जीवन में लक्ष्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

27 अगस्त 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (61 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन में लक्ष्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव शरीर को गोस्वामी तुलसीदास जी ने साधना का धाम बताते हुए लिखा है :--- "साधन धाम मोक्ष कर द्वारा ! पाइ न जेहि परलोक संवारा !! अर्थात :- चौरासी लाख योनियों में मानव योनि ही एकमात्र ऐसी योनि है जिसे पाकर जीव लोक - परलोक दोनों ही सुधार सकता है | यहाँ तुलसी बाबा ने जो साधन लिखा है वह साधन आखिर क्या है ?? साधन का सीधा अर्थ है इष्ट ! सनातन धर्म में जहाँ ३३ करोड़ देवी - देवताओं को मान्यता मिली है प्रत्योक सनातन धर्मावलम्बी सभी को मानते हैं परंतु सबको मानने के बाद भी प्रत्येक व्यक्ति का कोई एक मुख्य देवता होता है जिसे ईष्ट देवता कहा जाता है | इस जीवन को सुधारने के लिए सभी के पास एक न एक ईष्ट का होना परमावश्यक है | जिस प्रकार वर्तमान में अदालत परिक्षेत्र में अनेक अधिवक्ता घूमा करते हैं और सबसे नमस्कार किया जाता है परंतु आपको अपना एक अधिवक्ता चुनना पड़ता है जो आपकी बात को न्यायाधीश तक पहुँचाता है | यही अधिवक्ता आपका ईष्ट हुआ | ईष्ट का सीधा अर्थ होता है लक्ष्य | आपको किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए एक लक्ष्य का निर्धारण करना ही पड़ेगा | बिना लक्ष्य के सफलता मिलना असम्भव है | अनेक ऋषियों - महर्षियों ने अपने ईष्ट का निर्धारण करके तपस्यायें करते हुए मोक्ष को प्राप्त तो हुए ही और साथ ही साथ संसार को दुर्लभ ज्ञान एवं एक सुदृढ मार्ग का अवलोकन भी कराया | जीवन में ईष्ट (लक्ष्य ) का होना बहुत ही आवश्यक है | लक्ष्य का अर्थ हुआ यह निर्धारण करना कि आपको करना क्या है और जाना कहाँ है ? आपको जीवन में बनना क्या है यह निर्धारण किये बिना आपकी जीवनरूपी गाड़ी दिशाहीन होकर चलती रहेगी जिसका न कोई गंतव्य निश्चित है और न ही विश्रामस्थल | इसलिए जीवन में ईष्ट (लक्ष्य) का होना परमावश्यक है |* *आज मनुष्य की हालत बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती है | कारण कि या तो उनके ईष्ट नहीं हैं या फिर उन्हें अपने ईष्ट पर विश्वास नहीं रह गया है | प्राय: देखा जा रहा है कि मनुष्य के ऊपर कोई विपत्ति आती है तो वह मंदिरों की ओर दौड़ पड़ता है | हनुमान जी के मंदिर में पहुँचकर १०१ पाठ हनुमान चालीसा का किया एक किलो लड्डू की मनौती मानी और चल पड़ा | रास्ते में दुर्गा जी का मंदिर मिला वहाँ बैठकर कवच का पाठ करके मनौती मानकर निकल पड़ा | कहने का तात्पर्य यह है कि आज के मनुष्य को स्वयं किसी एक पर विश्वास नहीं रह गया है | सबके मंदिर जाना चाहिए सबकी पूजा करनी चाहिए परंतु इन सबके बीच में ही किसी पर दृढ विश्वास करके ईष्ट बनाना होगा तभी कल्याण निश्चित है | इन सबके बीच में एक चीज और है वह है आपका कर्मफल , जो कि आपको भोगना ही है ! परमतु यदि आपका ईष्ट सुदृढ है तो कर्मफल को सुधारा जा सकता है | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि देवताओं की प्रतिमायें बनाने के पहले मूर्तिकार ने भी अपना ईष्ट (लक्ष्य) निर्धारित किया होगा कि हमें किस देवता की मूर्ति बनानी है और कैसी बनानी है वह लक्ष्य हृदय में रखकर उसी के अनुसार मूर्तिकार ने एक सुंदर प्रतिमा बनाकर संसार के समक्ष प्रस्तुत किया | इसलिए जीवन में किसी भी कार्य को सम्पन्न करने के लिए लक्ष्य का होना बहुत आवश्यक है , अन्यथा मनुष्य जीवन भर श्वान की भाँति इधर से उधर दौड़कर जीवन समाप्त कर देता है | विद्यार्थी अपने जीवन में जिस प्रकार एक लक्ष्य का निर्धारण करके चिकित्सक , अधिवक्ता एवं अभियंता बन जाता है उसी प्रकार सभी साधकों को भी ईष्ट (लक्ष्य) का निर्धारण करके ही साधना करनी चाहिए तभी साधना का फल मिल पायेगा |* *इस मानव जीवन को परमगति (मोक्ष) पाने के लिए ईष्ट का निर्धारण करके उसी दिशा में बढते रहने से ही गंतव्य की प्राप्ति हो पायेगी |*

अगला लेख: सुख एवं दुख :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
13 अगस्त 2018
*धरती पर मनुष्य के विकास में मनुष्य का मनुष्य के प्रति प्रेम प्रमुख था | तब मनुष्य एक ही धर्म जानता था :- "मानव धर्म" | एक दूसरे के सुख - दुख समाज के सभी लोग सहभागिता करते थे | किसी गाँव या कबीले में यदि किसी एक व्यक्ति के यहाँ कोई उत्सव होता था तो वह पूरे गाँ का उत्सव बन जाता था , और यदि किसी के यह
13 अगस्त 2018
22 अगस्त 2018
