हिन्दी दिवस:----- आचार्य अर्जुन तिवारी

15 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (70 बार पढ़ा जा चुका है)

हिन्दी दिवस:----- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

*हम जिस देश में निवास करते हैं उसका नाम भारत तो है ही साथ ही इसे आर्यावर्त एवं हिन्दुस्थान भी कहा जाता है | आम जनमानस में एक सूक्ति प्रचलित है "हिन्दू हिन्दी हिन्दुस्तान | इसका अर्थ यह हुआ कि जिस देश में हिन्दू एवं हिन्दी का वर्चस्व रहा हो वही देश है "हिन्दुस्तान" | हिन्दी मुख्यरूप से हिन्दुस्तान में रहने वालों को कहा गया है | परंतु इसके अतिरिक्त हमारी मातृभाषा भी "हिन्दी" ही है | भारतीय संविधान में हिन्दी को राष्ट्रभाषा एवं देवनागरी को लिपि माना गया है | अनेक राज्य एवं भिन्न - भिन्न भाषाओं के होते हुए भी हिन्दी को राष्ट्रभाषा होने का गौरव प्राप्त है | परंतु आज हिन्दी की हालत यह हो गयी है कि हमें हिन्दी को स्मरण करने के लिए "हिन्दी दिवस" मनाने की आवश्यकता पड़ रही है | जहाँ विश्व के अनेक देश हिन्दी भाषा एवं उसकी संस्कृति सीखने को लालायित दिख रहे हैं वहीं हम हिन्दुस्तानी हिन्दी को भूलकर विदेशी भाषा में बात करना अपना गौरव समझने लगे हैं यही हिन्दी का दुर्भाग्य बन गया है | किसी समय विदेशियों ने हमारी मातृभाषा को छिन्न भिन्न करने का कार्य किया था परंतु आज हम स्वयं वह कार्य कर रहे हैं | प्राईमरी पाठशाला में बच्चों को भेजना हमारे सम्मान के विपरीत एवं कॉन्वेन्ट स्कूलों में पढने वाला सम्मानित माना जाता है | यह सत्य है कि युग के अनुसार शिक्षा प्राप्त करना आवश्यक है परंतु अपनी मातृभाषा का ज्ञान होना भी परमावश्यक है | क्योंकि यदि आपको अपने देश , अपनी संस्कृति के विषय में जानने की उत्कण्ठा है तो अपनी मातृभाषा "हिन्दी" का ज्ञानार्जन करना पड़ेगा |* *आज पाश्चात्य संस्कृति के विस्तृत प्रभाव एवं आधुनिकता के चलते हम अपनी ही भाषा एवं संस्कृति को भूलने का असफल प्रयास कर रहे हैं | आज हमारी नयी पीढी का हालत यह हो गयी है कि डिग्रियाँ लेकर बैठे हैं परंतु रामचरितमानस का पाठ नहीं कर पाते हैं | कुछ लोग कहते हैं कि अंग्रेजी पढना एवं समझना बहुत कठिन है इसलिए बच्चों को उस पर ज्यादा मेहनत करवाते हैं | परंतु मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि हमारी हिन्दी से सरल एवं कठिन कोई भाषा ही नहीं है | आज भी अनेक हिन्दी के शब्द ऐसे हैं जिसका अर्थ सबको ज्ञात हो यह असम्भव है क्योंकि कभी जानने का प्रयास ही नहीं किया गया | हिन्दी की विशेष विशेषता यह है कि वह कभी भेदभाव नहीं करती | लगभग सभी प्राचीन ग्रंथ संस्कृत में या तो हिन्दी में ही लिखे गये हैं | यदि हमें इनको पढकर अपने जीवन के विषय में जानना है तो हिन्दी पढना पड़ेगा | जिसकी वर्णमाला अ से प्रारम्भ होकर ज्ञ पर समाप्त होती हो वह है हिन्दी | एक अनपढ व अज्ञानी जब (अ से प्रारम्भ करके) हिन्दी को आत्मसात करना प्रारम्भ कर देता है तो यह ऐसी भाषा है कि उसे (ज्ञ) ज्ञानी बना देती है | ऐसी विशेषता आपको विश्व की किसी भी भाषा में नहीं मिलेगी |* *तथाकथित "हिन्दी दिवस पर यही कहना चाहूँगा कि संसार की सभी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करके भी अपनी मातृभाषा हिन्दी को भूलने की भूल न करें |*

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