हमारे संस्कार :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

07 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (146 बार पढ़ा जा चुका है)

हमारे संस्कार :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आज हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं | यही हमारे लिए घातक एवं पतन का कारण बन रहा है | सोलह संस्कारों का विधान सनातनधर्म में बताया गया है | उनमें से एक संस्कार "उपनयन संस्कार" अर्थात यज्ञोपवीत -संस्कार का विधान भी है | जिसे आज की युवा पीढी स्वीकार करने से कतरा रही है | जबकि यज्ञोपवीत द्विजत्व का चिन्ह है। कहा भी है----- "मातुरग्रेऽधिजननम् द्वितीयम् मौञ्जि बन्धनम्।" अर्थात्-पहला जन्म माता के उदर से और दूसरा यज्ञोपवीत धारण से होता है।जन्म से मनुष्य भी एक प्रकार का पशु ही है। उसमें स्वार्थपरता की प्रवृत्ति अन्य जीव-जन्तुओं जैसी ही होती है, पर उत्कृष्ट आदर्शवादी मान्यताओं द्वारा वह मनुष्य बनता है। जब मानव की आस्था यह बन जाती है कि उसे इंसान की तरह ऊँचा जीवन जीना है और उसी आधार पर वह अपनी कार्य पद्धति निर्धारित करता है, तभी कहा जाता है कि इसने पशु-योनि छोड़कर मनुष्य योनि में प्रवेश किया अन्यथा नर-पशु से तो यह संसार भरा ही पड़ा है। स्वार्थ संकीर्णता से निकल कर परमार्थ की महानता में प्रवेश करने को, पशुता को त्याग कर मनुष्यता ग्रहण करने को दूसरा जन्म कहते हैं। शरीर-जन्म माता-पिता के रज-वीर्य से वैसा ही होता है जैसा अन्य जीवों का। आदर्शवाद जीवन लक्ष्य अपना लेने की प्रतिज्ञा लेना ही वास्तविक मनुष्य जन्म में प्रवेश करना है। इसी को द्विजत्व कहते हैं। द्विजत्व का अर्थ है-दूसरा जन्म। हर हिन्दू धर्मानुयायी को आदर्शवादी जीवन जीना चाहिए, द्विज बनना चाहिए।* *इस मूल तत्व को अपनाने की प्रक्रिया को समारोहपूर्वक यज्ञोपवीत संस्कार के नाम से सम्पन्न किया जाता है। इस व्रत-बंधन को आजीवन स्मरण रखने और व्यवहार में लाने की प्रतिज्ञा तीन लड़ों वाले यज्ञोपवीत की उपेक्षा करने का अर्थ है- जीवन जीने की प्रतिज्ञा से इनकार करना। ऐसे लोगों का किसी जमाने में सामाजिक बहिष्कार किया जाता था, उन्हें लोग छूते तक भी नहीं थे, अपने पास नहीं बिठाते थे। इस सामाजिक दण्ड का प्रयोजन यही था कि वे प्रताड़ना-दबाव में आकर पुन: मानवीय आदर्शों पर चलने की प्रतिज्ञा-यज्ञोपवीत धारण को स्वीकार करें। आज जो अन्त्यज, चाण्डाल आदि दीखते हैं, वे किसी समय के ऐसे ही बहिष्कृत व्यक्ति रहे होंगे। दुर्भाग्य से उनका दण्ड कितनी ही पीड़ियाँ बीत जाने पर भी उनकी सन्तान को झेलना पड़ रहा है। कितनी बड़ी विडम्बना है कि जिन्हें यज्ञोपवीत धारी बनाने के लिए कोई दण्ड व्यवस्था की गई थी, उनकी सन्तानें अब यदि यज्ञोपवीत पहनने को इच्छुक एवं आतुर हैं, तो उन्हें वैसा करने से रोका जाता है।यज्ञोपवीत के धागों में नीति का सारा सार सन्निहित कर दिया गया है। जैसे कागज और स्याही के सहारे किसी नगण्य से पत्र या तुच्छ-सी लगने वाली पुस्तक में अत्यन्त महत्वपूर्ण ज्ञान-विज्ञान भर दिया जाती है, उसी प्रकार सूत के इन नौ धागों में जीवन विकास का सारा मार्गदर्शन समाविष्ट कर दिया गया है।* *इन धागों को कन्धों पर, हृदय पर, कलेजे पर, पीठ पर प्रतिष्ठापित करने का प्रयोजन यह है कि सन्निहित शिक्षाओं का यज्ञोपवीत के ये धागे हर समय स्मरण करायें और उन्हीं के आधार पर हम अपनी रीति-नीति का निर्धारण करते रहें।*

