दोस्ती

28 अगस्त 2018   |  गौरीगन गुप्ता   (119 बार पढ़ा जा चुका है)

दोस्ती बचपन की यादों का अटूट बंधन बिना लेनदेन के चलने वाला खूबसूरत रिश्तों का अद्वितीय बंधन एक ढर्रे पर चलने वाली जिंदगी में नई नई सोच से रूबरू करवाया अर्थ हीन जीवन को अर्थपूर्ण बनाया जीने का एक अलग अंदाज सिखाया निराशा में राहत, कठिनाई में पथप्रदर्शक बन सफलता का सच्चा रास्ता दिखाया ऐसे थे और हैं मेरे दोस्त और मेरी दोस्ती याद आते हैं बचपन के वो दिन साथ साथ पढते, खेलते खाते कभी तकरार होती या करवाई जाती दरार को खाई बनने से पहले समझबूझ , विश्वास की मजबूत से पाट देते एक दूसरे की पहुंच से दूर जरूर एफबीआई, व्हाट्सअप, मोबाइल यादों को ताजा कर, मजबूत बनाता दोस्तो की सूची औरों से कुछ लम्बी बिना मतभेद के जातपात के भेदभाव से ऊंची बेबी, शशि, सुनीता, मीरा, वन्दना प्रमिला, वर्षा, नीलम, वीना सादगी, सहानुभूति, आत्मीयता समाई इनअनमोल रत्नों की कोई तोल नहीं छोटी- छोटी बातों का यादगार लम्बा सफर कभी ना खत्म होने वाली खुशियों की डगर जीवन की खुशी, जमीन का खजाना जिनके बिना जीवन निस्सार बस,ऐसी ही बनी रहे मिशाल दोस्ती की

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