ऋषि पंचमी :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

14 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (142 बार पढ़ा जा चुका है)

ऋषि पंचमी :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है | परंतु मनुष्य को गलतियों का पुतला भी कहा गया है ` किसी भी समय किसी भी विषय में भूल हो जाना स्वाभाविक है या यूं कहिये कि यह मानव स्वभाव है | जीवन में नैतिक या अनैतिक किसी भी प्रकार की भूलों का प्रायश्चित करने के लिए हमारे महर्षियों ने व्रत विधान बतलाये हैं | इसी क्रम में भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को "ऋषि पंचमी" का व्रत करने का मार्गदर्शन हमें सनातन शास्त्रों से मिलता है | "ऋषि पंचमी" के व्रत में निर्जल रह कर के अरुंधति के सहित सप्तर्षियों का पूजन किया जाता है | यह पूजन करने की आवश्यकता क्यों पड़ी इसकी बड़ी रोचक कथा हमारे पुराणों में प्राप्त होती है | देवराज इंद्र ने वृत्तासुर का वघ किया जिसके कारण उनको ब्रह्म हत्या का दोष लग गया | विकट वेष बनाकर के ब्रह्म हत्या इन्द्र के पीछे पीछे घूमने लगी | ऐसी स्थिति में देवराज इंद्र सरोवर के जल में छुप गये एवं पृथ्वी के राजा "नहूष" इंद्र पद पर सुशोभित हुए | ब्रह्म हत्या से पीड़ित हो करके इंद्र ब्रह्मा जी के पास गए | ब्रह्मा जी ने ब्रह्म हत्या को चार भागों में बांट दिया | प्रथम भाग अग्नि को दिया | द्वितीय भाग वृक्षों को दे दिया | तीसरा भाग ब्रह्मा जी ने नदियों को दिया और बचा हुआ चौथा भाग स्त्रियों को दे दिया | इन चारों ने ब्रह्मा जी के आदेशानुसार ब्रह्महत्या तो अपने सिर पर ले ली परंतु इसका दोष कम करने का उपाय भी पूछा | तब ब्रह्मा जी ने इन चारों को वरदान भी दिया कि :--- यदि प्रज्ज्वलित हुई पवित्र अग्नि में कोई हविष्यान्न के अतिरिक्त अन्य सामग्री डालता है तो उसे ब्रह्महत्या का दोष लगेगा | वृक्षों को वरदान दिया कि पूर्णिमा, अमावस्या संक्रान्ति या अन्य धार्मिक पर्वों पर यदि कोई तुम्हारा छेदन भेदन करता है उस को ब्रह्महत्या का पाप लगेगा | नदियों को वरदान दिया यदि तुम्हारे जल के अंदर कोई मल मूत्र का त्याग करता है या कोई तुम्हारे अंदर थूकता है तो वह ब्रह्म हत्या का दोषी होगा | वहीं स्त्रियों को वरदान दिया कि ब्रह्म हत्या का दोस्त उस मनुष्य को लगेगा जो रजस्वला स्त्री को स्पर्श करेगा या उनके साथ मैथुन करने का प्रयास करेगा | इस प्रकार चार भागों में विभक्त ब्रह्महत्या ने इन्द्र का पीछा छोड़ दिया | अनजाने में कोई उपरोक्त कार्य करता है उसके दोष का शमन करने के लिए "ऋषि पंचमी" का व्रत रखा जाना अनिवार्य है |* *आज हमारी स्थिति यह हो गई है कि हम अपने ही मान्यताओं / पर्वों से अनभिज्ञ होते जा रहे हैं | क्योंकि हम आज अपने धर्मग्रंथों का, शास्त्रों का , पुराणों का अध्ययन नहीं करना चाहते | इन बातों के विषय में बताने वाले अपने बुजुर्गों का भी हमने त्याग कर दिया है | बुजुर्ग समय-समय पर हमको इन वर्जनाओं के विषय में बता करके सावधान किया करते थे , और भूल हो जाने पर उनका परिहार भी बताया करते थे | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" यह कब सकता हूँ कि आज एकल परिवार के चलन ने बुजुर्गों को हमसे दूर कर दिया , और अपनी व्यस्तताओं के कारण ग्रंथ हमसे अपने आप दूर होते चले जा रहे हैं | साथ ही साथ कहीं ना कहीं से हमारी श्रद्धा एवं विश्वास भी विचलित हुआ है | यही कारण है कि आज लोग जब हमसे हमारे धर्म के विषय में कोई चुटीला प्रश्न कर देते हैं तो हम उनका मुंह देखने के अलावा और कुछ नहीं कर पाते क्योंकि हमने अपने ग्रंथों का अध्ययन नहीं किया है , हमने अपनी संस्कृति को जानने का प्रयास नहीं किया है , इसीलिए हम वहां दोषी बन करके और विरोधियों की हंसी का पात्र बन कर के लौटने को मजबूर हो जाते हैं | नहीं ज्यादा तो कम से कम हमें अपने पर्वो , अपने त्योहारों एवं धार्मिक तिथियों के विषय में ज्ञान तो होना ही चाहिए , नहीं तो हम आने वाले दिनों में कुछ भी जानने के योग्य नहीं रह जाएंगे |* *प्रत्येक मनुष्य को २४ घंटे में कुछ समय निकालकर अपने धर्म ग्रंथों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए ! जिससे कि हम अपनी संस्कृति के विषय में ज्ञानार्जन कर सकें |*

