“कुंडलिया” मोहित कर लेता कमल, जल के ऊपर फूल।

30 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (81 बार पढ़ा जा चुका है)

“कुंडलिया”    मोहित कर लेता कमल, जल के ऊपर फूल।   - शब्द (shabd.in)

“कुंडलिया”


मोहित कर लेता कमल, जल के ऊपर फूल।

भीतर डूबी नाल है, हरा पान अनुकूल॥

हरा पान अनुकूल, मूल कीचड़ सुख लेता।

खिल जाता दु:ख भूल, तूल कब रंग चहेता॥

कह गौतम कविराय, दंभ मत करना रोहित।

हँसता खिलकर खूब, कमल करता मन मोहित॥


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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