“कुंडलिया” मोहित कर लेता कमल, जल के ऊपर फूल।

30 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (347 बार पढ़ा जा चुका है)

“कुंडलिया”    मोहित कर लेता कमल, जल के ऊपर फूल।

“कुंडलिया”


मोहित कर लेता कमल, जल के ऊपर फूल।

भीतर डूबी नाल है, हरा पान अनुकूल॥

हरा पान अनुकूल, मूल कीचड़ सुख लेता।

खिल जाता दु:ख भूल, तूल कब रंग चहेता॥

कह गौतम कविराय, दंभ मत करना रोहित।

हँसता खिलकर खूब, कमल करता मन मोहित॥


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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