विश्वास एवं विश्वासघात :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

02 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (80 बार पढ़ा जा चुका है)

विश्वास एवं विश्वासघात :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के अखिलनियंता देवों के देव महादेव को शिव कहा जाता है | शिव का अर्थ होता है कल्याणकारी | मानव जीवन में सबकुछ कल्याणमय हो इसके लिए शिवतत्व का होना परम आवश्यक है | शिवतत्व के बिना जीवन एक क्षण भी नहीं चल सकता | शिव क्या हैं ?? मानस में पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान शिव को विश्वास का स्वरूप बताते हुए लिखा है :- "भवानी शंकरौ वन्दे , श्रद्धा - विश्वास रूपिणौ" यहाँ भगवान शिव को विश्वास एवं भगवती पार्वती को श्रद्धा स्वरूप मानकर वन्दना की जा रही है | विचार कीजिए कि जीवन में यदि विश्वास न हो तो जीवन कैसा हो सकता है | इस पृथ्वी पर ब्रह्मा जी ने मैथुनी सृष्टि की है , जिसका अर्थ यह हुआ कि नर नारी के समागम से ही यह सृष्टि विस्तृत हुई | विवाह में वर - कन्या एक दूसरे से अनभिज्ञ होते थे , परंतु विवाह हो जाने के बाद यदि इनका जीवन विधिवत प्रेम से बीतता था तो इसका मुख्य कारक था आपसी विश्वास | एक दूसरे के ऊपर विश्वास ही जीवन प्रेमपूर्ण बनाता रहा है | जहाँ विश्वास की कमी हुई वहीं जीवन विकृत होता देखा गया है | जीवन में यदि विश्वास नहीं है तो जीवन नारकीय हो जाता है | यदि विश्वास से किसी को भी जीता जा सकता है वहीं विश्वासघात इसका विकृत एवं भयावह स्वरूप होने के साथ ही सम्बंधों को समाप्त कर देने वाला होता है |* *आज समाज में विश्वासघात कुछ अधिक ही दिखाई देने लगा है | मुख्य बात यह है कि विश्वासघात का जन्म विश्वास से ही होता है | मनुष्य जब किसी के ऊपर अति विश्वास करने लगता है तभी उसके साथ विश्वासघात होता है | आज लगभग प्रतिदिन धोखाधड़ी , छलावा आदि की खबरें देखने एवं सुनने को मिलती रहती हैं | किसी ने किसी से नौकरी दिलाने के नाम पर धन ले लिया तो कहीं पत्नी ने पति की हत्या करवा दी , मित्र ने मित्र के साथ विश्वासघात करके उसके प्राण हरण कर लिए | आज किसी के भी ऊपर विश्वास करने का वातावरण ही नहीं दृष्टिगोचर होता है | कुछ लोग तो यह सोंचते हैं कि जो मैं कर रहा हूँ वह न तो कोई देख रहा है और न ही जान पायेगा | तो ऐसे लोगों को मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" बता देना चाहता हूँ कि मनुष्य के सभी कर्मों के चौदह साक्षी होते हैं | सूर्य, अग्नि, आकाश, वायु, इन्द्रियां, चन्द्रमा, संध्या, रात, दिन, दिशाएं, जल, पृथ्वी, काल और धर्म-ये सब मनुष्य के कर्मों के साक्षी हैं | सूर्य रात्रि में नहीं रहता और चन्द्रमा दिन में नहीं रहता, जलती हुई अग्नि भी हरसमय नहीं रहती; किन्तु रात-दिन और संध्या में से कोई एक तो हर समय रहता ही है | दिशाएं, आकाश, वायु, पृथ्वी, जल सदैव रहते हैं, मनुष्य इन्हें छोड़कर कहीं भाग नहीं सकता, इनसे छुप नहीं सकता | मनुष्य की इन्द्रियां, काल और धर्म भी सदैव उसके साथ रहते हैं | कोई भी कर्म किसी-न किसी इन्द्रिय द्वारा किसी-न-किसी समय (काल) होगा ही | उस कर्म का प्रभाव मनुष्य के ग्रह-नक्षत्रों व पंचमहाभूतों पर पड़ता है | जब मनुष्य कोई गलत कार्य करता है तो धर्मदेव उस गलत कर्म की सूचना देते हैं और उसका दण्ड मनुष्य को अवश्य मिलता है | आज मनुष्य का कल्याण नहीं हो पा रहा है इसका प्रमुख कारण है उसके जीवन से शिवतत्व (विश्वास) का लोप होता जा रहा है |* *यदि किसी ने आपके ऊपर विश्वास कर लिया है तो उसके साथ विश्वासघात करके आप कभी सुखी नहीं रह सकते , क्योंकि विश्वास का अर्थ है शिव जो कि कल्याणक है | यदि कल्याण चाहते हैं तो विश्वास (शिव) को बनाये रखें |*

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