अगला लेख: त्रिगुणात्मक सृष्टि :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
01 अक्तूबर 2018
*इस सृष्टि का सृजन करके हमेम इस धरा धाम पर भेजने वाली उस परमसत्ता को ईश्वर कहा जाता है | ईश्वर के बिना इस सृष्टि की परिकल्पना करना ही व्यर्थ है | कहा भी जाता है कि मनुष्य के करने से कुछ नहीं होता जो कुछ करता है ईश्वर ही करता है | वह ईश्वर जो सर्वव्यापी है और हमारे पल पल के कर्मों का हिसाब रखता है |
01 अक्तूबर 2018
14 अक्तूबर 2018
नवरात्रि इमेज 2018 फेसबुक और whatsapp के लिए... (Navratri Images for Facebook, Whatsapp 2018 Latest) Happy Navratri 2018 Latest Image for Facebook, Whatsapp 2018 Latestदेश भर में नवरात्रि का त्यौहार मनाया जा रहा है, आज हम शेयर कर रहे है नवरात्रि की लेटेस्ट 2018 की तस्वीरें , जिसे आप अपने फेसबुक,
14 अक्तूबर 2018
19 अक्तूबर 2018
नवरात्रि के पर्व का समापन का समय धीरे-धीरे पास आ रहा हैं, माँ दुर्गा के विसर्जन का दिन 19 अक्टूबर को हैं| ऐसे में जब नवरात्रि के शुरुआत होती हैं तो उस समय माँ दुर्गा की चौकी और कलश की स्थापना की जाती हैं| ऐसे में जब माँ दुर्गा का विसर्जन करना होता हैं तो उनके साथ कलश, नार
19 अक्तूबर 2018
26 सितम्बर 2018
*परमात्मा की बनाई हुई इस सृष्टि को सुचारु रूप से संचालित करने में पंचतत्व एवं सूर्य , चन्द्र का प्रमुख योगदान है | जीवों को ऊर्जा सूर्य के माध्यम से प्राप्त होती है | सूर्य की गति के अनुसार ही सुबह , दोपहर एवं संध्या होती है | सनातन धर्म में इन तीनों समय (प्रात:काल , मध्यान्हकाल एवं संध्याकाल ) का व
26 सितम्बर 2018
12 अक्तूबर 2018
एक भी बून्द साफ नहीं हुई है गंगा | 2014 लोकसभा के चुनव के मोदी जी ने कहा था न तो मैं आया हूं और न ही मुझे भेजा गया है। दरअसल, मुझे तो मां गंगा ने यहां बुलाया है। लोगों को तब लगा था की भारत को ऐसा प्रधानमंत्री मिलने वाला है जो गंगा माँ की सफाई कर के ही रहेगा और जल्दी ही गंगा भी नील नदी
12 अक्तूबर 2018
23 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म प्रत्येक पर्व एवं त्योहार स्वयं इस वैज्ञानिकता कुछ छुपाये हुए हैं | इतना बृहद सनातन धर्म कि इसके हर त्यौहार अपने आप में अनूठे हैं | आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को "अनंत चतुर्दशी" के नाम से जाना जाता है | संपूर्ण भारत में भक्तजन यह व्रत बहुत ही श्रद्धा के साथ लोग रहते हैं | "अनंत चत
23 सितम्बर 2018
20 अक्तूबर 2018
जिनका विश्वास ईश्वर में है वो मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च में विश्वास नहीं रखते, जो मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च में विश्वास रखते है वो ईश्वर में नहीं राजनीती में विश्वास रखते है. ईश्वर के नाम पर दंगे नहीं होते, दंगे धर्म
20 अक्तूबर 2018
24 सितम्बर 2018
*संसार में अब तक अनेक विद्वान महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने क्रिया कलापों से संसार का कल्याण करने का ही प्रयास किया है ! उनके चरित्रों का अनुसरण करके मनुष्य स्वयं पूजित होता रहा है | महापुरुषों के बताये गये मार्गों का अनुसरण करके , उनके लिखे ग्रंथों का पठन - पाठन करके ही विद्वान बनते आये महापुरुषो
24 सितम्बर 2018
28 सितम्बर 2018
*इस सृष्टि के जनक जिन्हे ईश्वर या परब्रह्म कहा जाता है वे सृष्टि में घट रही घटनाओं का श्रेय स्वयं न लेकरके किसी न किसी को माध्यम बनाते रहते हैं | परमपिता परमात्मा ने इस सृष्टि की रचना में पंचतत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका बनायी और साथ ही इस सृष्टि में तीन गुणों (सत्व , रज एवं तम) को प्रकट किया और सकल स
28 सितम्बर 2018
02 अक्तूबर 2018
*सृष्टि के अखिलनियंता देवों के देव महादेव को शिव कहा जाता है | शिव का अर्थ होता है कल्याणकारी | मानव जीवन में सबकुछ कल्याणमय हो इसके लिए शिवतत्व का होना परम आवश्यक है | शिवतत्व के बिना जीवन एक क्षण भी नहीं चल सकता | शिव क्या हैं ?? मानस में पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान शिव को विश्वास का स्
02 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*चौरासी योनियों में सर्वश्रेष्ठ एवं सबसे सुंदर शरीर मनुष्य का मिला | इस सुंदर शरीर को सुंदर बनाए रखने के लिए मनुष्य को ही उद्योग करना पड़ता है | सुंदरता का अर्थ शारीरिक सुंदरता नहीं वरन पवित्रता एवं स्वच्छता से हैं | पवित्रता जीवन को स्वच्छ एवं सुंदर बनाती है | पवित्रता, शुद्धता, स्वच्छता मानव-जीवन
07 अक्तूबर 2018
19 अक्तूबर 2018
19 अक्टूबर को पूरे विश्व में दशहरा (Dussehra) मनाया जाएगा. इस दिन हर गली-नुक्कड़ और बड़े-बड़े मैदानों में रावण (Ravana) का पुतला जलाया जाएगा. बुराई पर अच्छाई की जीत का ये जश्न धूमधाम से मनाया जाएगा. मैदानों में मेले लगेंगे और मेले में राम और रावण से जुड़े खेल-खिलौने दिखेंगे. एक तरफ परिवार मिलकर चाट
19 अक्तूबर 2018
24 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि मनुष्य जन्म लेने के बाद तीन प्रकार के ऋणों का ऋणी हो जाता है | ये तीन प्रकार के ऋण मनुष्य को उतारने ही पड़ते हैं जिन्हें देवऋण , ऋषिऋण एवं पितृऋण के नाम से जाना जाता है | सनातन धर्म की यह महानता रही है कि यदि मनुष्य के लिए कोई विधान बनाया है तो उससे निपटने या मुक्ति
24 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x