जीवन का रहस्य --- आचार्य अर्जुन तिवारी

17 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (72 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन का रहस्य   --- आचार्य अर्जुन तिवारी

*अखिल ब्रह्माण्ड में जितने भी जड़ चेतन हैं सबमें कुछ न कुछ रहस्य छुपा हुआ है | इन रहस्यों को जानने का जितना प्रयास पूर्व में हमारे ऋषि - महर्षियों ने किया उससे कहीं अधिक आज के वैज्ञानिक कर रहे हैं , परन्तु अभी तक यह नहीं कहा जा सकता कि सारे रहस्यों से पर्दा उठ पाया हो | इन सभी चराचर जीवों में सबसे रहस्यमयी प्राणी यदि कोई है तो वह सबके रहस्यों को निरंतर खोजने वाला मनुष्य ही है | इस पृथ्वी पर सबसे रहस्यमयी प्राणी होने का गौरव मनुष्य को ही प्राप्त है | मनुष्य का जीवन इतना रहस्यमय है कि इसे आज तक कोई वैज्ञानिक तो क्या अनेक जीवन दर्शन नामक ग्रंथ लिखने वाले महापुरुष भी नहीं जान पाये हैं | मानव के विकास क्रम में इतने परिवर्तन होते हैं कि मनुष्य स्वयं भौंचक रहा करता है | इस संसार में मनुष्य बाह्य जगत में ही जीवन व्यतीत करते हुए अपने समस्त कार्य "धनबल" , "शारीरिक बल" , एवं "बुद्धिबल" से ही निष्पादित करना चाहता है | मनुष्य अपने रहस्य को स्वयं नहीं जान पाता कि इन तीनों बल के अतिरिक्त भी एक बल और है जिसे "आत्मबल" कहा जाता है | जिस मनुष्य में आत्मबल है उसके पास धनबल , बुद्धिबल एवं शारीरिक बल यदि नहीं भी है तो भी वह कभी असफल नहीं हो सकता है , परंतु मनुष्य इस रहस्य को जानने का प्रयास करता नहीं दीख रहा है |* *आज के वैज्ञानिक युग में मनुष्य ने जितनी प्रगति की है उससे अधिक वह रहस्यमयी होता जा रहा है | आज सोशल मीडिया के अनेक माध्यमों से लोग एक दूसरे जुड़े हुए हैं परंतु कौन क्या है यह रहस्य ही बना रहता है | अधिकतर मामलों में यह देखने को मिलता है कि हम किसी की सत्यता जानने के लिए आकुल - व्याकुल होकर परेशान होने लगते हैं , और इसे चर्चा का विषय बनाने का प्रयास करने लगते हैं | क्या ऐसा करना उचित है ?? मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का विचार है कि जब हम यह जानते हैं कि यहाँ जो जैसा करेगा उसको उसी प्रकार का फल भोगना है तो व्यर्थ में परेशान क्यों होते हैं | कहने का तात्पर्य यह है कि जो लहस्य बनना चाह रहा है उसकी मनोवृत्ति उसी प्रकार की हो जायेगी और वह एक दिन रहस्य बनकर गुमनामी के अंधेरों में खो जायेगा | किसी दूसपे के विषय में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करना मानव स्वभाव है , जबकि हमारे महापुरुषों ने सदैव से यही निर्देश दिया है कि मनुष्य को सर्वप्रथम यह जानने का प्रयास करना चाहिए कि मैं कौन हूँ ?? क्योंकि जिस दिन स्वयं का रहस्य समझ में आ जायेगा उसी दिन के बाद कुछ भी रहस्य शेष नहीं रह जायेगा |* *हमें दूसरों की अपेक्षा स्वयं पर ध्यान केन्द्रित करते हुए अपने कर्मपथ का अनुयायी बने रहने का प्रयास करते हुए स्वयं के रहस्य को जानने का प्रयास करना चाहिए |*

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