हरतालिका (कजली तीज) :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

12 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (62 बार पढ़ा जा चुका है)

हरतालिका (कजली तीज) :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है | मनुष्य सर्वश्रेष्ठ बना अपनी शक्ति के बल पर | बिना शक्ति के इस संसार में किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिल सकती | चाहे वह ज्ञान की शक्ति हो , चाहे विवेक की , शक्ति का होना अनिवार्य है | मनुष्य को शक्ति प्राप्त होती है प्रकृति से , और प्रकृति है क्या ?? प्रकृति उस परमपुरुष की शक्ति है | अर्थात सृष्टि का प्रजनन , पालन शक्ति से ही सम्भव है | शक्ति का अर्थ शिव की शक्ति अर्थात नारी | बिना नारी के पुरुष का कहीं कोई अस्तित्व ही नहीं है | जन्म से लेकर जीवन के प्रत्येक मोड़ पर नारी ही विभिन्न रूपों में पुरुष को शक्ति प्रदान करती रहती है | सदैव से नारियों ने पुरुषवर्ग की कुशलता की कामना के लिए तरह तरह के व्रत उपवास किये हैं | इसी क्रम में सबसे कठिन व्रत है :- "हरतालिका तीज " या कजली तीज का | चौबीस घंटे तक बिना जल पिये ही पति के लिए यह व्रत किया जाता है | पति को दीर्घायु मिले एवं नारियों का सुहाग अखण्ड बना रहे इसी कामना से भगवान शिव , आदिशक्ति मैया गौरी एवं गणेश का पूजन करके गौरी (पार्वती) जी को यथाशक्ति श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है | "हरतालिका" है क्या ? इस पर एक दृष्टि डाल ली जाय | हरतालिका दो शब्‍दों से मिलकर बना है- हरत + आलिका | हरत का मतलब है 'अपहरण' और आलिका यानी 'सहेली' अर्थात सहेली के द्वारा अपहरण | कुछ प्राचीन दन्तकथाओं की मान्‍यता के अनुसार मां पार्वती की सहेली उन्‍हें घने जंगल में ले जाकर छिपा देती हैं ताकि उनके पिता भगवान विष्‍णु से उनका विवाह न करा पाएं | पार्वती जी ने वहीं तपस्या करके भगवान शिव को प्राप्त किया | सुहागिन महिलाओं की हरतालिका तीज में गहरी आस्‍था है |* *आज युगों बीत जाने के बाद भी , पुरुषप्रधान समाज में अनेकों प्रकार की उपेक्षाओं का दंश झेलने के बाद भी , या फिर आधुनिकता की चकाचौंध में चुंधिया जाने के बाद भी यदि कुछ नहीं बदला है तो वह है भारतीय नारी का भाव व स्नेह | आज भले ही एक दूसरे की नकल करने के लिए या फिर यूँ कह लीजिए कि एक दूसरे को दिखाने के लिए ये नारियां कोई व्रत या पूजन कर रही हैं परंतु प्रश्न यह है कि आखिर कर तो रही हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" गर्व के साथ कह सकता हूँ कि मैं उस पवित्र देवभूमि भारत में जन्मा हूँ जहाँ आज भी पति को देवता की संज्ञा दी जाती है | पति भले ही मदिरापान करके बदसलूकी करे परंतु धन्य हैं ऐसी नारियां जो ऐसे भी पति की दीर्घायु के लिए ऐसे कठिन व्रत करती हैं | विशेषरूप से उत्तर - प्रदेश , बिहार एवं मध्य प्रदेश में "हरतालिका तीज" एवं कर्नाटक , तमिलनाडु एवं राजस्थान में "गौरी हब्बा" के नाम से जाना जाने वाला यह निर्जल व्रत जहाँ सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु की कामना से करती हैं वहीं कुंवारी कन्यायें मनवांछित वर के लिए यह व्रत धारण करती हैं | यह नारियां जो कठिन से कठिन व्रत करती हैं आखिर किसके लिए ?? मात्र पुरुषवर्ग के लिए ! तो भी पुरुषवर्ग उनका सम्मान नहीं कर पाता |* *पुरुष का अस्तित्व नारी से ही है | माँ की कोख में ही कन्या भ्रूण हत्या कराने वालों सचेत हो जाओ नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब सम्पूर्ण पुरुष समाज एक माँ की ममता , बहन के दुलार , पत्नी के प्रेम एवं बेटी के मनुहार से वंचित हो जायेगा |*

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रेणु
15 सितम्बर 2018

मुझे इतना ज्ञान नहीं आचार्य जी पर जरुर ऐसा ही होगा | आप ज्यादा जानते हैं | सादर --

रेणु
14 सितम्बर 2018

सुंदर चित्र और संदर लेख आदरणीय आचार्य जी | हार्दिक शुभकामनायें | हमारे हरियाणा में तो सावन की तीज मनाई जाती है भादो की नहीं सादर

स्थान विशेष में अंतर अमान्त या पूर्णिमान्त के कारण हो जाता है

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