जातिगत विभाजन

06 सितम्बर 2018   |  विवेक शुक्ला   (95 बार पढ़ा जा चुका है)

ऐसा प्रतीत होता है कि सवर्णो को सरकार ग्रांटेड के तौर पर ले रही है. जब माननीय उच्चतम न्यायलय ने अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम के दुर्प्रयोग पर चिंता जाहिर करते हुए भारत के नागरिको के हित में अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उचित और समयानुकूल संशोधन किया था तब भारत सरकार को क्या ज़रूरत थी कि आनन फानन में अध्यादेश लाकर समाज की प्रगति को रोकने की. मैं इस अध्यादेश के विरोध में निश्चित रूप से शांति पूर्ण ढंग से की जा रही मांगो का समर्थन करता हूँ और सभी भारतीय समाज को एकजुट रहने की प्रार्थन करता हूँ हुए किसी भी अराजक या हिंसक प्रदर्शन का विरोध करता हूँ . आशा है की भारत सरकार अपनी गलती मानते हुए अध्यादेश को वापस लेगी और न्यायपालिका के द्वारा किये गए सामाजिक व्यवस्था के अवलोकन का समर्थन करेगी. निश्चित रूप से किसी भी अधिनियम या कानून के दुरप्रयोग को रोकना विधायिका का कर्त्तव्य है.

कृपया आंदोलन से व्यवस्था भंग न हो और शांति बानी रहे ऐसी प्रार्थना के साथ.... जय भारत, जय श्री राम.

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