महिला जागरूकता

22 अगस्त 2018   |  ारिवेश कुमार राठौर   (66 बार पढ़ा जा चुका है)

आधुनिक समय में महिला जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है एक समय था जब महिलाएं अपने किसी भी प्रकार के फैसले को लेने के लिए अपने परिवार और संरक्षण पर निर्भर थी आज वह सभी प्रकार के फैसले खुद ले रही हैं शिक्षा में भी वह पुरुषों से आगे ही हैं आधुनिक युग में महिलाओं का हर क्षेत्र में दखल है वह सामान्य सिविल सर्विस से लेकर सेना विज्ञान पुलिस और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर रही हैं महिलाओं को जीवनसाथी चुनने में भी अब ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ता है इसलिए शहरों में प्रेम विवाह का चलन आम हो चला है अरेंज मैरिज में भी अभिभावक विवाह के मामले में लड़की के राय को ही प्राथमिकता देते हैं समाजवाद घर परिवार अब हर तरह से अपना आधार बना रहा है वर्तमान समय जैसी खाने पीने पहनने काम करने की आजादी महिलाओं को पहले कभी नहीं रही आज महिलाएं आज अपनी मनमर्जी का पहनावा पसंद कर रही हैं एक समय था जब महिला का किसी पुरुष से बात करना भी अजीब सा लगता था लेकिन आजकल महिलाएं अपने साथियों से बिना किसी भेदभाव के बात कर सकते हैं सह शिक्षा का चलन भी अब समाज में स्वीकार है इस सामाजिक परिवर्तन से महिलाओं के चेहरे पर खुशी को साफ देखा जा सकता है महिलाओं के आत्मनिर्भर होने से महिलाएं अब किसी पर बोझ नहीं है इसलिए घर में बेटी का पैदा होना भी अब गर्व की बात हो गई है महिलाएं घर और बाहर का काम करने में किसी तरह की बाबा महसूस नहीं करती हैं लेकिन इस प्रकार की दोहरी जिम्मेदारी से महिलाओं मैं एक नीरसता का भी आभास हो रहा है हालांकि सामान्यता पुरुष अभी घरेलू कामों को अपना का अपमान समझते हैं लेकिन अब ऐसे पति भी बहुतायत हैं जो अपनी कामकाजी पत्नी में रसोई आदि घर के कामों में हाथ बताते हैं सामाजिक बंद से भी लगातार कम हो रही हैं जैसा कि 80 के दशक मैं महिलाओं को किसी भी प्रकार से अपने अभिभावकों का निर्देश पालन आवश्यक था लेकिन अब अभिभावकों की सोच में भी बदलाव आया है और वह अपनी बेटी और महिलाओं के साथ अनावश्यक टोकाटाकी नहीं करते हैं हां महिलाओं के साथ होने वाले यौन अपराधों में अभी भी कमी नहीं आई है इसलिए आज भी सुरक्षा की दृष्टि से अभिभावक चिंतित रहते हैं लेकिन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी महिलाओं ने जिस तरह से अपने साहस का परिचय दिया है वह देश के लिए एक अमूल्य योगदान है महिलाएं अपने परिवार के संगठन में भी भरपूर योगदान दे रही हैं वह आजकल अपने बच्चों की संख्या भी निर्धारित कर रही हैं जिससे कि समाज वा देश के लिए जनसंख्या नियंत्रण में भी महति सहयोग मिल रहा है लेकिन कुछ अति उत्साहित महिलाओं ने अपने अधिकारों के नाम पर अति उच्च उच्छृंखल स्वच्छंद जीवनशैली को अपना लिया है जिससे एक असभ्यता का भी एहसास होता है ऐसी महिलाएं आधुनिकता को बदनाम करने के लिए समाज में अशांति भी पैदा कर रहे हैं इस प्रकार की महिलाएं सामाजिक और कानूनी अपराध करने में भी पीछे नहीं हट रही हैं जिससे वह अपने घर परिवार के लिए संकट और अशांति पैदा कर रही हैं इस तरह से अशांति पैदा होने से महिलाओं सहित पारिवारिक पुरुषों का भी जीवन नरक बन जाता है कानूनों का असीम अधिकार इस प्रकार की महिलाओं को और ज्यादा हिंसक बनाता है इस प्रकार के आधुनिकता के नाम पर अपनी संस्कृति से कट जाना महिला जागरूकता का एक विद्रूप रूप भी है

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