अगला लेख: नारी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
08 सितम्बर 2018
*सम्पूर्ण विश्व में हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया जाने वाला छ: दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव "जन्माष्टमी" आज भगवान की छठी मनाने के साथ पूर्णता को प्राप्त करेगा | मनुष्य जीवन जन्म लेने की छठवें दिन मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष महत्व रखता है | भादों की अंधियारी रात में अष्टमी तिथि को कारागार में जन्म ल
08 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
*सनातन काल से हमारे समाज के सृजन में परिवार के बुजुर्गों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है | हमारे ज्येष्ठ एवं श्रेष्ठ बुजुर्ग सदैव से हमारे मार्गदर्शक रहे हैं चाहे वे शिक्षित रहे हों या अशिक्षित | बुजुर्ग यदि अशिक्षित भी रहे हों तब भी उनके पास अपने जीवन के खट्टे - मीठे इतने अनुभव होते हैं कि वे उन अनुभ
04 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धरती पर मनुष्य का प्रसन्न होना एक मानसिक दशा है | प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए धन - ऐश्वर्य का होना आवश्यक नहीं है | प्राय: देखा जाता है कि मध्यमवर्गीय लोग धनी लोगों से कहीं अधिक प्रसन्न रहते हैं , अपने परिवार व मित्रों के बीच उनके खुशी के ठहाके सुने जा सकते हैं | प्रसन्न रहने का रहस्य यही है क
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस सकल सृष्टि में उत्पन्न चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ , इस सम्पूर्ण सृष्टि के शासक / पालक ईश्वर का युवराज मनुष्य अपने अलख निरंजन सत चित आनंग स्वरूप को भूलकर स्वयं ही याचक बन बैठा है | स्वयं को दीन हीन व दुर्बल दर्शाने वाला मनुष्य उस अविनाशी ईश्वर का अंश होने के कारण आत्मा रूप में अजर अमर अव
03 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का अवतार पूर्णावतार कहा जाता है क्योंकि वे १६ कलाओं से युक्त थे | "अवतार किसे कहते हैं यह जानना परम आवश्यक है | चराचर के प्रत्येक जड़ - चेतन में कुछ न कुछ कला अवश्य होती है | पत्थरों में एक कला होती है दो कला जल में पाई जाती है | अग्नि में तीन कलायें पाई जाती हैं तो वायु में चार क
04 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*ईश्वर ने सृष्टि की सुंदर रचना की, जीवों को उत्पन्न किया | फिर नर-नारी का जोड़ा बनाकर सृष्टि को मैथुनी सृष्टि में परिवर्तित किया | सदैव से पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली नारी समय समय पर उपेक्षा का शिकार होती रही है | और इस समाज को पुरुषप्रधान समाज की संज्ञा दी जाती रही है | जबकि यह न तो सत्य
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*मानव जीवन में गुरु का कितना महत्त्व है यह आज किसी से छुपा नहीं है | सनातन काल से गुरुसत्ता ने शिष्यों का परिमार्जन करके उन्हें उच्चकोटि का विद्वान बनाया है | शिष्यों ने भी गुरु परम्परा का निर्वाह करते हुए धर्मध्वजा फहराने का कार्य किया है | इतिहास में अनेकों कथायें मिलती हैं जहाँ परिवार / समाज से उ
03 सितम्बर 2018
02 सितम्बर 2018
नई दिल्ली। पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर रामेश्वरम में कलाम के मैमोरियल का उद्घाटन किया था। रामेश्वरम वही जगह है जिसे हिंदू धर्म के चार धामों में से एक माना जाता है।रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है। यह तमिलनाडु के राम
02 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का अवतार पूर्णावतार कहा जाता है क्योंकि वे १६ कलाओं से युक्त थे | "अवतार किसे कहते हैं यह जानना परम आवश्यक है | चराचर के प्रत्येक जड़ - चेतन में कुछ न कुछ कला अवश्य होती है | पत्थरों में एक कला होती है दो कला जल में पाई जाती है | अग्नि में तीन कलायें पाई जाती हैं तो वायु में चार क
04 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं , इन अवतारों में मुख्य एवं प्रचलित श्री राम एवं श्री कृष्णावतार माना जाता है | भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से युक्त पूर्णावतार लेकर इस धराधाम पर अवतीर्ण होकर अनेकों लीलायें करते हुए भी योगेश्वर कहलाये | भगवान श्री कृष्ण के पूर्णावतार का रहस्य समझने का प्रय
03 सितम्बर 2018
07 सितम्बर 2018
अखंड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला व्रत हरितालिका तीज 12 सितंबर को है। भाद्र शुक्ल तृतीया बुधा के चित्रा नक्षत्र को तीज व्रत रखा जाता है, जिसमें महिलाएं पतियों के सुख- सौभाग्य, निरोग्यता के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं। आचार्य राजनाथ झा बताते हैं कि इस बार सुबह से ही यह
07 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का नाम मस्तिष्क में आने पर एक बहुआयामी पूर्ण व्यक्तित्व की छवि मन मस्तिष्क पर उभर आती है | जिन्होंने प्रकट होते ही अपनी पूर्णता का आभास वसुदेव एवं देवकी को करा दिया | प्राकट्य के बाद वसुदेव जो को प्रेरित करके स्वयं को गोकुल पहुँचाने का उद्योग करना | परमात्मा पूर्ण होता है अपनी शक्त
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x