छोड़ा तब से

3

कविता और शायरी संग्रह

31 दिसम्बर 2023
0
0
0

थोड़ा ठहर जा ऐ वक्त,, कुछ जख्मों के निसान. थोड़ा दिल का अरमान अभी बाकी है....... ठहर गए थे लमहे यूंही चंद फिजाओं के लिए मुकम्मल इश्क का तो सारा मुकाम अभीं बाकी है......।।।।।।।।। रोशन त

4

महक

31 दिसम्बर 2023
0
0
0

अब सिर्फ पन्द्रह मिनट शेष रह गया था रेलगाड़ी के आने में अतः मैं अपना सामान संभालता हुआ स्टेशन की तरफ चल पड़ा। जनवरी का महीना होने के कारण शीत ऋतु अपने समग्र यौवन के साथ प्रकृति में संलग्न होकर हर एक वस्

5

ये कैसी मौत

2 फरवरी 2024
0
0
0

मौत, एक ऐसा नाम जिसे सुनकर देंह कांप उठे । वो विधि का अटल विधान है। कुछ मौतें ऐसी होती हैं जिसे देखकर लोग भगवान से यहीं दुआ करते हैं कि इस प्रकार की मृत्यु किसी की न हो। इसी तरह की एक मौत मेरी आंखों क

---

किताब पढ़िए

लेख पढ़िए