जिज्ञासा :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

29 अगस्त 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (120 बार पढ़ा जा चुका है)

जिज्ञासा :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सृष्टि में चौरासी लाख योनियां बताई गयी हैं जिनमें सबका सिरमौर बनी मानवयोनि | वैसे तो मनुष्य का जन्म ही एक जिज्ञासा है इसके अतिरिक्त मनुष्य का जन्म जीवनचक्र से मुक्ति पाने का उपाय जानने के लिए होता अर्थात यह कहा जा सकता है कि मनुष्य का जन्म जिज्ञासा शांत करने के लिए होता है , परंतु मनुष्य जिज्ञासु ही बना रहता है | मनुष्य को जिज्ञासु होना भी चाहिए क्योंकि यही जिज्ञासा मनुष्य के बौद्धिक , पौराणिक , आध्यात्मिक एवं सामाजिक विकास का आधार है | जिज्ञासु वही होगा जो कुछ नया जानने के लिए उत्सुक होगा | मनुष्य में जिज्ञासा का भाव ही इसे अन्य जीवधारियों से अलग करता है | प्रत्येक मनुष्य में अपने जीवन व धर्म के प्रति जिज्ञासा होनी ही चाहिए और होती भी है | जिज्ञासा मनुष्य में ही होती है यदि इसके प्रमाण पर दृष्टि दौड़ाई जाय तो यह देखने को मिलता है कि चाहे वह अध्यात्म का क्षेत्र हो , धर्म का क्षेत्र हो या सामाजिकता का , प्रत्येक क्षेत्र में आवश्यकता होती है ज्ञान के विस्तार की , और ज्ञान का विस्तार होता है जिज्ञासा की भावना से | विचार कीजिए कि गुरु अपने शिष्य को बहुत सारा ज्ञान देना चाहता हो ओर शिष्य के भीतर कोई जिज्ञासा ही न हो तो गुरु ज्ञान देगा किसको ?? और जब शिष्य के मन में कोई जिज्ञासा नहीं हुई तो उसको नवीन ज्ञान नहीं प्राप्त हुआ और उसका विकास वहीं पर ठप हो जाता है | जिज्ञासा का भाव होने से ही व्यक्ति में मैं कौन हूं, मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है ? मुझे कौन सा कर्म करना है ? आदि अनेक प्रश्न उसके सामने खड़े होते हैं |* *आज जिज्ञासु का अर्थ बदल गया है | जिज्ञासायें भी आधुनिक युग की तरह आधुनिक हो गयी हैं | आज मनुष्य यह नहीं जानना चाहता कि मैं कौन हूँ ? मुझे मानव दीवन क्यों और कैसे मिला ? हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है ? हमें सद्गति कैसे मिलेगी आदि जिज्ञासाओं से मनुष्य स्वयं को बहुत दूर करता चला जा रहा है | आज के परिवेश एवं मनुष्यों की मानसिकता एवं जिज्ञासाओं पर मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" कभी - कभी मन ही मन हंसता रहता हूँ कि :- वाह रे मनुष्य तू क्या था और क्या हो गया | आज अधिकतर मनुष्य की पहली जिज्ञासा अपने पड़ोसियों के प्रति होती है कि :- इसको धन कहाँ से मिला , यह सुखी क्यों और कैसे है ?? अपनी इसी जिज्ञासा में मनुष्य परेशान रहता है | कुछ लोग तो बात बात पर धर्म की बातें भी करने लगते हैं कि :- पुराणों में ऐसा लिखा है तो क्यों लिखा है ? उसका आधार क्या है ? यदि कोई मंत्र या कोई शब्दोच्चारण किया जाता है तो क्यों ?? यह जिज्ञासा तो उचित प्रतीत होती है , परंतु इसी जिज्ञासा में मनुष्य कभी कभी भ्रमित होने लगता है कि अमुक श्लोक सबसे पहले किसने बोला और इसका आधार क्या है ?? यह सब ऐसी जिज्ञासायें हैं जो तनिक परिश्रम करने पर आपको समाधान प्रस्तुत कर सकती हैं | परंतु आज हम स्वाध्याय से दूर होते जा रहे हैं यबी कारण है कि किसी भी जिज्ञासा पर हम निरुत्तर होकर दीन हीन हो जाते हैं | ज्ञान का विस्तार होना परम आवश्यक है | ज्ञान भी अपने कर्मों एवं कृत्यों के विषय में अधिक रखने का प्रयास करना चाहिए , शेष जिज्ञासाओं का समाधान तो स्वाध्याय से स्वत: ही हो जायेगा |* *जिस दिन हम यह जान जायेंगे कि हम कौन हैं और मानव योनि प्राप्त करने का उद्देश्य क्या है ? उस दिन के बाद कोई भी जिज्ञासा शेष नहीं रह जायेगी |*

