लोलार्क षष्ठी का सत्य :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

15 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (114 बार पढ़ा जा चुका है)

लोलार्क षष्ठी का सत्य :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म एवं उसकी मान्यतायें इतनी वृहद एवं विस्तृत हैं कि इनका जोड़ सम्पूर्ण विश्व में कहीं नहीं मिलेगा | सम्पूर्ण विश्व ने कभी न कभी , किसी न किसी रूप में हमारे देश की संस्कृति से कुछ न कुछ शिक्षा अवश्य ग्रहण की है | बस अंतर यह है कि उन्होंने उन मान्यताओं को स्वीकार करके प्रगति की तो हम अपनी ही मान्यताओं को भूलते जा रहे हैं | हमारा देश भारत यदि यह कहा जाय कि एक चमत्कारिक देश है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं कही जा सकती | यहाँ जो कार्य वैज्ञानिक एवं चिकित्सक नहीं कर पाते उनका समाधान आपको सनातन की मान्यताओं में अवश्य मिल जायेंगे | अनेक रहस्य , अनेक बीमारियां , जिनका चिकित्सा जगत में कोई ईलाज नहीं है उसका ईलाज सनातन पद्धति में अवश्य मिल जायेगा , और लाखों लोग इसका लाभ उठा रहे हैं | इसी प्रकार एक अनूठा रहस्य अपने आप में छुपाये हुए है बनारस का "लोलार्क कुण्ड" | यह संसार का ऐसा इकलौता कुण्ड है जिसने अनेकों घरों को कुलदीपक प्रदान किया है | यहाँ की मान्यताओं के अनुसार आज अर्थात भाद्रपद शुक्लपक्ष की षष्ठी (लोलार्क षष्ठी) को यहाँ नि:संतान दम्पति आकर स्नान करके पुत्रवान होते रहे हैं | लोलार्क षष्ठी के दिन यहाँ स्नान करके वस्त्र उसी कुण्ड में छोड़ देने की मान्यता के साथ ही कोई एक सब्जी भी चढाई जाती है जिसका त्याग व्रती तब तक किये रहता है जब तक उसकी कामना (पुत्रप्राप्ति) पूरी नहीं हो जाती | लोलार्क षष्ठी का व्रत करके उस कुण्ड में नियमपूर्वक स्नान करने वाले दम्पति आज तक निराश नहीं हुए हैं |* *आज के युग को वैज्ञानिक युग कहा जाता है | आज विज्ञान ने अनेकानेक रहस्यमयी अनुसंधान भी कर लिए हैं , परंतु कहीं कहीं विज्ञान एवं वैज्ञानिक असहाय हो जाता है | सनातन वैदिक युग के अनेक रहस्य आज तक रहस्य ही बने हुए हैं , जिसका कोई जबाब आज तक विज्ञान भी नहीं दे पाया है | सनातन धर्म स्वयं वैज्ञानिकता से ओत प्रोत एवं परिपूर्ण है | जो अनुसंधान वैज्ञानिक इतने संसाधनों को लेकर अब कर रहे हैं वही अनुसंधान हमारे ऋषियों - महर्षियों ने बिना किसी संसाधन के कर लिये थे , जिनको मानने के लिए आज विज्ञान भी विवश है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" कहना चाहूँगा कि हमारी सनातन मान्यतायें फलित होती हैं श्रद्धा एवं विश्वास पर | आज विज्ञान एवं चिकित्सा जगत जिन माताओं को पुत्र का सुख नहीं दे पा रहा है उसे लोलार्क कुण्ड में स्नान करने मात्र से मातृत्व सुख प्राप्त हो रहा है | कमी हमारी है कि हम अपनी मान्यताओं को भूलकर दूसरों की ओर आशाभरी दृष्टि से देख रहे हैं | इस सकल सृष्टि में ऐसा कोई रोग नहीं है जिसकी चिकित्सा सनातनी ग्रंथों न प्राप्त हो | विचार कीजिए कि क्या जब विज्ञान ने प्रगति नहीं की थी तब चिकित्सा का स्रोत क्या था ? उत्तर यही मिलेगा कि हमारे वेदों से ही उद्धृत आयुर्वेद |* *हम स्वयं को , स्वयं की पहचान को भूल गये हैं | आधुनिकता के चकाचौंध में पुरातन संस्कृति को भूल गये है | इस आधुनिक युग में लोलार्क जैसे कई कुण्ड अपना कार्य कर रहे हैं |*

