मनुष्य के विचार , वचन एवं व्यवहार :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

07 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (75 बार पढ़ा जा चुका है)

मनुष्य के विचार   , वचन एवं व्यवहार :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सकल सृष्टि में अनेकों प्राणियों के मध्य मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जिसमें कुछ विशेष विशेषतायें हैं जो कि अन्य प्राणियों में नहीं मिलती हैं | मनुष्य की तीन विशेष मौलिक विशेषतायें हैं :- विचार , वचन एवं व्यवहार | किसी अन्य प्राणी की अपेक्षा किसी भी विषय पर विचार करने की जो क्षमता है वह अन्य में नहीं पायी जाती | वचन की जो शक्ति मनुष्य में है वह किसी और में नहीं है | तीसरी सबसे प्रमुख विशेषता है मनुष्य का व्यवहार | ये तीन मुख्य विशेषतायें मनुष्य के अतिरिक्त और किसी भी प्राणी में नहीं पाई जाती हैं | यही तीनों विशेषताएं मनुष्य को विशिष्ट प्राणी बनाती हैं | विचार अर्थात अपने चिंतन करने की क्षमता के कारण मनुष्य ने आज तक बहुत विकास किये | आज जो संसार का बदला हुआ स्वरूप दिख रहा है वह मनुष्य के चिंतन का ही परिणाम है | विचार शक्ति ने साहित्य को जन्म देकर उसे अनेकानेक विभागों में विभक्त करके पूरी संस्कृति को कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया | यह कहा जा सकता है कि मनुष्य की विचार शक्ति ने सृष्टि का नवीनीकरण कर दिया | दूसरा तथ्य है मनुष्य के वचन | संसार के जितने भी प्राणी हैं बोलते तो सभी हैं परंतु उनके वचन सीमित हैं | मनुष्य ने अपनी क्षमताओं के बल पर अपनी भाषा को असीमित किया जिसके कारण वह जो चाहे वह बोल सकता है | अब बात करें मनुष्य के व्यवहार की | विचार कीजिए पशु पक्षियों का जो व्यवहार सृष्टि के आदि में था वही आज भी है | परंतु मनुष्य ने समय के साथ अपना व्यवहार बदला है | मनुष्य ने अपने व्यवहार का परिष्कार किया है | इसी व्यवहार का परिणाम है कि आज मनुष्य कोई भी कार्य विधि एवं निषेध का विचार करके ही करता है | इन्हीं मुख्य तीनों विशेषताओं ने मनुष्य को अलौकिकता प्रदान की |* *आज मनुष्य अपने इन तीन विशेष गुणों के कारण नित्य विकास एवं सफलता के नये अध्याय लिख रहा है | परंतु इसी संसार में कुछ ऐसे नकारात्मक लोग भी हैं जिनके विचार , वचन एवं व्यवहार इतने दूषित हैं कि वे सभ्य समाज के प्राणी कहे जाने योग्य ही नहीं दिखाई पड़ते | दूसरों के प्रति कुत्सित विचार मन में पाले हुए कुछ लोग अपने मन ही मन कुढा करते हैं इसका परिणाम यह होता है कि वे उन्हीं विचारों के चक्रव्यूह में फंसकर दूसरों पर आघात करने का नित्य नया तरीका ही ढूंढा करते हैं | यह कहना अतिशयोक्ति न हो होगी कि आज संसार में जितनी भी विकृतियां देखने को मिल रही हैं उसका कारण कहीं न कहीं से मनुष्य के वचन ही हैं | राजनीतिक , सामाजिक एवं धार्मिक मंचों से आज ऐसे वचन बोले जा रहे हैं जो मनुष्य को उन्मादी बनाकर किसी भी संघर्ष के लिए तैयार कर रहे हैं | मनुष्य के वचन ही उसके अस्त्र हैं | अपने वचनों से ही चाहे तो अनेक मित्र बना सकता है या फिर शत्रुओं को भी बढा सकता है | आज मनुष्य ही मनुष्य के साथ कब कैसा व्यवहार कर देगा यह कोई जानता ही नहीं | आज आपसी विश्वसनीयता समाप्त होती जा रही है | मैंने "आचार्य अर्जुन तिवारी" ने जो गुरुओं से प्रसाद स्वरूप प्राप्त किया है उसके अनुसार मनुष्य का व्यवहार त्र्यात्मक होना चाहिए | प्रवृत्ति , निवृत्ति एवं उपेक्षा | अर्थात जो उपादेय है उसमें प्रवृत्त होते हुए , कुत्सित व्यवहार से निवृत्ति लेकर (छोड़कर) उपेक्षणीय व्यवहार की उपेक्षा करके ही मनुष्य सफल होकर सर्वप्रिय बन सकता है |* *मनुष्य के विकास में उसके विचार , वचन एवं व्यवहार का बहुत बड़ा योगदान रहा है | इसे बनाये एवं बचाये रखने वाला ही हर क्षेत्र में सफल हो सकता है |*

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