श्री कृष्ण जन्मोत्सव :----; आचार्य अर्जुन तिवारी

03 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (87 बार पढ़ा जा चुका है)

श्री कृष्ण जन्मोत्सव :----; आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं , इन अवतारों में मुख्य एवं प्रचलित श्री राम एवं श्री कृष्णावतार माना जाता है | भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार लेकर इस धराधाम पर अवतीर्ण होकर अनेकों लीलायें करते हुए भी योगेश्वर कहलाये | भगवान श्री कृष्ण के पूर्णावतार का रहस्य समझने का प्रयास किया जाय | श्रीमद्भागवत में भगवान वेदव्यास जी ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म समय का अलौकिक वर्णन करते हुए लिखा है :-- अथ सर्वगुणोपेत: काल: परमशोभन: ! यह्य्रेवाजनजन्मर्क्षं शान्तर्क्षग्रहतारकम् !! अर्थात :-- समस्त शुभ गुणों से युक्त बहुत सुहावना समय आया | रोहिणी नक्षत्र था | आकाश के सभी नक्षत्र , ग्रह और तारे शान्त - सौम्य हो रहे थे | जैसे अन्त:करण शुद्ध होने पर उसमें भगवान का आविर्भाव होता है ठीक उसी प्रकार श्री कृष्णावतार के समय काल , दिशा , पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , आकाश , मन और आत्मा आदि की समष्टि शुद्धि हो चुकी थी | भगवान का जन्म भाद्रपाद मास के कृष्णपक्ष में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में अर्द्धरात्रि को चन्द्रवंश में हुआ था | भाद्रपद (भद्र) अर्थात कल्याण करने वाला , जो कि बारह महींनों में छठवां अर्थात मध्यमास है | कृष्णपक्ष स्वयं कृष्ण से संबंधित है | एक पक्ष में १५ तिथियाँ होती हैं और अष्टमी मध्य में है | भगवान योगेश्वर हैं तो रात्रि में आये क्योंकि रात्रि योगियों को प्रिय है , और मध्यरात्रि में इसलिए क्योंकि निशीथ को यतियों का संधिकाल कहा गया है | ऐसी अंधेरी रात्रि में जन्म लेने का अर्थ है "घोर अंधकार में दिव्य प्रकाश" का आविर्भाव |* *आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर उनके बताये गये सिद्घांतो का अनुसरण करके जीवन को कठिनता से उबारते हुए सरल बनाया जा सकता है | सबसे पहले तो यह देख लिया जाय कि भगवान श्रीकृष्ण पूर्ण कैसे थे ? जब धर्म की ग्लानि होती है तब धर्म की रक्षा के लिए अवतार होते हैं , और वे आतताईयों का दमन करके धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं | पाँच तत्वो (पृथ्वी , जल , अग्नि , वायु , और आकाश) से ही सम्पूर्ण सृष्टि का अस्तित्व है | द्वापर में ऐसे समय में भगवान को अवतार लेना पड़ा जब ये पाँचों तत्व दूषित हो चुके थे | मैं आचार्य अर्जुन तिवारी" ऐसे योगयोगेश्वर भगवान श्री कृष्ण के चरणों में बारम्बार दण्डवत प्रणाम करता हूँ जिन्होंने सर्वप्रथम मिट्टी खाकर पृथ्वीतत्व को शुद्ध किया , फिर कालियमर्दन करके जलतत्व को , कालियदह के किनारे ही दावानल का पान करके अग्नितत्व को शुद्ध किया तो तृणावर्त जो कि बवंडर के स्वरूप में आया था उसका वध करके वायु तत्व को दोषमुक्त करते हुए व्योमासुर का वध करके आकाश तत्व को भी शुद्ध कर दिया | ऐसा अलौकिक कृत्य भगवान के और किसी अवतार में देखने को शायद ही मिलता हो जहाँ परमात्मा ने एक साथ पांचों तत्वों का शुद्धिकरण किया हो | भगवान की महिमा का वर्णन करने की क्षमता कम से कम मुझमें तो नहीं है | मैं तो सिर्फ इतना ही कहूँगा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवनदर्शन समझ पाना हम जैसे साधारण मनुष्यों के बस की बात नहीं है |* *अखिलब्रह्माण्डनायक परात्पर ब्रह्म , लीलापुरुषोत्तम , लीलाविहारी भगवान श्याम सुंदर के पावन जन्मोत्सव पर्व "जन्माष्टमी" पर आप सभी को हार्दिक बधाईयाँ |*

