देश के भविष्य - युवा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

07 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (80 बार पढ़ा जा चुका है)

देश के भविष्य   - युवा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ही समाजदेश के विकास में युवाओं का अप्रतिम योगदान रहा है | समय समय पर सामाजिक बुराईयों का अन्त करने का बीड़ा युवाओं ने ही युठाया है | अपनी युवावस्था में ही मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम ने ताड़कादि का वध तो किया साथ वन को जाकर रावण आदि दुर्दांत निशाचरों का वध करके विकृत होती जा रही संस्कृति को पुनर्स्थापित किया | लीलापुरुषोत्तम श्री कृष्ण ने तो जन्म से लेकर युवावस्था तक सामाजिक बुराईयों एवं रुढियों में बदलाव के लिए संघर्ष किया एवं अपने जीवनकाल में पृथ्वी से समस्त बुराईयों को समाप्त करने का कार्य किया | पराधीन भारत को स्वाधीन कराने में देश के युवाओं के योगदान को भला देश कैसे भूल सकता है , जिन्होंने अपने सुख ऐश्वर्य की चिंता न करके बलिदानी हो गये और हमें स्वाधीनता दिलाई | युवा विवेकानंद जी ने विदेश में जाकर देश का परचम लहराया | इन युवाओं ने यदि उपरोक्त ऐश्वर्ययुक्त समस्त कार्य किये तो इसका मुख्य कारण रहा उनको माता - पिता एवं गुरु के कारण उनको मिला संस्कार | अपनी संस्कृति एवं मिले संस्कारों के बल पर ही यह सभी कार्य सम्पन्न हो पाये | बिना संस्कार के संसार का कल्याण करने का भाव ही हृदय में नहीं प्रकट हो सकता | इसलिए युवाओं में बचपन से ही संस्कारों का आरोपण बहुत आवश्यक है | एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आखिर युवा किसे माना जाय ?? क्या उम्र से ही मनुष्य युवा व वृद्ध हो जाता है ! जी नहीं युवा वही है जिसकी आँखों में आशाओं के सपने हों , जिसका मन नित्य नई उड़ान भरता हो कुछ नया कर दिखाने का साहस करके दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने का साहस रखने वाला ही युवा कहा जा सकता है |* *आज के भारत को युवा भारत कहा जाता है क्योंकि हमारे देश में असम्भव को संभव में बदलने वाले युवाओं की संख्या सर्वाधिक है | क्योंकि युवा शब्द ही मन में उमंग एवं उड़ान की अनुभुति पैदा करता है | उम्र का यही वह समय होता है जब न केवल एक युवा के बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र का भविष्य तय किया जाता रहा है | परंतु मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देख रहा हूँ कि आज का एक सत्य यह भी है कि युवा बहुत मनमानी करते हैं और किसी की सुनते नहीं | दिशाहीनता की इस स्थिति में युवाओं की ऊर्जाओं का नकारात्मक दिशाओं की ओर मार्गान्तरण व भटकाव होता जा रहा है | लक्ष्यहीनता के परिवेश ने युवाओं को इतना दिग्भ्रमित करके रख दिया है कि उन्हें सूझ ही नहीं पड़ रही कि करना क्या है, हो क्या रहा है, और आखिर उनका होगा क्या ?? आज युवाओ मे धैर्य की कमी, आत्मकेन्द्रिता, नशा, लालच, हिंसा, कामुकता तो जैसे उनके स्वभाव का अंग बनते जा रहे हैं | यह एक चिंतनीय विषय है ! मगर इस समस्या की तह तक अगर हम जाए तो पहला अपराध माता , पिता व अभिभावक का है | क्योंकि माता पिता की व्यावसायिक व्यस्तता , एवं आज के संचार माध्यम व्हट्सऐप , फेसबुक पर ही अधितकर उलझे रहने के कारण वे युवाओ की तरफ ध्यान केन्द्रित नही कर पाते है | और युवा दिशानिर्देश के अभाव में भटक रहा है | एक विशिष्ट कारण और है कि अभिभावक न युवा के किसी मामले मे अति प्यार के कारण दखल देते है | प्रत्येक उतित एवं अनुचित मांग को बिना जाने पूरा कर देते है | दूसरा सबसे बड़ा जिम्मेदार आज का समाज है | समाज के लिए हर व्यक्ति अपना आर्थिक योगदान नाम के लिए तो देता है मगर समाज के व्यक्ति समाज के युवाओ के चरित्र निर्माण विषयक आयोजन नाम मात्र रे लिए नहीं करते हैं जिससे युवा पीढ़ी भ्रमित न हो | जरूरत है अभिभावक व समाज आज के युवाओ के साथ लेकर ऐसे आयोजन करे जिससे युवाओ मे अच्छे संस्कार का निर्माण हो | इस पर आज गहनता से विचार करने की आवश्यकता है |* *युवा संस्कारित होंगे तो देश का भविष्य उज्ज्वल होगा समाज का भविष्य उज्ज्वल होगा | तो आओ हम अभिभावक व समाज साथ मे मिलकर युवाओ मे अच्छे संस्कार का निर्माण करने का प्रयास अभी से प्रारम्भ करें |*

देश के भविष्य   - युवा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

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