कैसे हो भगवान का दर्शन :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

29 अगस्त 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (59 बार पढ़ा जा चुका है)

कैसे हो भगवान का दर्शन :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन काल से मनुष्य धर्मग्रंथों का निर्देश मान करके ईश्वर को प्राप्त करने का उद्योग करता रहा है | भिन्न - भिन्न मार्गों से भगवत्प्राप्ति का यतन किया जाता रहा है | इन्हीं में एक यत्न है माला द्वारा मंत्रजप | कुछ लोग यह पूंछते रहते हैं कि धर्मग्रंथों में दिये गये निर्देशानुसार यदि निश्चित संख्या में जप कर लिया जाय तो क्या भगवान प्रकट हो सकते हैं ?? तो मेरा कहना यही होगा कि हाँ , परंतु माला जपने के पहले यह जान लेना आवश्यक है कि माला क्या है ?? माला जपने के पहले मनुष्य को अपने हृदय के विकारों का शमन करना पड़ेगा | माला तो मान लीजिए कि एक रस्सी मात्र है जिससे घोड़े को बाँधा जाता है | घोड़ा अलग है और रस्सी अलग | यदि हमें घोड़े को बाँधना है तो रस्सी की आवश्यकता पड़ेगी , क्योंकि बिना रस्सी के घोड़ा नहीं बाँधा जा सकता | हम जब घोड़े की रस्सी पकड़ते हैं तो कहा करते हैं कि हमने घोड़ा पकड़ रखा है | क्या यह सही है ?? जी नहीं हमने घोड़े को पकड़ने का माध्यम मात्र पकड़ रखा है | उसी प्रकार माला माध्यम है , मनुष्य ने माला पकड़ी है न कि भगवान को | माला से भगवान को पकड़ा जा सकता है परंतु माला को ही भगवान कह देना उचित नहीं प्रतीत होता | हाँ मंत्र जप करने से परिणाम सुखद हो सकते हैं | क्योंकि समयानुसार नित्य नियमित रूप से मंत्र जप करने से शरीर एवं मन के बीच एक लयात्मकता उत्पन्न होती है और दोनों (शरीर एवं मन) के अंदर विद्यमान विषाक्तता , कषाय एवं कल्मषता दूर होती है और यही दूर करके भगवान को पाया जा सकता है |* *आज के शोरगुल युक्त वातावरण में सबसे कठिन है मन को एकाग्र करना | मन को एकाग्र करने का सबसे सरल साधन है मंत्रजप | परंतु आज मंत्र का जप करते समय भी मन चलायमान ही रहा करता है | आज यह दुर्भाग्य है कि यत्र तत्र भगवान का दर्शन कराने की दुकानें सी लग गयी हैं | मंहगे - मंहगे उपाय बताये जाते हैं करने के लिए जिससे कि भगवान के दर्शन होने का दावा किया जाता है | बहुत लोगों गृहस्थ धर्म का त्याग करके संयास तक ले लिया परंतु उनको भगवान की छाया तक नहीं दिखी | इसका क्या कारण हो सकता है ?? मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का विचार है कि मनुष्य ने अनेकानेक साधन तो अपना लिये परंतु जो पहले से अपनाये हुए है (काम क्रोध मद लोभ अहंकार आदि ) उसका त्याग नहीं कर पा रहा है | और जब तक इनका त्याग नहीं किया जायेगा तब तक भगवान के दर्शन तो क्या उनकी कृपा भी नहीं प्राप्त हो सकती | आज मैं देख रहा हूँ कि लोग अनुष्ठान करवाते हैं , धन खर्च करते हैं , विद्वानों की टोली उनके घर पहुँचकर पूजन करवाती है परंतु उनका मन (यजमान) एकाग्र नहीं हो पाता | आज के यजमान पूजन करते रहते हैं और घर की व्यवस्थाओं के लिए घर वालों को निर्देशित भी करते रहते हैं ! तो आप स्वयं विचार करें कि फल कैसे मिलेगा | जब मन एकाग्र नहीं होगा तब तक किसी मंदिर , पूजा , अनुष्ठान एवं मंत्रजप से ईश्वर का दर्शन दिवास्वप्न के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है |* *भगवान के दर्शन या उनकी कृपा प्राप्त करनी है तो मन कल्मषता , विकार आदि को दूर करना पड़ेगा और मनुष्य वही कर नहीं पा रहा है |*