अगला लेख: सुख एवं दुख :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
29 अगस्त 2018
*इस धराधाम पर मनुष्य अपने जीवनकाल में अनेक शत्रु एवं मित्र बनाता रहता है , यहाँ समय के साथ मित्र के साथ शत्रुता एवं शत्रु के साथ मित्रता होती है | परंतु मनुष्य के कुछ शत्रु उसके साथ ही पैदा होते हैं और समय के साथ युवा होते रहते हैं | इनमें मनुष्य मुख्य पाँच शत्रु है :- काम क्रोध मद लोभ एवं मोह | ये
29 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*ईश्वर ने सृष्टि की सुंदर रचना की, जीवों को उत्पन्न किया | फिर नर-नारी का जोड़ा बनाकर सृष्टि को मैथुनी सृष्टि में परिवर्तित किया | सदैव से पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली नारी समय समय पर उपेक्षा का शिकार होती रही है | और इस समाज को पुरुषप्रधान समाज की संज्ञा दी जाती रही है | जबकि यह न तो सत्य
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास के
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*राखी के बंधन का जीवन में बहुत महत्त्व है | राखी बाँधने का अर्थ क्या हुआ इस पर भी विचार कर लिया जाय कि राखी का अर्थ है रक्षण करने वाला | तो आखिर यह रक्षा कि जिम्मेदारी है किसके ऊपर /? अनेक प्रबुद्धजनों से वार्ता का सार एवं पुराणों एवं वैदिक अनुष्ठानों से अब तक प्राप्त ज्ञान के आधार पर यही कह सकते है
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धरती पर मनुष्य का प्रसन्न होना एक मानसिक दशा है | प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए धन - ऐश्वर्य का होना आवश्यक नहीं है | प्राय: देखा जाता है कि मध्यमवर्गीय लोग धनी लोगों से कहीं अधिक प्रसन्न रहते हैं , अपने परिवार व मित्रों के बीच उनके खुशी के ठहाके सुने जा सकते हैं | प्रसन्न रहने का रहस्य यही है क
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म ने मानव मात्र को सुचारु रूप से जीवन जीने के लिए कुछ नियम बनाये थे | यह अलग बात है कि समय के साथ आज अनेक धर्म - सम्प्रदायों का प्रचलन हो गया है , और सनातन धर्म मात्र हिन्दू धर्म को कहा जाने लगा है | सनातन धर्म जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मनुष्यों के दिव्य संस्कारों के साथ मिलता है | जी
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*संसार में मनुष्य एक अलौकिक प्राणी है | मनुष्य ने वैसे तो आदिकाल से लेकर वर्तमान तक अनेकों प्रकार के अस्त्र - शस्त्रों का आविष्कार करके अपने कार्य सम्पन्न किये हैं | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा अस्त्र होता है उसका विवेक एवं बुद्धि | इस अस्त्र के होने पर मनुष्य कभी परास्त नहीं हो सकता परंतु आवश्यकता हो
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं , इन अवतारों में मुख्य एवं प्रचलित श्री राम एवं श्री कृष्णावतार माना जाता है | भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार लेकर इस धराधाम पर अवतीर्ण होकर अनेकों लीलायें करते हुए भी योगेश्वर कहलाये | भगवान श्री कृष्ण के पूर्णावतार का रहस्य समझने का प्रय
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म ने मानव मात्र को सुचारु रूप से जीवन जीने के लिए कुछ नियम बनाये थे | यह अलग बात है कि समय के साथ आज अनेक धर्म - सम्प्रदायों का प्रचलन हो गया है , और सनातन धर्म मात्र हिन्दू धर्म को कहा जाने लगा है | सनातन धर्म जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मनुष्यों के दिव्य संस्कारों के साथ मिलता है | जी
03 सितम्बर 2018
22 अगस्त 2018
*इस संसार में जब से मानवी सृष्टि हुई तब से लेकर आज तक मनुष्य के साथ सुख एवं दुख जुड़े हुए हैं | समय समय पर इस विषय पर चर्चायें भी होती रही हैं कि सुखी कौन ? और दुखी कौन है ?? इस पर अनेक विद्वानों ने अपने मत दिये हैं | लोककवि घाघ (भड्डरी) ने भी अपने अनुभव के आधार पर इस विषय पर लिखा :- "बिन व्याही ब
22 अगस्त 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x