प्रसन्नता :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

07 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (29 बार पढ़ा जा चुका है)

प्रसन्नता :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सकल सृष्टि में हर प्राणी प्रसन्न रहना चाहता है , परंतु प्रसन्नता है कहाँ ???? लोग सामान्यतः अनुभव करते हैं कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि प्रसन्नता के मुख्य सूचक हैं | यह सत्य है कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि अल्प समय के लिए एक स्तर की संतुष्टि दे सकती है | परन्तु यदि यह कथन पूर्णतयः सत्य था तब वो सभी जिन्होंने उक्त सभी को प्राप्त कर लिया है, उन्हें पूर्ण रूप से प्रसन्न होना चाहिए | हम जानते हैं कि ऐसा नहीं है | हमारे सभी भौतिक एवं मानसिक प्रयत्न हमारा समय तथा धन, हमारे सम्बन्ध प्रसन्नता को प्राप्त करने के इर्द गिर्द होते हैं | हम निरंतर इसके पीछे पड़े रहते हुए प्रतीत होते हैं | हम संसार की अधिकाधिक वस्तुओं को संग्रह करना जारी रखते हैं | ये हमे कुछ समय के लिए संतुष्टि देती है | तब पुनः हम अपनी प्रसन्नता को खो देते हैं, तथा हम दूसरे प्रकार के प्रयत्न उद्धयोग तथा संग्रह के चक्रों को आरम्भ करते हैं | हम कब यह जान पाएंगे कि प्रसन्नता उन चीजों में निहित नहीं हैं | क्या वस्तुएँ हमें प्रसन्नता को देने की अंतर्निहित क्ष्रमता प्रदान करती हैं ? क्या रोटी का टुकड़ा सभी को एक समान खाने का आनन्द देता है ? क्या लोग एक समान आम को चखने तथा खाने के दौरान अन्तर महसूस करते हैं ? क्या रोटी और आम में स्वनिर्मित ऐसे गुण निहित होते हैं, जो सभी को एकसमान प्रसन्नता प्रदान करे | क्या विद्युत रहित गाँव में एक निरक्षर व्यक्ति प्रसन्न होगा यदि उसे अत्याधुनिक लेपटॉप प्रदान किया जाय ? क्या एक गुब्बारे को एक बच्चे तथा वयस्क को पाने की प्रसन्नता एक समान होगी ? नहीं | ऐसा नहीं है |* *हम इस सत्य को जान सकते हैं जब हम इसके बारे में सोंचते हैं | हम में से अधिकांश सत्य से वास्तव में अवगत होते हैं | तब हम लोग क्यों अपने बाहर की प्रसन्नता एवं भौतिक वस्तुओं में निरंतर पड़े रहते हैं ? प्रत्येक धर्म हमें सिखाता है कि हमे अपने अन्दर जाना चाहिए | क्योंकि प्रसन्नता का स्रोत हमारे अन्दर ईश्वर की चिंगारी हमारी आत्मा होती है | ईश्वर आनन्द होता है | आत्मा का स्वभाव आनन्द होता है | यह आनन्द जब खुल जाता है, तेज़ी से चमकता है और हमें हर समय प्रसन्न बनाये रखता है | यह तब होता है जहाँ एक परम गुरु खोजकर्ता की सहायता करते हैं | जब हमारे पास एक परमगुरु होता है और हम मंत्र जाप तथा ध्यान का अभ्यास करते हैं, हम अपने अन्दर जाते हैं तथा अपने मस्तिष्क एवं विचारों का अवलोकन करते हैं | हम बाहर से अन्दर की ओर का अवलोकन करते हुए अवस्था बदलते हैं | जब हमारी आंतरिक क्रियाकलापों की समझ बढती है तब अज्ञानता की परतों से छुटकारा पाना जो आत्मा को ढके होती है तथा आत्मा के प्रकाश को देखना एवं अपने अन्दर हर समय आनन्द का अनुभव करना आसान हो जाता है | जिन लोगों के पास गुरु नहीं होता है वे स्वयं से अपने अन्दर देखना तथा अपने विचारों का अनुपालन करना सीखते हैं | तुम उभरते हुए विचारों के नमूनों को देखोगे तथा समझोगे | तुम इस ज्ञान को प्राप्त कर लोगे कि क्या पकड़ कर रखना तथा किससे छुटकारा पाना है | जब तुम्हारी ईश्वर तथा सत्य से इच्छाशक्ति दृढ़ हो जाती है, तुम्हारे गुरु तुम्हारे पास आयेंगे और आगे तुम्हारा मार्गदर्शन करेंगे |* *स्मरण रहे कि केवल आंतरिक प्रसन्नता स्थायी होती है | क्यों की वह आत्मा से सम्बंधित होती है और आत्मा ईश्वर की एक चिंगारी होती है, जो सनातन है | यह सत्य तुम्हे स्वयं के अन्दर जाने में शक्ति प्रदान करेगा एवं तुम्हारी स्वयं सहायता करेगा |*

