त्रिगुणात्मक सृष्टि :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

28 सितम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (61 बार पढ़ा जा चुका है)

त्रिगुणात्मक सृष्टि :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सृष्टि के जनक जिन्हे ईश्वर या परब्रह्म कहा जाता है वे सृष्टि में घट रही घटनाओं का श्रेय स्वयं न लेकरके किसी न किसी को माध्यम बनाते रहते हैं | परमपिता परमात्मा ने इस सृष्टि की रचना में पंचतत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका बनायी और साथ ही इस सृष्टि में तीन गुणों (सत्व , रज एवं तम) को प्रकट किया और सकल सृष्टि को त्रिगुणात्मक बना दिया | इस सकल सृष्टि में कोई भी तत्व ऐसा नहीं है जो इन त्रिगुण तत्वों से परे हो | श्रीमद्भगवद्गीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण "अर्जुन" को उपदेश देते हुए बताते हैं कि हे पार्थ :- "मनुष्य जन्म से ही इन तीनों गुणों से प्रभावित होता है क्योंति यह सृष्टि ही "त्रिगुणात्मक है | ये तीनों गुण समस्त प्राणियों में विद्यमान रहते हैं | जिस प्राणी में जिस गुण की प्रधानता हो जाती है उसका चरित्र उसी प्रकार का हो जाता है" | भगवान के इन वाक्यों से यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई भी इन तीनों गुणों से बच नहीं पाया है | मनुष्य को सदैव अपने तमोगुण (तामसी प्रवृत्ति) का हनन करके रजोगुण (राजसी प्रवृत्ति) को अपनाकर अपने अनुकूल बनाने का प्रयास करते हुए सतोगुण (सात्त्विक प्रवृत्ति) को जीवन भर के अपना लेना चाहिए | इसका दिव्य उदाहरण हमें भगवान श्री राम के जीवन चरित्र से प्राप्त होता है | विश्वामित्र जी के साथ यज्ञरक्षा करने प्रभु श्री राम को सर्वप्रथम तमोगुणी ताड़का मिलती है जिसका वध उन्होंने अविलम्ब कर दिया ! उसके बाद गौतम ऋषि के आश्रम में रजोगुणी अहिल्या को अपनी शरण में लिया ! जब तमोगुण का हनन करके रजोगुण को शरण देते हुए आगे चलते हैं तब उन्हें सतोगुणी महारानी श्री सीता जी प्राप्त होती हैं जिन्हें उन्होंने जीवन भर के लिए अपना लिया | सतोगुण (सीता जी) के ही कारण उनका यश त्रिभुवन त्रिकाल में अक्षुण्ण बना |* *आज भी ये तीनों गुण सृष्टि में विद्यमान हैं परंतु अब बड़ी कठिनता से सतोगुण के दर्शन प्राप्त होते हैं | तामसी प्रवृत्ति जो कि आलस्य , प्रमाद , क्रोध एवं नकारात्मकता प्रतट करती है आज यह अधिकाधिक देखने को मिल रही है | वहीं राजसी प्रवृत्ति की कामना में अधिक से अधिक सुख , ऐश्वर्य एवं अधिकाधिक धन प्राप्त करने के उद्योग में ही मनुष्य रत दिखाई पड़ रहा है जबकि सतोगुण की न्यूनता चिंता का विषय कही जा सकती है | कुछ लोग प्राय: कहा करते हैं कि :- "मनुष्य जीवन में कहीं ये तीनों गुण दिखाई ही नहीं पड़ते" | ऐसे लोगों को मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" मानव जीवन में ही इन तीनों गुणों का दर्शन कराने का किंचित प्रयास कर रहा हूँ | जब मनुष्य का जन्म होता है तो लोग उसे अपना नयनतारा , राजकुमार एवं राजा बेटा की उपाधि देते रहते हैं उस समय वह रजोगुण से भरा रहता है | जब मनुष्य युवावस्था में प्रवेश करता है तो संगति / कुसंगति में पड़कर नकारात्मक होकर कर्म / कुकर्म करने को भी आतुर हो जाता तब उसमें तमोगुण प्रभावी होते हैं | जीवन भर दुर्दान्त बनकर तमोगुण से घिरकर जीवन यापन करने वालों का अन्तत: जब इस जीवन के परम सत्य (वृद्धावस्था) से सामना होता है तो वह सम्पूर्ण जीवन के कर्म / कुकर्म त्यागकर सतोगुणी बनने का प्रयास करता देखा जा सकता है | कहते हैं कि वृद्ध होने पर बक (बगुला) भी भगत बनने का प्रयास करता है | इस प्रकार मनुष्य के जीवनकाल में तीनों ही गुण विद्यमान हैं जिसकी जो इच्छा हो अपना सकता है |* *प्रत्येक मनुष्य को तीनों गुण (सत रज तम ) में से तमोगुण का हनन करके रजोगुण का कुछ अंश लेकर सतोगुण अपनाना चाहिए |*

अगला लेख: कलंक चतुर्थी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
21 सितम्बर 2018
हिंदू धर्म में जिस तरह हर दिन का एक महत्व होता है उसी तरह शनिवार को शनिदेव का दिन कहा जाता है। शनिदेव यह ऐसे देवता है जो खुश हो गए तो सारी मनोकामना पूर्ण कर देंगे। लोग उन्‍हें खुश करने के लिए सरसों का तेल चढ़ाते हैं, या दान करते हैं। पंडितों की मानें तो कुछ चीजें ऐसी हैं
21 सितम्बर 2018
20 सितम्बर 2018
*संसार में जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु भी निश्चित है | अमर इस संसार में कोई नहीं है | जन्म एवं मृत्यु के बीच का जो समय होता है उसे जीवन कहा जाता है | मनुष्य अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में अनेक अनुभव करता रहता है | सुख - दुख , शोक - प्रसन्नता , हानि - लाभ आदि समय समय पर मनुष्य को प्राप्त होते रहते हैं |
20 सितम्बर 2018
17 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में भाद्रपद मास बहुत ही विशेष स्थान व महत्व रखता है | अनेक व्रत , पर्व व देवों के अवतरण दिवस होने के कारण ही यह मास विश्ष महत्त्वपूर्ण हो जाता है | बलराम जी का जन्मोत्सव हलछठ हो या कन्हैया जी की जन्माष्टमी या फिर गणेश भगवान का अवतरण दिवस गणेश चतुर्थी सब भाद्रपद मास में ही मनाये जाते है |
17 सितम्बर 2018
20 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में जहाँ ३३ करोड़ देवी - देवताओं का वर्णन मिलता है वहीं प्रमुख तीन देव (ब्रह्मा , विष्णु , महेश) भी कहे गये हैं | इन प्रमुख त्रिदेवोों में ब्रह्मा जी सृजन करते करते हैं , विष्णु जी पालन करते हैं और भगवान रुद्र को संहार का कारक माना जाता है | सृजन और संहार जहाँ प्रथम और अंतिम चरण है वहीं
20 सितम्बर 2018
20 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति बनकर आई मनुष्य | मनुष्य की रचना परमात्मा ने इतनी सूक्ष्मता एवं तल्लीनता से की है कि समस्त भूमण्डल पर उसका कोई जोड़ ही नहीं है | सुंदर मुखमंडल , कार्य करने के लिए हाथ , यात्रा करने के लिए पैर , भोजन करने के लिए मुख , देखने के लिए आँखें , सुनने के लिए कान , एवं
20 सितम्बर 2018
17 सितम्बर 2018
