प्रणाम का महत्त्व :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

21 अगस्त 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (113 बार पढ़ा जा चुका है)

प्रणाम का महत्त्व :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारी भारतीय संस्कृति सदैव से ग्राह्य रही है | हमारे यहाँ आदिकाल से ही प्रणाम एवं अभिवादन की परम्परा का वर्णन हमारे शास्त्रों में सर्वत्र मिलता है | कोई भी मनुष्य जब प्रणाम के भाव से अपने बड़ों के समक्ष जाता है तो वह प्रणीत हो जाता है | प्रणीत का अर्थ है :- विनीत होना , नम्र होना या किसी वरिष्ठ के समक्ष शीश झुकाना आदि | प्रणाम करने की विधि भी हमारे शास्त्रों में बताई गयी है | दोनों हाथ जोड़कर वक्षस्थल से लगाकर ही बड़ों को प्रणाम करना चाहिए , प्रणाम करते समय दोनों हाथ की अंजलि वक्षस्थल से जुड़ी होनी चाहिए ऐसा करने का भाव यह होता है कि :- हृदय को साक्षी मानकर , हृदय से प्रतीकस्वरूप सम्पूर्ण अस्तित्व सम्मानीय के समक्ष नतमस्तक हो रहा है | इसके अतिरिक्त प्राचीनकाल की गुरुकुल परम्परा में गुरु जी के सामने लेटकर "साष्टांग प्रणाम" करने का विधान था जिसका तात्पर्य यह था कि गुरु जी चरणों के अंगूठे से प्रवाहित ऊर्जा का स्वयं में उत्सर्जन करना | जब प्रणाम किया जाता है तो उसके बदले में आशीर्वाद की भी प्राप्ति होती है | परंतु किसी के भी आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए प्रणाम करना आवश्यक है | जब किसी को प्रणाम किया जाता है तो स्वत: ही उसके मुख से आपके लिए आशीर्वाद निकल ही पड़ता है | हमारे मनीषियों ने बताया है कि :-- " अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन: ! चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्यायशोबलम् !! अर्थात :- जो व्यक्ति अपने से बड़ों का अभिवादन करके नित्य प्रणाम करता है उस व्यक्ति की चार चीजें वृद्धि को प्राप्त होती रहती हैं - आयु , विद्या , यश एवं बल | आशीर्वाद के चार अक्षर प्रतीक रूप में आयु , विद्या , यश एवं बल का ही स्वरूप हैं | जिस शुभकामना से लोगों की इन चार चीजों में वृद्धि हो वही आशीर्वाद है |* *आज के यांत्रिक युग में प्रणाम एवं आशीर्वाद जहाँ अपना महत्त्व खोते जा रहे हैं वहीं इनकी प्रासंगिकता भी समाप्त हो रही है | आज ज्यादातर "लट्ठमार प्रणाम" ही होता है | तो उसके परिणामस्वरूप आशीर्वाद भी वैसा ही मिल रहा है | कुछ लोग तो शिकायत भी करते हैं कि भगवान को , महापुरुषों को , बड़ों प्रणाम भी करने पर कोई फल नहीं मिल रहा है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" ऐसे लोगों को बताना चाहूँगा कि :-- जिन लोगों को बार - बार आशीर्वाद मिलने के बाद भी कोई लाभ नहीं मिलता उसका अर्थ यह है कि न तो श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया गया और न ही आशीर्वाद लिया गया | आशीर्वाद जीवन में तभी उतर सकेगा जब व्यक्ति में आशीर्वीद के प्रभाव को ग्रहण करने की क्षमता होगी | यदि व्यक्ति में ग्रहणशीलता नहीं है तो उसे कुछ भी नहीं दिया जा सकता | उसी प्रकार यदि आशीर्वाद प्राप्त करने वाले व्यक्ति के अंदर अहंकार का भाव हो , विनम्रता न हो तो वह व्यक्ति आशीर्वाद का लाभ कदापि नहीं ले सकता | प्रणाम की परम्परा रखने के पीछे हमारे मनीषियों का यही मंतव्य रहा होगा कि व्यक्ति पिरणाम के ही बहाने सही परंतु विनम्र बनता रहे , अहंकार का भाव समाप्त होता रहे और मनुष्य पतुत होने से बचता रहे |* *प्रणाम करने का भाव मनुष्य को निरहंकारी बनाता है | अत: प्रत्येक मनुष्य को अपने व्यक्तित्व में निरहंकारिता का विकास करते हुए नित्य प्रणाम करने की आदत डालने का प्रयास करना चाहिए |*