अगला लेख: नारी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
03 सितम्बर 2018
*इस संसार में समाज के प्रमुख स्‍तम्‍भ स्त्री और पुरुष हैं | स्त्री और पुरुष का प्रथम सम्‍बंध पति और पत्‍नी का है, इनके आपसी संसर्ग से सन्‍तानोत्‍प‍त्ति होती है और परिवार बनता है | कई परिवार को मिलाकर समाज और उस समाज का एक मुखिया होता था जिसके कुशल नेतृत्व में वह समाज विकास करता जाता था | इस विकास
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*भगवान श्री कृष्ण का नाम मस्तिष्क में आने पर एक बहुआयामी पूर्ण व्यक्तित्व की छवि मन मस्तिष्क पर उभर आती है | जिन्होंने प्रकट होते ही अपनी पूर्णता का आभास वसुदेव एवं देवकी को करा दिया | प्राकट्य के बाद वसुदेव जो को प्रेरित करके स्वयं को गोकुल पहुँचाने का उद्योग करना | परमात्मा पूर्ण होता है अपनी शक्त
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस धरती पर मनुष्य का प्रसन्न होना एक मानसिक दशा है | प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए धन - ऐश्वर्य का होना आवश्यक नहीं है | प्राय: देखा जाता है कि मध्यमवर्गीय लोग धनी लोगों से कहीं अधिक प्रसन्न रहते हैं , अपने परिवार व मित्रों के बीच उनके खुशी के ठहाके सुने जा सकते हैं | प्रसन्न रहने का रहस्य यही है क
03 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*इस सकल सृष्टि में उत्पन्न चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ , इस सम्पूर्ण सृष्टि के शासक / पालक ईश्वर का युवराज मनुष्य अपने अलख निरंजन सत चित आनंग स्वरूप को भूलकर स्वयं ही याचक बन बैठा है | स्वयं को दीन हीन व दुर्बल दर्शाने वाला मनुष्य उस अविनाशी ईश्वर का अंश होने के कारण आत्मा रूप में अजर अमर अव
03 सितम्बर 2018
17 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म इतना वृहद है कि नित्य किसी न किसी पर्व का एक नया दिन होता है | आज भाद्रपद शुक्लपक्ष की अष्टमी को त्याग की प्रतिमूर्ति महर्षि दधीचि का अवतरण दिवस , प्रेम की प्रतिमूर्ति रासरासेश्वरी राधिका जू का अवतरण दिवस होने के साथ आज ही सृष्टि का सृजन एवं निर्माण करने वाले "भगवान विश्वकर्मा का पूजन" (
17 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में त्यौहारों की कमी नहीं है | नित्य नये त्यौहार यहाँ सामाजिक एवं धार्मिक समसरता बिखेरते रहते हैं | ज्यादातर व्रत स्त्रियों के द्वारा ही किये जाते हैं | कभी भाई के लिए , कभी पति के लिए तो कभी पुत्रों के लिए | इसी क्रम में आज भाद्रपद कृष्णपक्ष की षष्ठी (छठ) को भगवान श्री कृष्णचन्द्र जी के
03 सितम्बर 2018
20 सितम्बर 2018
*सकल सृष्टि में ईश्वर ने मनुष्य को सभी अधिकार दे रखे हैंं | जैसी इच्छा हो वैसा कार्य करें यह मनुष्य के हाथ में है | इतना सब कुछ देने के बाद भी परमात्मा ने कुछ अधिकार अपने हाथ में ले रखे हैं | कर्मानुसार भोग करना मनुष्य की मजबूरी है | जिसने जैसा कर्म किया है , जिसके भाग्य में जैसा लिखा है वह उसको भोग
20 सितम्बर 2018
03 सितम्बर 2018
*ईश्वर ने सृष्टि की सुंदर रचना की, जीवों को उत्पन्न किया | फिर नर-नारी का जोड़ा बनाकर सृष्टि को मैथुनी सृष्टि में परिवर्तित किया | सदैव से पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली नारी समय समय पर उपेक्षा का शिकार होती रही है | और इस समाज को पुरुषप्रधान समाज की संज्ञा दी जाती रही है | जबकि यह न तो सत्य
03 सितम्बर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x