अगला लेख: काम प्रवृत्ति :----- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
03 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में त्यौहारों की कमी नहीं है | नित्य नये त्यौहार यहाँ सामाजिक एवं धार्मिक समसरता बिखेरते रहते हैं | ज्यादातर व्रत स्त्रियों के द्वारा ही किये जाते हैं | कभी भाई के लिए , कभी पति के लिए तो कभी पुत्रों के लिए | इसी क्रम में आज भाद्रपद कृष्णपक्ष की षष्ठी (छठ) को भगवान श्री कृष्णचन्द्र जी के
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*संसार में मनुष्य एक अलौकिक प्राणी है | मनुष्य ने वैसे तो आदिकाल से लेकर वर्तमान तक अनेकों प्रकार के अस्त्र - शस्त्रों का आविष्कार करके अपने कार्य सम्पन्न किये हैं | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा अस्त्र होता है उसका विवेक एवं बुद्धि | इस अस्त्र के होने पर मनुष्य कभी परास्त नहीं हो सकता परंतु आवश्यकता हो
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म ने मानव मात्र को सुचारु रूप से जीवन जीने के लिए कुछ नियम बनाये थे | यह अलग बात है कि समय के साथ आज अनेक धर्म - सम्प्रदायों का प्रचलन हो गया है , और सनातन धर्म मात्र हिन्दू धर्म को कहा जाने लगा है | सनातन धर्म जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मनुष्यों के दिव्य संस्कारों के साथ मिलता है | जी
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास के
03 सितम्बर 2018
22 अगस्त 2018
*इस संसार में जब से मानवी सृष्टि हुई तब से लेकर आज तक मनुष्य के साथ सुख एवं दुख जुड़े हुए हैं | समय समय पर इस विषय पर चर्चायें भी होती रही हैं कि सुखी कौन ? और दुखी कौन है ?? इस पर अनेक विद्वानों ने अपने मत दिये हैं | लोककवि घाघ (भड्डरी) ने भी अपने अनुभव के आधार पर इस विषय पर लिखा :- "बिन व्याही ब
22 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
*मानव शरीर को गोस्वामी तुलसीदास जी ने साधना का धाम बताते हुए लिखा है :--- "साधन धाम मोक्ष कर द्वारा ! पाइ न जेहि परलोक संवारा !! अर्थात :- चौरासी लाख योनियों में मानव योनि ही एकमात्र ऐसी योनि है जिसे पाकर जीव लोक - परलोक दोनों ही सुधार सकता है | यहाँ तुलसी बाबा ने जो साधन लिखा है वह साधन आखिर क्या ह
27 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन वैदिक धर्म ने मानव मात्र को सुचारु रूप से जीवन जीने के लिए कुछ नियम बनाये थे | यह अलग बात है कि समय के साथ आज अनेक धर्म - सम्प्रदायों का प्रचलन हो गया है , और सनातन धर्म मात्र हिन्दू धर्म को कहा जाने लगा है | सनातन धर्म जीवन के प्रत्येक मोड़ पर मनुष्यों के दिव्य संस्कारों के साथ मिलता है | जी
03 सितम्बर 2018
27 अगस्त 2018
*सनातन संस्कृति इतनी मनोहारी है कि समय समय पर आपसी प्रेम सौहार्द्र को बढाने वाले त्यौहार ही इसकी विशिष्टता रही है | शायद ही कोई ऐसा महीना हो जिसमें कि कोई त्यौहार न हो , इन त्यौहारों के माध्यम से समाज , देश एवं परिवार के बिछड़े तथा अपनों से दूर रह रहे कुटुंबियों को एक दूसरे से मिलने का अवसर मिलता है
27 अगस्त 2018
29 अगस्त 2018
*इस धराधाम पर मनुष्य अपने जीवनकाल में अनेक शत्रु एवं मित्र बनाता रहता है , यहाँ समय के साथ मित्र के साथ शत्रुता एवं शत्रु के साथ मित्रता होती है | परंतु मनुष्य के कुछ शत्रु उसके साथ ही पैदा होते हैं और समय के साथ युवा होते रहते हैं | इनमें मनुष्य मुख्य पाँच शत्रु है :- काम क्रोध मद लोभ एवं मोह | ये
29 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धरती पर मनुष्य का प्रसन्न होना एक मानसिक दशा है | प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए धन - ऐश्वर्य का होना आवश्यक नहीं है | प्राय: देखा जाता है कि मध्यमवर्गीय लोग धनी लोगों से कहीं अधिक प्रसन्न रहते हैं , अपने परिवार व मित्रों के बीच उनके खुशी के ठहाके सुने जा सकते हैं | प्रसन्न रहने का रहस्य यही है क
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास के
03 सितम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x