कलियुग :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

11 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (156 बार पढ़ा जा चुका है)

कलियुग :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में चार युगों का वर्णन मिलता है :- सतयुग , त्रेतायुग , द्वापरयुग एवं कलियुग | आज हम जिस युग में निवास कर रहे हैं उसे कलियुग कहा गया है | हमारे देश भारत में कलियुग के पहले अनेक ऐसे दिव्यदृष्टा ऋषि - महर्षि हुए हैं जिन्होंने कलियुग में घटने वाली घटनाओं का वर्णन पहले ही कर दिया है | वेदव्यास जी महाराज ने अपने श्रीमद्भागवत में कलियुग एवं कलियुगी मनुष्यों का चरित्र लिख दिया था | यह वर्णन पढकर हमारी आँखें खुल जानी चाहिए | कलियुग में ही प्रकट हुए प्रात:स्मरणीय पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने तो कलियुग का विस्तृत वर्णन अपनी कालजयी रचना "श्रीरामचरित मानस" में किया है | बाबा जी ने स्पष्ट लिख दिया है :-- कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भये सद्ग्रंथ ! दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ !! अर्थात :- कलियुग के पापों ने सब धर्मों को ग्रस लिया, सद्ग्रंथ लुप्त हो गए, दम्भियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर-करके बहुत से पंथ प्रकट कर दिए | वेदव्यास भगवान श्री भागवतम् के द्वादश स्कन्ध में लिखते हैं :-पुत्रः पितृवधं कृत्वा पिता पुत्रवधं तथा ! निरुद्वेगो वृहद्वादी न निन्दामुपलप्स्यते ! म्लेच्छीभूतं जगत सर्व भविष्यति न संशयः ! हस्तो हस्तं परिमुषेद् युगान्ते समुपस्थिते !! अर्थात कलियुग में पुत्र, पिता का और पिता पुत्र का वध करके भी उद्विग्न नहीं होंगे | अपनी प्रशंसा के लिए लोग बड़ी-बड़ी बातें बनायेंगे किन्तु समाज में उनकी निन्दा नहीं होगी | उस समय सारा जगत् म्लेच्छ हो जाएगा- इसमें संशयम नहीं। एक हाथ दूसरे हाथ को लूटेगा | कलियुग में लोग शास्त्रों से विमुख हो जाएंगे | अनैतिक साहित्य ही लोगों की पसंद हो जाएगा | बुरी बातें और बुरे शब्दों का ही व्यवहार किया जाएगा। स्त्री और पुरुष, दोनों ही अधर्मी हो जाएंगी | स्त्रियां पतिव्रत धर्म का पालन करना बंद कर देगी और पुरुष भी ऐसा ही करेंगे | स्त्री और पुरुषों से संबंधित सभी वैदिक नियम विलुप्त हो जाएंगे | इतना सब लिखने के बाद उन्होंने इससे बचने का उपाय भी लिख दिया है |* *आज के युग में पूर्व के मनीषियों द्वारा कही बातों का आंकलन करके देखा जाय तो सत्य ही प्रतीत हो रही हैं | आज इसे कलियुग का प्रभाव मानें या मनुष्यों की मानसिकता यह विचारणीय विन्दु है | यह सत्य है कि आज लोगों का मन सत्कार्यों में सतसंगों में न लगकर अनर्गल कार्यों में ज्यादा ही लगता है | सतसंग शालायें सूनी होती जा रही हैं इसका एक कारण यह भी है कि प्रत्येक धर्म के धर्माधिकारी धर्मग्ंथों में निर्देशित किये गये नियमों ले परे हटकर अपने नियम अपने अनुयायियों पर थोप रहे हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" कलियुग के वर्तमान परिवेश को देखकर सोंचता हूँ कि आने वाला समय कैसा होगा ?? लोगों कि रुचि अपने धर्म की मान्यताओं से अलग हो रही है | आधुनिकता के रंग में रंगे समाज के लोग आज धर्मग्रंथों की अपेक्षा सिनेमा की ओर अधिक उन्मुख हैं | कलियुग के पापों से बचने का जो उपाय (हरिकथा एवं नाम संकीर्तन) हमारे मनीषियों ने बताया था आज हम उससे भी विमुख होते जा रहे हैं | विचार कीजिए कि आज पुण्य भी दिखावे के लिए ही किया जाता है | अभी समय है यदि चेत गये तो ठीक नहीं तो आने वाला समय और भी कठिनाई भरा होने वाला है | हमारे धर्मग्रंथों को झूठा बताने वालों से कहना चाहूँगा कि वे पुराणों में वर्णित तथ्यों एवं आज के परिवेश का मिलान अवश्य करें |* *यदि कलियुग के प्रभाव से बचना है तो :- सतसंग , हरिकथा , एवं नाम संकीर्तन करते हुए सत्कार्य करते रहें |*

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