अगला लेख: सुख एवं दुख :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
27 अगस्त 2018
एक बेटी इतनी बड़ी हो सकती है की वह आपकी गोद में ना समाये, पर वह इतनी बड़ी कभी नहीं होती की आपके दिल में ना समा सके । एक बेटी, अतीत की खुशनुमा यादें होती है, वर्तमान पलों का आनंद और भविष्य की आशा और उम्मीद होती है । “अज्ञात” एक बेटी को जन्
27 अगस्त 2018
04 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का अवतार पूर्णावतार कहा जाता है क्योंकि वे १६ कलाओं से युक्त थे | "अवतार किसे कहते हैं यह जानना परम आवश्यक है | चराचर के प्रत्येक जड़ - चेतन में कुछ न कुछ कला अवश्य होती है | पत्थरों में एक कला होती है दो कला जल में पाई जाती है | अग्नि में तीन कलायें पाई जाती हैं तो वायु में चार क
04 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*मानव शरीर को गोस्वामी तुलसीदास जी ने साधना का धाम बताते हुए लिखा है :--- "साधन धाम मोक्ष कर द्वारा ! पाइ न जेहि परलोक संवारा !! अर्थात :- चौरासी लाख योनियों में मानव योनि ही एकमात्र ऐसी योनि है जिसे पाकर जीव लोक - परलोक दोनों ही सुधार सकता है | यहाँ तुलसी बाबा ने जो साधन लिखा है वह साधन आखिर क्या ह
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
बेटा दुनिया से जा चुका था लेकिन मां मानने को तैयार नहीं। वो बेटे के शव को ऑटो में लादकर इंदौर से उज्जैन पहुंच गई। रामघाट के समीप सिद्ध आश्रम के पास शिप्रा किनारे शव लेकर बैठने की जिद करने लगी। इस भरोसे में कि महाकाल जिंदा कर देंगे।ऑटो चालक ने होमगार्ड जवान को इसकी जानकारी
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*हमारा देश भारत विविधताओं का देश है , इसकी पहचान है इसके त्यौहार | कुछ राष्ट्रीय त्यौहार हैं तो कुछ धार्मिक त्यौहार | इनके अतिरिक्त कुछ आंचलिक त्यौहार भी कुछ क्षेत्र विशेष में मनाये जाते हैं | त्यौहार चाहे राष्ट्रीय हों , धार्मिक हों या फिर आंचलिक इन सभी त्यौहारों की एक विशेषता है कि ये सभी त्यौहार
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं , इन अवतारों में मुख्य एवं प्रचलित श्री राम एवं श्री कृष्णावतार माना जाता है | भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार लेकर इस धराधाम पर अवतीर्ण होकर अनेकों लीलायें करते हुए भी योगेश्वर कहलाये | भगवान श्री कृष्ण के पूर्णावतार का रहस्य समझने का प्रय
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*राखी के बंधन का जीवन में बहुत महत्त्व है | राखी बाँधने का अर्थ क्या हुआ इस पर भी विचार कर लिया जाय कि राखी का अर्थ है रक्षण करने वाला | तो आखिर यह रक्षा कि जिम्मेदारी है किसके ऊपर /? अनेक प्रबुद्धजनों से वार्ता का सार एवं पुराणों एवं वैदिक अनुष्ठानों से अब तक प्राप्त ज्ञान के आधार पर यही कह सकते है
27 अगस्त 2018
22 अगस्त 2018
*इस संसार में जब से मानवी सृष्टि हुई तब से लेकर आज तक मनुष्य के साथ सुख एवं दुख जुड़े हुए हैं | समय समय पर इस विषय पर चर्चायें भी होती रही हैं कि सुखी कौन ? और दुखी कौन है ?? इस पर अनेक विद्वानों ने अपने मत दिये हैं | लोककवि घाघ (भड्डरी) ने भी अपने अनुभव के आधार पर इस विषय पर लिखा :- "बिन व्याही ब
22 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*संसार में मनुष्य एक अलौकिक प्राणी है | मनुष्य ने वैसे तो आदिकाल से लेकर वर्तमान तक अनेकों प्रकार के अस्त्र - शस्त्रों का आविष्कार करके अपने कार्य सम्पन्न किये हैं | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा अस्त्र होता है उसका विवेक एवं बुद्धि | इस अस्त्र के होने पर मनुष्य कभी परास्त नहीं हो सकता परंतु आवश्यकता हो
03 सितम्बर 2018
14 अगस्त 2018
बीते कई दिनों से दिल्ली और उत्तर भारत के तमाम इलाकों से कांवड़ियों के उत्पात की खबरें आ रही हैं. आम लोगों से लेकर पुलिस तक की गाड़ियां तोड़ी गईं और लोगों से मारपीट की तमाम घटनाएं हुईं. कांवड़ियों के रूट से गुज़रने वाले तमाम लोग जहां इन घटनाओं से डरे हुए हैं, वहीं सोशल मीड
14 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का नाम मस्तिष्क में आने पर एक बहुआयामी पूर्ण व्यक्तित्व की छवि मन मस्तिष्क पर उभर आती है | जिन्होंने प्रकट होते ही अपनी पूर्णता का आभास वसुदेव एवं देवकी को करा दिया | प्राकट्य के बाद वसुदेव जो को प्रेरित करके स्वयं को गोकुल पहुँचाने का उद्योग करना | परमात्मा पूर्ण होता है अपनी शक्त
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*सनातन संस्कृति इतनी मनोहारी है कि समय समय पर आपसी प्रेम सौहार्द्र को बढाने वाले त्यौहार ही इसकी विशिष्टता रही है | शायद ही कोई ऐसा महीना हो जिसमें कि कोई त्यौहार न हो , इन त्यौहारों के माध्यम से समाज , देश एवं परिवार के बिछड़े तथा अपनों से दूर रह रहे कुटुंबियों को एक दूसरे से मिलने का अवसर मिलता है
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में त्यौहारों की कमी नहीं है | नित्य नये त्यौहार यहाँ सामाजिक एवं धार्मिक समसरता बिखेरते रहते हैं | ज्यादातर व्रत स्त्रियों के द्वारा ही किये जाते हैं | कभी भाई के लिए , कभी पति के लिए तो कभी पुत्रों के लिए | इसी क्रम में आज भाद्रपद कृष्णपक्ष की षष्ठी (छठ) को भगवान श्री कृष्णचन्द्र जी के
03 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x