उसने कभी निराश नहीं किया

17 सितम्बर 2018   |  विजय कुमार तिवारी   (86 बार पढ़ा जा चुका है)

"उसने कभी निराश नहीं किया" एक ऐसी कहानी है जो हम सभी को आस्था से जोड़ती है।मेरी कुछ मान्यतायें हैं और शायद आप में से बहुतों की भी होंगी कि ईश्वर हर पल हमारी मदद करता है।हमें क्या करना है? हमें ईश्वर पर विश्वास करना है। हमें कर्म करना है। ध्यान रखना है कि हमारा कर्म किसी के दुख का कारण तो नहीं। ईश्वर से माँगने की जरुरत नहीं है। वह हमारी हर स्थिति-परिस्थिति को जानता है और उतनी सहायता जरुर करता है जिससे हमारा कल्याण होता है। उसकी सहायता सही समय पर और उचित मात्रा में मिलती है,ना कम,ना ज्यादा। व्यवहार में ही नहीं,विचार और मानसिक स्तर पर भी हमें साफ-सुथरा रहना होगा। जितनी मात्रा में हम अपनी सफाई करते जायेंगें,सुधरते जायेंगे उतनी मात्रा में उसकी कृपा मिलती जायेगी और हमारा जीवन सुखी होता जायेगा।

"उसने कभी निराश नही किया" शीघ्र ही आप सभी को पधढ़ने को मिलेगी। उम्मीद है कि यह कथा आपके मन में ईश्वर-प्रेम और विश्वास का बीज बोयेगी। शुभकामनाओं सहित

विजय कुमार तिवारी

17/09/2018

अगला लेख: उसने कभी निराश नही किया -3



रेणु
23 सितम्बर 2018

प्रतीक्षा है कहानी की आदरणीय |

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
23 सितम्बर 2018
आत्मा से आत्मा का मिलनविजय कुमार तिवारीभोर में जागने के बाद घर का दरवाजा खोल देना चाहिए। ऐसी धारणा परम्परा से चली आ रही है और हम सभी ऐसा करते हैं। मान्यता है कि भोर-भोर में देव-शक्तियाँ भ्रमण करती हैं और सभी के घरों में सुख-ऐश्वर्य दे जाती हैं। कभी-कभी देवात्मायें नाना र
23 सितम्बर 2018
28 सितम्बर 2018
तु
कवितातुम खुश होविजय कुमार तिवारीआदिम काल में तुम्हीं शिकार करती थी,भालुओं का,हिंस्र जानवरों का और कबीले के पुरुषों का,बच्चों से वात्सल्य और जवान होती लड़कियों से हास-परिहासतुम्हारी इंसानियत के पहलू थे। तुम्हारी सत्ता के अधीन, पुरुष ललचाई निगाहों से देखता था,तुम्हारे फेंके गये टुकड़ों पर जिन्दा थाऔर
28 सितम्बर 2018
23 सितम्बर 2018
आत्मा से आत्मा का मिलनविजय कुमार तिवारीभोर में जागने के बाद घर का दरवाजा खोल देना चाहिए। ऐसी धारणा परम्परा से चली आ रही है और हम सभी ऐसा करते हैं। मान्यता है कि भोर-भोर में देव-शक्तियाँ भ्रमण करती हैं और सभी के घरों में सुख-ऐश्वर्य दे जाती हैं। कभी-कभी देवात्मायें नाना र
23 सितम्बर 2018
12 सितम्बर 2018
तु
कविता-12/12/1984तुम्हारे लिएविजय कुमार तिवारीबाट जोहती तुम्हारी निगाहें,शाम के धुँधलके का गहरापन लिए,दूर पहाड़ की ओर से आती पगडण्डी पर,अंतिम निगाह डालजब तलक लौट चुकी होंगी। उम्मीदों का आखिरी कतरा,आखिरी बूँदतुम्हारे सामने हीधूल में विलीन हो चुका होगा। आशा के संग जुड़ी,सारी आकांक्षायेंमटियामेट हो ,दम
12 सितम्बर 2018
26 सितम्बर 2018
कहानीउसने कभी निराश नहीं किया-2विजय कुमार तिवारीसौम्या शरीर से कमजोर थी परन्तु मन से बहुत मजबूत और उत्साहित। प्रवर जानता था कि ऐसे में बहुत सावधानी की जरुरत है। जरा सी भी लापरवाही परेशानी में डाल सकती है। पहले सौम्या ने अपनी अधूरी पढ़ायी पूरी की और मेहनत से आगे की तैयारी
26 सितम्बर 2018
21 सितम्बर 2018
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedContent> <w:AlwaysShowPlaceh
21 सितम्बर 2018
08 सितम्बर 2018
कल तक सवर्ण समाज के लिए 10 फीसदी आरक्षण की बात करने वाले बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने सवर्ण समाज के खिलाफ बड़ा बयान दिया है। चेतावनी भरे लहजे में मांझी ने कहा कि अगर 15 प्रतिशत वाला देश जला सकता है तो 85 प्रतिशत वाला हाथ में दही लेकर नहीं बैठा है। इसके साथ ही मां
08 सितम्बर 2018
23 सितम्बर 2018
आत्मा और पुनर्जन्मविजय कुमार तिवारी यह संसार मरणधर्मा है। जिसने जन्म लिया है,उसे एक न एक दिन मरना होगा। मृत्यु से कोई भी बच नहीं सकता। इसीलिए हर प्राणी मृत्यु से भयभीत रहता है। हमारे धर्मग्रन्थों में सौ वर्षो तक जीने की कामना की गयी है-जीवेम शरदः शतम। ईशोपनिषद में कहा गया है कि अपना कर्म करते हुए मन
23 सितम्बर 2018
26 सितम्बर 2018
आँ
कविता-20/07/1985आँखों के मोतीविजय कुमार तिवारीजब भी घुम-घाम कर लौटता हूँ,थक-थक कर चूर होता हूँ,निढ़ाल सा गिर पड़ता हूँ विस्तर में।तब वह दया भरी दृष्टि से निहारती है मुझेगतिशील हो उठता है उसका अस्तित्वऔर जागने लगता है उसका प्रेम।पढ़ता हूँ उसका चेहरा, जैसे वात्सल्य से पूर्ण,स्नेहिल होती,फेरने लगती है
26 सितम्बर 2018
26 सितम्बर 2018
कहानीउसने कभी निराश नही किया-3विजय कुमार तिवारीजिस प्रोफेसर के पथ-प्रदर्शन में शोधकार्य चल रहा था,वे बहुत ही अच्छे इंसान के साथ-साथ देश के मूर्धन्य विद्वानों में से एक थे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की निर्धारित तिथि के पूर्व शोध का प्रारुप विश्वविद्यालय मे जमा करना था। मात्र तीन दिन बचे थे।विभागाध्य
26 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x