ऋषि पंचमी :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

14 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (112 बार पढ़ा जा चुका है)

ऋषि पंचमी :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है | परंतु मनुष्य को गलतियों का पुतला भी कहा गया है ` किसी भी समय किसी भी विषय में भूल हो जाना स्वाभाविक है या यूं कहिये कि यह मानव स्वभाव है | जीवन में नैतिक या अनैतिक किसी भी प्रकार की भूलों का प्रायश्चित करने के लिए हमारे महर्षियों ने व्रत विधान बतलाये हैं | इसी क्रम में भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को "ऋषि पंचमी" का व्रत करने का मार्गदर्शन हमें सनातन शास्त्रों से मिलता है | "ऋषि पंचमी" के व्रत में निर्जल रह कर के अरुंधति के सहित सप्तर्षियों का पूजन किया जाता है | यह पूजन करने की आवश्यकता क्यों पड़ी इसकी बड़ी रोचक कथा हमारे पुराणों में प्राप्त होती है | देवराज इंद्र ने वृत्तासुर का वघ किया जिसके कारण उनको ब्रह्म हत्या का दोष लग गया | विकट वेष बनाकर के ब्रह्म हत्या इन्द्र के पीछे पीछे घूमने लगी | ऐसी स्थिति में देवराज इंद्र सरोवर के जल में छुप गये एवं पृथ्वी के राजा "नहूष" इंद्र पद पर सुशोभित हुए | ब्रह्म हत्या से पीड़ित हो करके इंद्र ब्रह्मा जी के पास गए | ब्रह्मा जी ने ब्रह्म हत्या को चार भागों में बांट दिया | प्रथम भाग अग्नि को दिया | द्वितीय भाग वृक्षों को दे दिया | तीसरा भाग ब्रह्मा जी ने नदियों को दिया और बचा हुआ चौथा भाग स्त्रियों को दे दिया | इन चारों ने ब्रह्मा जी के आदेशानुसार ब्रह्महत्या तो अपने सिर पर ले ली परंतु इसका दोष कम करने का उपाय भी पूछा | तब ब्रह्मा जी ने इन चारों को वरदान भी दिया कि :--- यदि प्रज्ज्वलित हुई पवित्र अग्नि में कोई हविष्यान्न के अतिरिक्त अन्य सामग्री डालता है तो उसे ब्रह्महत्या का दोष लगेगा | वृक्षों को वरदान दिया कि पूर्णिमा, अमावस्या संक्रान्ति या अन्य धार्मिक पर्वों पर यदि कोई तुम्हारा छेदन भेदन करता है उस को ब्रह्महत्या का पाप लगेगा | नदियों को वरदान दिया यदि तुम्हारे जल के अंदर कोई मल मूत्र का त्याग करता है या कोई तुम्हारे अंदर थूकता है तो वह ब्रह्म हत्या का दोषी होगा | वहीं स्त्रियों को वरदान दिया कि ब्रह्म हत्या का दोस्त उस मनुष्य को लगेगा जो रजस्वला स्त्री को स्पर्श करेगा या उनके साथ मैथुन करने का प्रयास करेगा | इस प्रकार चार भागों में विभक्त ब्रह्महत्या ने इन्द्र का पीछा छोड़ दिया | अनजाने में कोई उपरोक्त कार्य करता है उसके दोष का शमन करने के लिए "ऋषि पंचमी" का व्रत रखा जाना अनिवार्य है |* *आज हमारी स्थिति यह हो गई है कि हम अपने ही मान्यताओं / पर्वों से अनभिज्ञ होते जा रहे हैं | क्योंकि हम आज अपने धर्मग्रंथों का, शास्त्रों का , पुराणों का अध्ययन नहीं करना चाहते | इन बातों के विषय में बताने वाले अपने बुजुर्गों का भी हमने त्याग कर दिया है | बुजुर्ग समय-समय पर हमको इन वर्जनाओं के विषय में बता करके सावधान किया करते थे , और भूल हो जाने पर उनका परिहार भी बताया करते थे | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" यह कब सकता हूँ कि आज एकल परिवार के चलन ने बुजुर्गों को हमसे दूर कर दिया , और अपनी व्यस्तताओं के कारण ग्रंथ हमसे अपने आप दूर होते चले जा रहे हैं | साथ ही साथ कहीं ना कहीं से हमारी श्रद्धा एवं विश्वास भी विचलित हुआ है | यही कारण है कि आज लोग जब हमसे हमारे धर्म के विषय में कोई चुटीला प्रश्न कर देते हैं तो हम उनका मुंह देखने के अलावा और कुछ नहीं कर पाते क्योंकि हमने अपने ग्रंथों का अध्ययन नहीं किया है , हमने अपनी संस्कृति को जानने का प्रयास नहीं किया है , इसीलिए हम वहां दोषी बन करके और विरोधियों की हंसी का पात्र बन कर के लौटने को मजबूर हो जाते हैं | नहीं ज्यादा तो कम से कम हमें अपने पर्वो , अपने त्योहारों एवं धार्मिक तिथियों के विषय में ज्ञान तो होना ही चाहिए , नहीं तो हम आने वाले दिनों में कुछ भी जानने के योग्य नहीं रह जाएंगे |* *प्रत्येक मनुष्य को २४ घंटे में कुछ समय निकालकर अपने धर्म ग्रंथों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए ! जिससे कि हम अपनी संस्कृति के विषय में ज्ञानार्जन कर सकें |*

