राम राम क्यों ???

10 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (69 बार पढ़ा जा चुका है)

राम राम क्यों कहा जाता है? क्या कभी सोचा है कि बहुत से लोग जब एक दूसरे से मिलते हैं तो आपस में एक दूसरे को दो बार ही *“राम राम"* क्यों बोलते हैं ? *एक बार या तीन बार क्यों नही बोलते ?* दो बार *“राम राम"* बोलने के पीछे बड़ा गूढ़ रहस्य है क्योंकि यह आदि काल से ही चला आ रहा है... हिन्दी की शब्दावली में *‘र'* सत्ताइसवां शब्द है, *‘आ’* की मात्रा दूसरा और *‘म'* पच्चीसवां शब्द है... अब तीनो अंको का योग करें तो 27 + 2 + 25 = *54*, *अर्थात एक “राम”* का योग 54 हुआ- *इसी प्रकार दो “राम राम”* का कुल *योग 108* होगा। हम जब कोई जाप करते हैं तो 108 मनके की माला गिनकर करते हैं। सिर्फ *'राम राम'* कह देने से ही पूरी *माला का जाप* हो जाता है।आपको सभी को *राम राम जी* *🙏🏻🌲जय श्री राम🌲🙏🏻* *🌲🌳राम शरणम ममः🌳🌲*

अगला लेख: काम प्रवृत्ति :----- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
29 अगस्त 2018
*सनातन काल से मनुष्य धर्मग्रंथों का निर्देश मान करके ईश्वर को प्राप्त करने का उद्योग करता रहा है | भिन्न - भिन्न मार्गों से भगवत्प्राप्ति का यतन किया जाता रहा है | इन्हीं में एक यत्न है माला द्वारा मंत्रजप | कुछ लोग यह पूंछते रहते हैं कि धर्मग्रंथों में दिये गये निर्देशानुसार यदि निश्चित संख्या में
29 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में त्यौहारों की कमी नहीं है | नित्य नये त्यौहार यहाँ सामाजिक एवं धार्मिक समसरता बिखेरते रहते हैं | ज्यादातर व्रत स्त्रियों के द्वारा ही किये जाते हैं | कभी भाई के लिए , कभी पति के लिए तो कभी पुत्रों के लिए | इसी क्रम में आज भाद्रपद कृष्णपक्ष की षष्ठी (छठ) को भगवान श्री कृष्णचन्द्र जी के
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*मानव जीवन में गुरु का कितना महत्त्व है यह आज किसी से छुपा नहीं है | सनातन काल से गुरुसत्ता ने शिष्यों का परिमार्जन करके उन्हें उच्चकोटि का विद्वान बनाया है | शिष्यों ने भी गुरु परम्परा का निर्वाह करते हुए धर्मध्वजा फहराने का कार्य किया है | इतिहास में अनेकों कथायें मिलती हैं जहाँ परिवार / समाज से उ
03 सितम्बर 2018
29 अगस्त 2018
*इस धराधाम पर मनुष्य अपने जीवनकाल में अनेक शत्रु एवं मित्र बनाता रहता है , यहाँ समय के साथ मित्र के साथ शत्रुता एवं शत्रु के साथ मित्रता होती है | परंतु मनुष्य के कुछ शत्रु उसके साथ ही पैदा होते हैं और समय के साथ युवा होते रहते हैं | इनमें मनुष्य मुख्य पाँच शत्रु है :- काम क्रोध मद लोभ एवं मोह | ये
29 अगस्त 2018
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास के
03 सितम्बर 2018
20 सितम्बर 2018
*सकल सृष्टि में ईश्वर ने मनुष्य को सभी अधिकार दे रखे हैंं | जैसी इच्छा हो वैसा कार्य करें यह मनुष्य के हाथ में है | इतना सब कुछ देने के बाद भी परमात्मा ने कुछ अधिकार अपने हाथ में ले रखे हैं | कर्मानुसार भोग करना मनुष्य की मजबूरी है | जिसने जैसा कर्म किया है , जिसके भाग्य में जैसा लिखा है वह उसको भोग
20 सितम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x