*अखिल ब्रह्माण्ड में जितने भी जड़ चेतन हैं सबमें कुछ न कुछ रहस्य छुपा हुआ है | इन रहस्यों को जानने का जितना प्रयास पूर्व में हमारे ऋषि - महर्षियों ने किया उससे कहीं अधिक आज के वैज्ञानिक कर रहे हैं , परन्तु अभी तक यह नहीं कहा जा सकता कि सारे रहस्यों से पर्दा उठ पाया हो | इन सभी चराचर जीवों में सबसे
17 सितम्बर 2018
19 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति बनकर आई मनुष्य | मनुष्य की रचना परमात्मा ने इतनी सूक्ष्मता एवं तल्लीनता से की है कि समस्त भूमण्डल पर उसका कोई जोड़ ही नहीं है | सुंदर मुखमंडल , कार्य करने के लिए हाथ , यात्रा करने के लिए पैर , भोजन करने के लिए मुख , देखने के लिए आँखें , सुनने के लिए कान , एवं
19 सितम्बर 2018
15 सितम्बर 2018
आप तो ये सभी जानते ही होंगे की दान पुराणों और शास्त्रों में सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है फिर किसी चीज का दान हो. दान करने से मनुष्य को अनचाही समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है चाहे वो कन्या का दान क्यों न हो लेकिन अगर आपसे कही अनजाने में किसी गलत चीज का दान हो गया तो उसका अ
15 सितम्बर 2018
20 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में जहाँ ३३ करोड़ देवी - देवताओं का वर्णन मिलता है वहीं प्रमुख तीन देव (ब्रह्मा , विष्णु , महेश) भी कहे गये हैं | इन प्रमुख त्रिदेवोों में ब्रह्मा जी सृजन करते करते हैं , विष्णु जी पालन करते हैं और भगवान रुद्र को संहार का कारक माना जाता है | सृजन और संहार जहाँ प्रथम और अंतिम चरण है वहीं
20 सितम्बर 2018
16 सितम्बर 2018
*मानव जीवन में मनुष्य के बचपन का पूरा प्रभाव दिखता है | सम्पूर्ण जीवन की जड़ बचपन को कहा जा सकता है | जिस प्रकार एक बहुमंजिला भवन को सुदृढ बनाने के लिए उस भवन की बुनियाद ( नींव) का मजबूत होना आवश्यक हे उसी प्रकार मनुष्य को जीवन में बहुमुखी , प्रतिभासम्पन्न बनने के पीछे बचपन की स्थितियां - परिस्थितिय
16 सितम्बर 2018
17 सितम्बर 2018
*हमारा भारत देश ‘विविधता में एकता’ वाला देश है । यहाँ पर विभिन्न धर्मो व सम्प्रदायों के लोग रहते हैं । सभी की अपनी-अपनी भाषाएं, रहन-सहन, वेशभूषा, रीति-रियाज, वेद-पुराण एवं साहित्य है । सब की अपनी-अपनी संस्कृति है । सभी लोगों की संस्कृति उनकी पहचान बनाये हुये है । संस्कृति के प्रकाश र्मे ही भारत अपने
17 सितम्बर 2018
19 सितम्बर 2018
मुज़फ़्फरनगर...इस शहर के नाम के साथ ही कई अप्रिय घटनाओं की स्मृतियां जुड़ गई हैं. ये नाम कहीं भी पढ़ते हैं, तो दिमाग़ में पहले ही सवाल कौंध जाता है,'फिर कुछ हुआ क्या?'मुज़फ़्फरनगर शहर में ही एक कस्बा है, लढ्ढेवाला. तंग गलियों और कॉन्क्रीट के घरों का ये कस्बा. कस्बे के एक
19 सितम्बर 2018
14 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है | परंतु मनुष्य को गलतियों का पुतला भी कहा गया है ` किसी भी समय किसी भी विषय में भूल हो जाना स्वाभाविक है या यूं कहिये कि यह मानव स्वभाव है | जीवन में नैतिक या अनैतिक किसी भी प्रकार की भूलों का प्रायश्चित करने के लिए हमारे महर्षियों ने व्रत विधान बतलाये हैं
14 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x