गणेश चतुर्थी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

13 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (9 बार पढ़ा जा चुका है)

गणेश चतुर्थी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

*देवताओं की विचरणस्थली दिव्यभूमि भारत देश में नित्य नये पर्व एवं उल्लास परक त्यौहार होते रहते हैं | जहाँ यह सभी त्यौहार मौसम के अनुकूल होने के साथ प्रासंगिकता सहित सभी देशवासियों को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य करते हैं वहीं लगभग सभी त्यौंहार पौराणिक कथाओं से भी सम्बंधित हैं | इसी क्रम में आज देवताओं में अग्रपूज्य , विघ्न विनाशक , गजमुख लम्बोदर भगवान गणेश का अवतरण दिवस गणेश चतुर्थी मात्र भारत देश में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में भिन्न - भिन्न स्वरूपों में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | भगवान गणेश का जन्मदिन गणेश चतुर्थी के नाम से भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है | इस पर्व को विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है | भविष्य पुराण के अनुसार शिवा, संज्ञा और सुधा यह तीन चतुर्थी होती है इनमें भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को संज्ञा कहते हैं | भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मध्यान्ह में भगवान गणेश का जन्म हुआ था इसी कारण यह तिथि महक नाम से भी जानी जाती है | इस दिन भगवान गणपति की पूजा, उपासना व्रत, कीर्तन आैर जागरण इत्यादि करना चाहिए | भगवान गणेश को गणपति भी कहा जाता है | गण + पति = गणपति | संस्कृकोश में गण को पवित्रक एवं पति को स्वामी की संज्ञा दी गई है | जिसका अर्थ हुआ "पवित्रकों के स्वामी" | जिस प्रकार भगवान गणेश बुद्धि के विधाता कहे जाते हैं उसी प्रकार उनके शरीर का प्रत्येक अंग भी एक सूक्ष्म ज्ञान व रहस्यों से परिपूर्ण हैं | भगवान गणेश का बड़ा सिर कुशाग्र बुद्धि एवं नेतृत्व शक्ति का परिचय देता है तो छोटी आँखें चिंतनशीलता एवं गम्भीरता का द्योतक है | सूप जैसे कान भाग्यशाली एवं दीर्घायु होने का संकेत देते हैं तो सूंड़ सक्रियता का परिचय कराती है | लम्बोदर (बड़ा पेट) यह संकेत करता है कि सब कुछ हजम करने की शक्ति है | इस प्रकार भगवान गणेश का शरीर भी ज्ञान का भण्डार है |* *आज सम्पूर्ण विश्व में "गणेशोत्सव" का प्रारम्भ हो जायेगा जो कि अनंत चतुर्दशी तक चलेगा | आज भक्तजन भगवान गणेश की पूजा तो बहुत ही धूमधाम के साथ एवं हर्षोल्लास के करते हैं परंतु दूसरा पहलू यह है कि वे भगवान गणेश व उनके शारीरिक प्रतीकों से कोई शिक्षा लेना ही नहीं चाहते | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" भगवान गणेश के शारीरिक बनावट व उनके अंगों पर विचार करता हूँ फिर आज के भक्तों के क्रिया कलाप देखता हूँ तो विपरीत अवस्थायें दिखाई पड़ती हैं | भगवान गणेश का बड़ा सिर बड़ी सोंच का संकेत देती है , परंतु दनि व दिन हमारी सोंच संकुचित होती जा रही है | छोटी आँखें सूक्ष्मता से देखने के बाद ही कोई निर्णय लेने का संकेत दे रही हैं परंतु आज हम बिना देखे सुनी सुनाई बातों पर खून खराबा तक करने को तैयार हो जा रहे हैं | गणेश जी के सूप जैसे कान से यह शिक्षा मिलती है कि जैसे सूप बुरी चीजों को छांटकर अलग कर देता है उसी तरह जो भी बुरी बातें आपके कान तक पहुंचती हैं उसे बाहर ही छोड़ दें | बुरी बातों को अपने अंदर न आने दें | सुनो सबकी परंतु करो अपने विवेकानुसार | परंतु आज लोग दूसरों की बातों में ही आकर निर्णय लेने लगे हैं | भगवान गणेश की सूंड़ निरंतर सक्रिय रहने का संकेत देती है तो लंबोदर होने का कारण यह है कि वे हर अच्छी और बुरी बात को पचा जाते हैं और किसी भी बात का निर्णय सूझबूझ के साथ लेते हैं | परंतु आज तो जैसे किसी के भी कोई बात उदर में पचती ही नहीं और इधर - उधर कहकर लोग वैमनस्यता बढाने में सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं | भगवान गणेश ने अपने टूटे दाँत की लेखनी बनाकर उपयोग करके यह बताया है कि संसार में कोई वस्तु व्यर्थ नहीं है बस उसका प्रयोग कब ? कहाँ ?? कैसे होगा इसका ज्ञान होना आवश्यक है |* *गणेशोत्सव के पावन अवसर यही कहना चाहूँगा कि जब तक हम उनके आदर्शों या शारीरिक अंगों के प्रशस्त हो रहे ज्ञान को जीवन में नहीं उतारेंगे तो यह पर्व मनाना व्यर्थ हैं |*

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रेणु
15 सितम्बर 2018

गौरी नन्दन नमो- नमो !!!!!!!!! सार्थक लेख !!!!

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