अगला लेख: नारी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
03 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का नाम मस्तिष्क में आने पर एक बहुआयामी पूर्ण व्यक्तित्व की छवि मन मस्तिष्क पर उभर आती है | जिन्होंने प्रकट होते ही अपनी पूर्णता का आभास वसुदेव एवं देवकी को करा दिया | प्राकट्य के बाद वसुदेव जो को प्रेरित करके स्वयं को गोकुल पहुँचाने का उद्योग करना | परमात्मा पूर्ण होता है अपनी शक्त
03 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का अवतार पूर्णावतार कहा जाता है क्योंकि वे १६ कलाओं से युक्त थे | "अवतार किसे कहते हैं यह जानना परम आवश्यक है | चराचर के प्रत्येक जड़ - चेतन में कुछ न कुछ कला अवश्य होती है | पत्थरों में एक कला होती है दो कला जल में पाई जाती है | अग्नि में तीन कलायें पाई जाती हैं तो वायु में चार क
04 सितम्बर 2018
02 सितम्बर 2018
नई दिल्ली। पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर रामेश्वरम में कलाम के मैमोरियल का उद्घाटन किया था। रामेश्वरम वही जगह है जिसे हिंदू धर्म के चार धामों में से एक माना जाता है।रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है। यह तमिलनाडु के राम
02 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*मानव जीवन में गुरु का कितना महत्त्व है यह आज किसी से छुपा नहीं है | सनातन काल से गुरुसत्ता ने शिष्यों का परिमार्जन करके उन्हें उच्चकोटि का विद्वान बनाया है | शिष्यों ने भी गुरु परम्परा का निर्वाह करते हुए धर्मध्वजा फहराने का कार्य किया है | इतिहास में अनेकों कथायें मिलती हैं जहाँ परिवार / समाज से उ
03 सितम्बर 2018
10 सितम्बर 2018
रांची। झारखंड की राजधानी रांची से करीब 80 किलोमीटर दूर रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिके मंदिर शक्तिपीठ के रूप में काफी विख्यात है। यहां भक्त बिना सिर वाली देवी मां की पूजा करते हैं और मानते हैं कि मां उन भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। मान्यता है कि असम स्थित मां कामाख
10 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*संसार में मनुष्य एक अलौकिक प्राणी है | मनुष्य ने वैसे तो आदिकाल से लेकर वर्तमान तक अनेकों प्रकार के अस्त्र - शस्त्रों का आविष्कार करके अपने कार्य सम्पन्न किये हैं | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा अस्त्र होता है उसका विवेक एवं बुद्धि | इस अस्त्र के होने पर मनुष्य कभी परास्त नहीं हो सकता परंतु आवश्यकता हो
03 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का अवतार पूर्णावतार कहा जाता है क्योंकि वे १६ कलाओं से युक्त थे | "अवतार किसे कहते हैं यह जानना परम आवश्यक है | चराचर के प्रत्येक जड़ - चेतन में कुछ न कुछ कला अवश्य होती है | पत्थरों में एक कला होती है दो कला जल में पाई जाती है | अग्नि में तीन कलायें पाई जाती हैं तो वायु में चार क
04 सितम्बर 2018
07 सितम्बर 2018
भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन के लिए थे। भगवान श्री कृष्ण का व्यवहारिक ज्ञान का सार आज भी उन तमाम युवाओं के प्रेरणासोत्र हैं जो इस प्रतियोगी युग में सफलता पाने की कामना रखते है।श्रीकृष्ण द्वारा दी गयी शिक्षा
07 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में त्यौहारों की कमी नहीं है | नित्य नये त्यौहार यहाँ सामाजिक एवं धार्मिक समसरता बिखेरते रहते हैं | ज्यादातर व्रत स्त्रियों के द्वारा ही किये जाते हैं | कभी भाई के लिए , कभी पति के लिए तो कभी पुत्रों के लिए | इसी क्रम में आज भाद्रपद कृष्णपक्ष की षष्ठी (छठ) को भगवान श्री कृष्णचन्द्र जी के
03 सितम्बर 2018
07 सितम्बर 2018
अखंड सौभाग्य के लिए किया जाने वाला व्रत हरितालिका तीज 12 सितंबर को है। भाद्र शुक्ल तृतीया बुधा के चित्रा नक्षत्र को तीज व्रत रखा जाता है, जिसमें महिलाएं पतियों के सुख- सौभाग्य, निरोग्यता के लिए माता गौरी की पूजा करती हैं। आचार्य राजनाथ झा बताते हैं कि इस बार सुबह से ही यह
07 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
!! भगवत्कृपा हि के वलम् !! *भगवान श्री कृष्ण का चरित्र इतना अलौकिक है कि इसको जितना ही जानने का प्रयास किया जाय उतने ही रहस्य गहराते जाते हैं , इन रहस्यों को जानने के लिए अब तक कई महापुरुषों ने प्रयास तक किया परंतु थोड़ा सा समझ लेने के बाद वे भी आगे समझ पाने की स्थिति में ही नहीं रह गये क्
04 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवतिभारत ! अभियुत्थानं अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ! परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ! धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे - युगे !! भगवान श्री कृष्ण एक अद्भुत , अलौकिक दिव्य जीवन चरित्र | जो सभी अवतारों में एक ऐसे अवतार थे जिन्होंने यह घोषणा की कि मैं परमात्मा हूँ
03 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
!! भगवत्कृपा हि के वलम् !! *भगवान श्री कृष्ण का चरित्र इतना अलौकिक है कि इसको जितना ही जानने का प्रयास किया जाय उतने ही रहस्य गहराते जाते हैं , इन रहस्यों को जानने के लिए अब तक कई महापुरुषों ने प्रयास तक किया परंतु थोड़ा सा समझ लेने के बाद वे भी आगे समझ पाने की स्थिति में ही नहीं रह गये क्
04 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x