अगला लेख: काम प्रवृत्ति :----- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
03 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म ने मानव मात्र को सुचारु रूप से जीवन जीने के लिए कुछ नियम बनाये थे | यह अलग बात है कि समय के साथ आज अनेक धर्म - सम्प्रदायों का प्रचलन हो गया है , और सनातन धर्म मात्र हिन्दू धर्म को कहा जाने लगा है | सनातन धर्म जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मनुष्यों के दिव्य संस्कारों के साथ मिलता है | जी
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*सनातन संस्कृति इतनी मनोहारी है कि समय समय पर आपसी प्रेम सौहार्द्र को बढाने वाले त्यौहार ही इसकी विशिष्टता रही है | शायद ही कोई ऐसा महीना हो जिसमें कि कोई त्यौहार न हो , इन त्यौहारों के माध्यम से समाज , देश एवं परिवार के बिछड़े तथा अपनों से दूर रह रहे कुटुंबियों को एक दूसरे से मिलने का अवसर मिलता है
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म ने मानव मात्र को सुचारु रूप से जीवन जीने के लिए कुछ नियम बनाये थे | यह अलग बात है कि समय के साथ आज अनेक धर्म - सम्प्रदायों का प्रचलन हो गया है , और सनातन धर्म मात्र हिन्दू धर्म को कहा जाने लगा है | सनातन धर्म जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मनुष्यों के दिव्य संस्कारों के साथ मिलता है | जी
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*हमारा देश भारत विविधताओं का देश है , इसकी पहचान है इसके त्यौहार | कुछ राष्ट्रीय त्यौहार हैं तो कुछ धार्मिक त्यौहार | इनके अतिरिक्त कुछ आंचलिक त्यौहार भी कुछ क्षेत्र विशेष में मनाये जाते हैं | त्यौहार चाहे राष्ट्रीय हों , धार्मिक हों या फिर आंचलिक इन सभी त्यौहारों की एक विशेषता है कि ये सभी त्यौहार
27 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
*हमारा देश भारत विविधताओं का देश है , इसकी पहचान है इसके त्यौहार | कुछ राष्ट्रीय त्यौहार हैं तो कुछ धार्मिक त्यौहार | इनके अतिरिक्त कुछ आंचलिक त्यौहार भी कुछ क्षेत्र विशेष में मनाये जाते हैं | त्यौहार चाहे राष्ट्रीय हों , धार्मिक हों या फिर आंचलिक इन सभी त्यौहारों की एक विशेषता है कि ये सभी त्यौहार
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं , इन अवतारों में मुख्य एवं प्रचलित श्री राम एवं श्री कृष्णावतार माना जाता है | भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार लेकर इस धराधाम पर अवतीर्ण होकर अनेकों लीलायें करते हुए भी योगेश्वर कहलाये | भगवान श्री कृष्ण के पूर्णावतार का रहस्य समझने का प्रय
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*राखी के बंधन का जीवन में बहुत महत्त्व है | राखी बाँधने का अर्थ क्या हुआ इस पर भी विचार कर लिया जाय कि राखी का अर्थ है रक्षण करने वाला | तो आखिर यह रक्षा कि जिम्मेदारी है किसके ऊपर /? अनेक प्रबुद्धजनों से वार्ता का सार एवं पुराणों एवं वैदिक अनुष्ठानों से अब तक प्राप्त ज्ञान के आधार पर यही कह सकते है
27 अगस्त 2018
29 अगस्त 2018
*इस सृष्टि में चौरासी लाख योनियां बताई गयी हैं जिनमें सबका सिरमौर बनी मानवयोनि | वैसे तो मनुष्य का जन्म ही एक जिज्ञासा है इसके अतिरिक्त मनुष्य का जन्म जीवनचक्र से मुक्ति पाने का उपाय जानने के लिए होता अर्थात यह कहा जा सकता है कि मनुष्य का जन्म जिज्ञासा शांत करने के लिए होता है , परंतु मनुष्य जिज्ञास
29 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
*राखी के बंधन का जीवन में बहुत महत्त्व है | राखी बाँधने का अर्थ क्या हुआ इस पर भी विचार कर लिया जाय कि राखी का अर्थ है रक्षण करने वाला | तो आखिर यह रक्षा कि जिम्मेदारी है किसके ऊपर /? अनेक प्रबुद्धजनों से वार्ता का सार एवं पुराणों एवं वैदिक अनुष्ठानों से अब तक प्राप्त ज्ञान के आधार पर यही कह सकते है
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं , इन अवतारों में मुख्य एवं प्रचलित श्री राम एवं श्री कृष्णावतार माना जाता है | भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार लेकर इस धराधाम पर अवतीर्ण होकर अनेकों लीलायें करते हुए भी योगेश्वर कहलाये | भगवान श्री कृष्ण के पूर्णावतार का रहस्य समझने का प्रय
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*संसार में मनुष्य एक अलौकिक प्राणी है | मनुष्य ने वैसे तो आदिकाल से लेकर वर्तमान तक अनेकों प्रकार के अस्त्र - शस्त्रों का आविष्कार करके अपने कार्य सम्पन्न किये हैं | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा अस्त्र होता है उसका विवेक एवं बुद्धि | इस अस्त्र के होने पर मनुष्य कभी परास्त नहीं हो सकता परंतु आवश्यकता हो
03 सितम्बर 2018
29 अगस्त 2018
*इस सृष्टि में चौरासी लाख योनियां बताई गयी हैं जिनमें सबका सिरमौर बनी मानवयोनि | वैसे तो मनुष्य का जन्म ही एक जिज्ञासा है इसके अतिरिक्त मनुष्य का जन्म जीवनचक्र से मुक्ति पाने का उपाय जानने के लिए होता अर्थात यह कहा जा सकता है कि मनुष्य का जन्म जिज्ञासा शांत करने के लिए होता है , परंतु मनुष्य जिज्ञास
29 अगस्त 2018
22 अगस्त 2018
*इस संसार में जिस प्रकार संसार में उपलब्ध लगभग सभी वस्तुओं को अपने योग्य बनाने के लिए उसे परिमार्जित करके अपने योग्य बनाना पड़ता है उसी प्रकार मनुष्य को कुछ भी प्राप्त करने के लिए स्वयं का परिष्कार करना परम आवश्यक है | बिना परिष्कार के मानव जीवन एक बिडंबना बनकर रह जाता है | सामान्य मनुष्य , यों ही अ
22 अगस्त 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x