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03 सितम्बर 2018
आकांक्षा श्रीवास्तव। .....?????"बहू बेटी जैसी चाहिए???? क्या हुआ आप भी भौचक्के रह गए न ,भइया आजकल अलग अलग तरह कि डिमांड शुरू हो गयी है। यह सुनते मेरे मन मे भी लाखों प्रश्न उमड़ते बादलों की तरह गरजने लगे कि ये कैसी डिमांड??? बहू- बेटी जैसी.???आख़िर एक स्त्री पर इतना बड़ा प्रहार क्यों???? आख़िर एक बहू को
03 सितम्बर 2018
06 सितम्बर 2018
खाप की माप✒️लगा बैठे बिना ही मन, सँभलते राह में साथीदिलों पर ज़ोर किसका है, कहो किसका कभी भी था?मगर ललकार सहने की, कभी सोची नहीं शायदयुगल को बाँध ठूँठों में, अवज्ञा खाप का जो था।ज़मीं थी वासनाओं की, कमी कब यातनाओं की?कि निर्मम हाथ में चाबुक, दुसूती शर्ट था उसका;लगे थे काट खाने को, अभी से ही लगे कहनेकि
06 सितम्बर 2018
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