छल - कपट :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

01 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (140 बार पढ़ा जा चुका है)

छल   - कपट :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मनुष्य इस पृथ्वी पर इकलौता प्राणी है जिसमें अन्य प्राणियों की अपेक्षा सोंचने - समझने के लिए विवेकरूपी एक अतिरिक्त गुण ईश्वर ने प्रदान किया है | अपने विवेक से ही मनुष्य निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर होता रहा है | मनुष्य को कब क्या करना चाहिये इसका निर्णय विवेक ही करता है | अपने विवेक का प्रयोग जिसने सकारात्मकता से किया वह समाज में अच्छे कार्य करता हुआ पूज्यनीय हुआ , और जिसका विवेक नकारात्मक हो गया उसे उपेक्षा ही प्राप्त होती रही है | नकारात्मकता को अपनाते हुए जिसने छल - कपट को अपना हथियार बनाने का प्रयास किया उसकी दुर्गति क्या हुई है यह बताने की आवश्यकता नहीं है | इसके अनेकों उदाहरण ग्रंथों में पढने को मिलते हैं | मनुष्य संसार में तो उपेक्षित होता ही है मृत्यु के बाद भी उसकी दुर्गति ही होती है | भगवान स्वयं कहते हैं :-- "निर्मल मन जन सो मोंहिं पावा ! मोंहिं कपट छल छिद्र न भावा !!" कहने का तात्पर्य यह है कि कपटी के द्वारा की गयी पूजा - अर्चना ईश्वर भी नहीं स्वीकारते हैं | आश्चर्य तो तब होता है जब जब रावण जैसा प्रकाण्ड विद्वान भी सीताहरण के लिए छल - कपट का सहारा लेता है , यदि उसके द्वारा ऐसा कृत्य किया गया तो उसका परिणाम क्या हुआ यह भी सभी जानते हैं | यद्यपि छिद्रान्वेषण , छल एवं कपट का त्याग करके ही समाज में सम्मानित हुआ जा सकता परंतु कुछ लोग इसे ही सीढी बनाकर सफलता अर्जित करना चाहते हैं | जिसका फल अन्ततोगत्वा दुखदायी ही होता है |* *आज मनुष्य की मानसिकता पहले की अपेक्षा क्या एवं कैसी होती जा रही है यह देखकर दुख होता है | आज समाज में नकारात्मक लोगों की संख्या बढती जा रही है | झूठ , छल , कपट एवं छिद्रान्वेषण ने अपना विस्तृत प्रभाव लगभग सभी के ऊपर डाल रखा है | आज छल एवं कपट का इतना बोलबाला हो गया है कि नित्य समाचारपत्रों एवं संचार माध्यम से इसके समाचैर मिलते रहते हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" समाज की वर्तमान दिशा एवं दशा देखकर विचार करता हूँ कि आखिर हम एवं हमारा समाज किस दिशा में अग्रसर होता जा रहा है | आज मित्र अपने मित्र से कपट करके सारी सम्पत्ति हथिया रहा है | संसार का सबसे पवित्र बंधन पति पत्नी का माना जाता है परंतु यह भी आज इस दुर्गुण से अछूता नहीं रह गया है | प्राय: देखने को मिल रहा है कि पत्नी ने पति की या पति ने पत्नी की छलपूर्वक हत्या करवा दी | शिष्य भी अपने गुरु से छल करने में पीछे नहीं हटते | और तो और आज के पुत्र भी अपने जन्मदाता माता - पिता से कपट करके छलपूर्वक उनका सबकुछ हथियाना चाहते हैं | जबकि पिता का सबकुछ पुत्र का ही है परंतु पिता के जीते जी ही वे मालिक बन जाने की लालसा में ऐसा निकृष्ट कृत्य कर डालते हैं | हमारे साहित्यों एवं सनातन संस्कृति में भाई को भाई की भुजा होने का गौरव प्राप्त है , परंतु आज ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल जायेंगे जहाँ मनुष्य छल करके अपनी भुजायें स्वयं काट रहा है | उपरोक्त तथ्य सब पर तो नहीं प्रभावी कहे जा सकते है परंतु अधिकतर आज यही हो रहा है | पूजा - पाठ तीर्थयात्रा तो बड़े प्रेम से की जाती है परंतु मन से छल एवं कपट को दूर नहीं कर पा रहे मनुष्य की दुर्गति होना निश्चित है और ऐसे लोगों की दुर्गति हो भी रही है |* *आज के युग में मन से छल कपट का पूर्णतय: हट पाना शायद सम्भव न हो परंतु दृढ इच्छाशक्ति से असम्भवसकुछ भी नहीं है |*