*इस संसार में जिस प्रकार संसार में उपलब्ध लगभग सभी वस्तुओं को अपने योग्य बनाने के लिए उसे परिमार्जित करके अपने योग्य बनाना पड़ता है उसी प्रकार मनुष्य को कुछ भी प्राप्त करने के लिए स्वयं का परिष्कार करना परम आवश्यक है | बिना परिष्कार के मानव जीवन एक बिडंबना बनकर रह जाता है | सामान्य मनुष्य , यों ही अ
22 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
*हमारा देश भारत विविधताओं का देश है , इसकी पहचान है इसके त्यौहार | कुछ राष्ट्रीय त्यौहार हैं तो कुछ धार्मिक त्यौहार | इनके अतिरिक्त कुछ आंचलिक त्यौहार भी कुछ क्षेत्र विशेष में मनाये जाते हैं | त्यौहार चाहे राष्ट्रीय हों , धार्मिक हों या फिर आंचलिक इन सभी त्यौहारों की एक विशेषता है कि ये सभी त्यौहार
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं , इन अवतारों में मुख्य एवं प्रचलित श्री राम एवं श्री कृष्णावतार माना जाता है | भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार लेकर इस धराधाम पर अवतीर्ण होकर अनेकों लीलायें करते हुए भी योगेश्वर कहलाये | भगवान श्री कृष्ण के पूर्णावतार का रहस्य समझने का प्रय
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*राखी के बंधन का जीवन में बहुत महत्त्व है | राखी बाँधने का अर्थ क्या हुआ इस पर भी विचार कर लिया जाय कि राखी का अर्थ है रक्षण करने वाला | तो आखिर यह रक्षा कि जिम्मेदारी है किसके ऊपर /? अनेक प्रबुद्धजनों से वार्ता का सार एवं पुराणों एवं वैदिक अनुष्ठानों से अब तक प्राप्त ज्ञान के आधार पर यही कह सकते है
27 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
*सनातन संस्कृति इतनी मनोहारी है कि समय समय पर आपसी प्रेम सौहार्द्र को बढाने वाले त्यौहार ही इसकी विशिष्टता रही है | शायद ही कोई ऐसा महीना हो जिसमें कि कोई त्यौहार न हो , इन त्यौहारों के माध्यम से समाज , देश एवं परिवार के बिछड़े तथा अपनों से दूर रह रहे कुटुंबियों को एक दूसरे से मिलने का अवसर मिलता है
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म ने मानव मात्र को सुचारु रूप से जीवन जीने के लिए कुछ नियम बनाये थे | यह अलग बात है कि समय के साथ आज अनेक धर्म - सम्प्रदायों का प्रचलन हो गया है , और सनातन धर्म मात्र हिन्दू धर्म को कहा जाने लगा है | सनातन धर्म जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मनुष्यों के दिव्य संस्कारों के साथ मिलता है | जी
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*हमारा देश भारत विविधताओं का देश है , इसकी पहचान है इसके त्यौहार | कुछ राष्ट्रीय त्यौहार हैं तो कुछ धार्मिक त्यौहार | इनके अतिरिक्त कुछ आंचलिक त्यौहार भी कुछ क्षेत्र विशेष में मनाये जाते हैं | त्यौहार चाहे राष्ट्रीय हों , धार्मिक हों या फिर आंचलिक इन सभी त्यौहारों की एक विशेषता है कि ये सभी त्यौहार
27 अगस्त 2018
29 अगस्त 2018
*इस सृष्टि में चौरासी लाख योनियां बताई गयी हैं जिनमें सबका सिरमौर बनी मानवयोनि | वैसे तो मनुष्य का जन्म ही एक जिज्ञासा है इसके अतिरिक्त मनुष्य का जन्म जीवनचक्र से मुक्ति पाने का उपाय जानने के लिए होता अर्थात यह कहा जा सकता है कि मनुष्य का जन्म जिज्ञासा शांत करने के लिए होता है , परंतु मनुष्य जिज्ञास
29 अगस्त 2018
21 अगस्त 2018
*हमारी भारतीय संस्कृति सदैव से ग्राह्य रही है | हमारे यहाँ आदिकाल से ही प्रणाम एवं अभिवादन की परम्परा का वर्णन हमारे शास्त्रों में सर्वत्र मिलता है | कोई भी मनुष्य जब प्रणाम के भाव से अपने बड़ों के समक्ष जाता है तो वह प्रणीत हो जाता है | प्रणीत का अर्थ है :- विनीत होना , नम्र होना या किसी वरिष्ठ के
21 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म ने मानव मात्र को सुचारु रूप से जीवन जीने के लिए कुछ नियम बनाये थे | यह अलग बात है कि समय के साथ आज अनेक धर्म - सम्प्रदायों का प्रचलन हो गया है , और सनातन धर्म मात्र हिन्दू धर्म को कहा जाने लगा है | सनातन धर्म जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मनुष्यों के दिव्य संस्कारों के साथ मिलता है | जी
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*संसार में मनुष्य एक अलौकिक प्राणी है | मनुष्य ने वैसे तो आदिकाल से लेकर वर्तमान तक अनेकों प्रकार के अस्त्र - शस्त्रों का आविष्कार करके अपने कार्य सम्पन्न किये हैं | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा अस्त्र होता है उसका विवेक एवं बुद्धि | इस अस्त्र के होने पर मनुष्य कभी परास्त नहीं हो सकता परंतु आवश्यकता हो
03 सितम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x