नक्षत्र - एक विश्लेषण

15 सितम्बर 2018   |  डॉ पूर्णिमा शर्मा   (91 बार पढ़ा जा चुका है)

नक्षत्र - एक विश्लेषण

मुहूर्त गणना, प्रश्न तथा अन्य भी आवश्यक ज्योतिषीय गणनाओं के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले पञ्चांग के आवश्यक अंग नक्षत्रों के नामों की व्युत्पत्ति और उनके अर्थ तथा पर्यायवाची शब्दों पर चर्चा के क्रम में अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिर, आर्द्रा, पुनर्वसु तथा पुष्य नक्षत्रों के नामों पर बात करने के पश्चात अब चर्चा करते हैं आश्लेषा और मघा नक्षत्रों के नामों की निष्पत्ति तथा इनके अर्थ के विषय में |

आश्लेषा

श्लिष् में आ उपसर्ग लगाकर आश्लेषा शब्द की निष्पत्ति हुई है | इस नक्षत्र में पाँच तारे होते हैं | आश्लिष् शब्द का अर्थ है किसी को आलिंगन में बाँधना अथवा किसी की परिक्रमा करना | किसी से सम्पर्क स्थापित करने के अर्थ में भी आश्लिष शब्द का प्रयोग किया जाता है | इसके अतिरिक्त यह केतु का जन्म नक्षत्र भी है | इसीलिए केतु का एक नाम आश्लेषज भी है | सर्प के जितने भी नामा अथवा पर्याय हैं वे सभी आश्लेषा के भी पर्याय है – जैसे सर्प, उरग, भुजंग, अहि – ये सभी सर्प के पर्याय होने के कारण आश्लेषा के भी पर्याय हैं | घुमक्कड़ व्यक्ति को भी आश्लिष् कहा जाता है | वृत्तासुर का भी एक नाम आश्लिष् उपलब्ध होता है | एक विषैली वनस्पति भी आश्लिष् कहलाती है – सम्भवतः विषैली होने के कारण ही इसे आश्लिष कहा जाता होगा – क्योंकि आश्लिष सर्प का पर्याय है और सर्प विषैला होता है | किसी को धोखा देने के अर्थ में भी इस शब्द का प्रयोग करते हैं | किसी वस्तु का भोग करने तथा आनन्द करने के लिया भी आश्लिष शब्द का प्रयोग किया जाता है | इसके अतिरिक्त कष्ट उठाने के लिए अथवा अनुभव करने के लिए भी इस शब्द का प्रयोग होता है | क़ीमती, वैभवपूर्ण, धनवान, नृपसदृश, राजा, किसी गाँव अथवा क़बीले का मुखिया भी आश्लिष् या आश्लेष कहलाते हैं | यह नक्षत्र जनवरी फरवरी के मध्य माघ माह में आता है |

मघा

आश्लेषा की ही भाँति मघा नक्षत्र में भी पाँच तारे होते हैं | मघा का शाब्दिक अर्थ होता है समस्त प्रकार की सुख सुविधाएँ, पुरूस्कार, उपहार, समस्त प्रकार की धन सम्पदा इत्यादि | एक प्रकार की औषधीय वनस्पति तथा एक पुष्प भी मघा कहलाता है | मघा को शुक्र का जन्म नक्षत्र माना जाता है | इसी कारण से शुक्र का एक नाम मघाभव भी है | आश्लेषा की ही भाँति यह नक्षत्र भी जनवरी-फरवरी के मध्य माघ माह में आता है | इस नक्षत्र का अन्य नाम है प्रीति | साथ ही माता पिता तथा दादा, परदादा आदि के लिए भी इस शब्द का प्रयोग किया जाता है |

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