अगला लेख: जीवन का रहस्य --- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 अक्तूबर 2018
*पुरातन काल से भारतीय संस्कृति अपने आप में अनूठी रही है | भारत से लेकर संपूर्ण विश्व के कोने-कोने तक भारतीय संस्कृति एवं संस्कार ने अपना प्रभाव छोड़ा है , और इसे विस्तारित करने में हमारे महापुरुषों ने , और हमारे देश के राजाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था | किसी भी समस्या के निदान के लिए या किसी नवी
02 अक्तूबर 2018
20 सितम्बर 2018
*संसार में जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु भी निश्चित है | अमर इस संसार में कोई नहीं है | जन्म एवं मृत्यु के बीच का जो समय होता है उसे जीवन कहा जाता है | मनुष्य अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में अनेक अनुभव करता रहता है | सुख - दुख , शोक - प्रसन्नता , हानि - लाभ आदि समय समय पर मनुष्य को प्राप्त होते रहते हैं |
20 सितम्बर 2018
23 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म प्रत्येक पर्व एवं त्योहार स्वयं इस वैज्ञानिकता कुछ छुपाये हुए हैं | इतना बृहद सनातन धर्म कि इसके हर त्यौहार अपने आप में अनूठे हैं | आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को "अनंत चतुर्दशी" के नाम से जाना जाता है | संपूर्ण भारत में भक्तजन यह व्रत बहुत ही श्रद्धा के साथ लोग रहते हैं | "अनंत चत
23 सितम्बर 2018
07 अक्तूबर 2018
*चौरासी योनियों में सर्वश्रेष्ठ एवं सबसे सुंदर शरीर मनुष्य का मिला | इस सुंदर शरीर को सुंदर बनाए रखने के लिए मनुष्य को ही उद्योग करना पड़ता है | सुंदरता का अर्थ शारीरिक सुंदरता नहीं वरन पवित्रता एवं स्वच्छता से हैं | पवित्रता जीवन को स्वच्छ एवं सुंदर बनाती है | पवित्रता, शुद्धता, स्वच्छता मानव-जीवन
07 अक्तूबर 2018
19 सितम्बर 2018
*इस धराधाम पर ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति बनकर आई मनुष्य | मनुष्य की रचना परमात्मा ने इतनी सूक्ष्मता एवं तल्लीनता से की है कि समस्त भूमण्डल पर उसका कोई जोड़ ही नहीं है | सुंदर मुखमंडल , कार्य करने के लिए हाथ , यात्रा करने के लिए पैर , भोजन करने के लिए मुख , देखने के लिए आँखें , सुनने के लिए कान , एवं
19 सितम्बर 2018
24 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि मनुष्य जन्म लेने के बाद तीन प्रकार के ऋणों का ऋणी हो जाता है | ये तीन प्रकार के ऋण मनुष्य को उतारने ही पड़ते हैं जिन्हें देवऋण , ऋषिऋण एवं पितृऋण के नाम से जाना जाता है | सनातन धर्म की यह महानता रही है कि यदि मनुष्य के लिए कोई विधान बनाया है तो उससे निपटने या मुक्ति
24 सितम्बर 2018
20 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में जहाँ ३३ करोड़ देवी - देवताओं का वर्णन मिलता है वहीं प्रमुख तीन देव (ब्रह्मा , विष्णु , महेश) भी कहे गये हैं | इन प्रमुख त्रिदेवोों में ब्रह्मा जी सृजन करते करते हैं , विष्णु जी पालन करते हैं और भगवान रुद्र को संहार का कारक माना जाता है | सृजन और संहार जहाँ प्रथम और अंतिम चरण है वहीं
20 सितम्बर 2018
26 सितम्बर 2018
*परमात्मा की बनाई हुई इस सृष्टि को सुचारु रूप से संचालित करने में पंचतत्व एवं सूर्य , चन्द्र का प्रमुख योगदान है | जीवों को ऊर्जा सूर्य के माध्यम से प्राप्त होती है | सूर्य की गति के अनुसार ही सुबह , दोपहर एवं संध्या होती है | सनातन धर्म में इन तीनों समय (प्रात:काल , मध्यान्हकाल एवं संध्याकाल ) का व
26 सितम्बर 2018
21 सितम्बर 2018
*नारी का हमारे समाज में क्या स्थान है यह किसी से छिपा नहीं है। मां, बहिन और पत्नी के रूप में सदैव पूज्य रही है। जो आदर जो मान उसे मिला वही किसी से छिपा नहीं है। वह जननी है बड़े-बड़े महापुरुषों की। भगवान महावीर जैसे महापुरुष उसी की कोख से जन्में। हमारी संस्कृति, हमारी सभ्यता, हमारे इतिहास नारी की महा
21 सितम्बर 2018
24 सितम्बर 2018
*संसार में अब तक अनेक विद्वान महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने क्रिया कलापों से संसार का कल्याण करने का ही प्रयास किया है ! उनके चरित्रों का अनुसरण करके मनुष्य स्वयं पूजित होता रहा है | महापुरुषों के बताये गये मार्गों का अनुसरण करके , उनके लिखे ग्रंथों का पठन - पाठन करके ही विद्वान बनते आये महापुरुषो
24 सितम्बर 2018
07 अक्तूबर 2018
*सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि को गतिमान करने के लिए कई बार सृष्टि की रचना की , परंतु उनकी बनाई सृष्टि गतिमान न हो सकी , क्योंकि उन्होंने प्रारंभ में जब भी सृष्टि की तो सिर्फ पुरुष वर्ग को उत्पन्न किया | जो भी पुरुष हुए उन्होंने सृष्टि में कोई रुचि नहीं दिखाई | अपनी बनाई हुई सृष्टि क
07 अक्तूबर 2018
17 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म इतना वृहद है कि नित्य किसी न किसी पर्व का एक नया दिन होता है | आज भाद्रपद शुक्लपक्ष की अष्टमी को त्याग की प्रतिमूर्ति महर्षि दधीचि का अवतरण दिवस , प्रेम की प्रतिमूर्ति रासरासेश्वरी राधिका जू का अवतरण दिवस होने के साथ आज ही सृष्टि का सृजन एवं निर्माण करने वाले "भगवान विश्वकर्मा का पूजन" (
17 सितम्बर 2018
05 अक्तूबर 2018
*इस संसार में मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ इसलिए माना गया है क्योंकि मनुष्य में निर्णय लेने की क्षमता के साथ परिवार समाज व राष्ट्र के प्रति एक अपनत्व की भावना से जुड़ा होता है | मनुष्य का व्यक्तित्व उसके आचरण के अनुसार होता है , और मनुष्य का आचरण उसकी भावनाओं से जाना जा सकता है | जिस मनुष्य की जैसी भावना ह
05 अक्तूबर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x