भगवान की छठी :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

08 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (116 बार पढ़ा जा चुका है)

भगवान की छठी :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सम्पूर्ण विश्व में हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया जाने वाला छ: दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव "जन्माष्टमी" आज भगवान की छठी मनाने के साथ पूर्णता को प्राप्त करेगा | मनुष्य जीवन जन्म लेने की छठवें दिन मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष महत्व रखता है | भादों की अंधियारी रात में अष्टमी तिथि को कारागार में जन्म लेकरके रात ही रात गोकुल यशोदा जी के अंक में पहुंचकरके भगवान कन्हैया कंस के भय से भयभीत वसुदेव एवं देवकी को संतुष्टि प्रदान करते हैं | जन्म के छठे दिन जब गोकुल की सारी गोपियां यशोदा मैया के आंगन में एकत्र हो गई नवजात शिशु की छठी मनाने के लिए | धूमधाम से छठी पर्व मनाया जा रहा था | तभी उन्हीं नारियों में एक राक्षसी जिसका नाम पूतना था एक दिव्यांगना के रूप में वहां पर आई | जिसे कंस ने भेजा था और जिसका उद्देश्य था बालकृष्ण का वध करना | पूतना नाम का अर्थ ही होता है कि " जो किसी दूसरे के पूत को ना देख सके | नाम ही था पूत - ना | अंततोगत्वा भगवान कन्हैया के हाथों पूतना की मृत्यु हुई , और तब से लेकर आज तक हठी का यह पर्व सावधानी वाला पर्व माना जाने लगा | आज के दिन भगवान कन्हैया का श्रृंगार करके आँखों में काजल लगाया जाता है एवं विशेष रूप से छप्पन भोग एवं कढी चावल तथा मालपुए का भोग भी लगाया जाता है | इस तरह भगवान की छठी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है | भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव पर्व का आज समापन दिवस होता है | जगह जगह भगवान कृष्ण की डोल एक शोभायात्रा के रूप में गाँव व क्षेत्र का भ्रमण कराके पर्व का समापन किया है |* *आज भी जब घर में किसी नवजात का जन्म होता है तो जन्म के छठवें दिन उस बालक की छठी मनाई जाती है | आज के दिन प्रसूता को उपहार दिए जाते हैं एवं घर की महिलाएं मिलकर के ढोलक की थाप पर सोहर गीत बधाई गीत आदि गाती है | हमारे गांवों में प्रचलन है की बालक की बुआ बालक को काजल लगाती हैं, एवं रात्रि भर जागरण किया जाता है | ऐसी मान्यता है की आज की रात में सोना नहीं चाहिए क्योंकि जिस प्रकार भगवान कन्हैया को मारने के लिए पूतना का आगमन हुआ था उसी प्रकार हमारे बालक के ऊपर कोई संकट ना आवे, इसलिए जागरण किया जाता है | यही कारण है कि छठी के दिन बाहर के किसी भी आदमी को घर में नहीं आने दिया जाता है | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि छठी बालक के जीवन में एक संकल्प के रूप में होता है | क्योंकि ऐसी मान्यता है कि आज के ही दिन विधाता उस बालक का भाग्य लिखते हैं | किसी ने कहा है:-- "जो विधना ने लिख दिया छठी रात के अंक" | परंतु इससे अलग हटकर यदि देखा जाए तो यह रात्रि उस नवजात के लिए संसार में पदार्पण करने के बाद काम, क्रोध, मद, लोभ, अहंकार एवं मोहरूपी षडरिपुओं से बचे रहने का संकल्प होता है | नवजात बालक जिसने अभी तक संसार नहीं देखा होता है उसके लिए विगत स्मृति बनी होती है | स्वयं वह मन ही मन इन षडरिपुओं से बचने का संकल्प लेकर सूतिका कक्ष से बाहर निकलता है | परंतु अपने विकास क्रम में परिवार की मोह माया में वह अपने सारे संकल्पों भूल जाता है और मोह माया में लिपटकर अज्ञानता की ओर अग्रसर हो जाता है |* *भगवान कन्हैया की छठी के दिन संपूर्ण देशवासियों को जन्माष्टमी पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं:---- |*

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