अगला लेख: त्रिगुणात्मक सृष्टि :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
15 अक्तूबर 2018
*चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन |* *कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ||* *महामाई आदिशक्ति भगवती के पूजन का पर्व नवरात्र शनै: शनै: पूर्णता की ओर अग्रसर है | महामाया इस सृष्टि के कण - कण में विद्यमान हैं | जहाँ जैसी आवश्यकता पड़ी है वैसा स्वरूप मैया ने धारण करके लोक
15 अक्तूबर 2018
13 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पावन पर्व पर आदिशक्ति भगवती दुर्गा के पूजन का महोत्सव शहरों से लेकर गाँव की गलियों तक मनाया जा रहा है | जगह - जगह पांडाल लगाकर मातारानी का पूजन करके नारीशक्ति की महत्ता का दर्शन किया जाता है | माता जगदम्बा के अनेक रूप हैं , कहीं ये दुर्गा तो कहीं काली के रूप में पूजी जाती हैं | जहाँ दुर्
13 अक्तूबर 2018
02 अक्तूबर 2018
*हमारे सनातन ग्रंथों में इस संसार को मायामय के साथ साथ मुसाफिरखाना भी कहा गया है | मुसाफिरखाना अर्थात जहां यात्रा के अंतर्गत एक - दो रात्रि व्यतीत करते हैं | कहने का तात्पर्य यह संसार एक किराए का घर है और इस किराए के घर को एक दिन छोड़ कर सबको जाना ही पड़ता है | इतिहास गवाह है कि संसार में जो भी आया
02 अक्तूबर 2018
27 सितम्बर 2018
*इस मायामय संसार में कोई भी ऐसा प्राणी (विशेषकर मनुष्य) नहीं है जो कि सुख की इच्छा न रखता हो ! प्रत्येक प्राणी सुखी ही रहना चाहता है | कोई भी नहीं चाहता कि उसे दुख प्राप्त हो | परंतु इस संसार में यह जीव स्वतंत्र नहीं है | काल के अधीन रहकर कर्मानुसार सुख एवं दुख जीव भोगता रहता है | यदि जीव स्वतंत्र ह
27 सितम्बर 2018
05 अक्तूबर 2018
*इस संसार में मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ इसलिए माना गया है क्योंकि मनुष्य में निर्णय लेने की क्षमता के साथ परिवार समाज व राष्ट्र के प्रति एक अपनत्व की भावना से जुड़ा होता है | मनुष्य का व्यक्तित्व उसके आचरण के अनुसार होता है , और मनुष्य का आचरण उसकी भावनाओं से जाना जा सकता है | जिस मनुष्य की जैसी भावना ह
05 अक्तूबर 2018
12 अक्तूबर 2018
*पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।* *प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥* *हमारे सनातन धर्म में नवरात्र पर्व के तीसरे दिन महामाया चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है | चंद्रघंटा की साधना करने से मनुष्य को प्रत्येक सुख , सुविधा , ऐश्वर्य , धन एवं लक्ष्मी की प्राप्
12 अक्तूबर 2018
01 अक्तूबर 2018
*मनुष्य इस पृथ्वी पर इकलौता प्राणी है जिसमें अन्य प्राणियों की अपेक्षा सोंचने - समझने के लिए विवेकरूपी एक अतिरिक्त गुण ईश्वर ने प्रदान किया है | अपने विवेक से ही मनुष्य निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर होता रहा है | मनुष्य को कब क्या करना चाहिये इसका निर्णय विवेक ही करता है | अपने विवेक का प्रयोग जिसने स
01 अक्तूबर 2018
23 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म प्रत्येक पर्व एवं त्योहार स्वयं इस वैज्ञानिकता कुछ छुपाये हुए हैं | इतना बृहद सनातन धर्म कि इसके हर त्यौहार अपने आप में अनूठे हैं | आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को "अनंत चतुर्दशी" के नाम से जाना जाता है | संपूर्ण भारत में भक्तजन यह व्रत बहुत ही श्रद्धा के साथ लोग रहते हैं | "अनंत चत
23 सितम्बर 2018
24 सितम्बर 2018
*संसार में अब तक अनेक विद्वान महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने क्रिया कलापों से संसार का कल्याण करने का ही प्रयास किया है ! उनके चरित्रों का अनुसरण करके मनुष्य स्वयं पूजित होता रहा है | महापुरुषों के बताये गये मार्गों का अनुसरण करके , उनके लिखे ग्रंथों का पठन - पाठन करके ही विद्वान बनते आये महापुरुषो
24 सितम्बर 2018
12 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पावन अवसर पर चल रही नारीगाथा पर आज एक विषय पर सोंचने को विवश हो गया कि नारियों पर हो रहे अत्याचारों के लिए दोषी किसे माना जाय ??? पुरुषवर्ग को या स्वयं नारी को ??? परिणाम यह निकला कि कहीं न कहीं से नारी की दुर्दशा के लिए नारी ही अधिकतर जिम्मेदार है | जब अपने साथ कम दहेज लेकर कोई नववधू सस
12 अक्तूबर 2018
28 सितम्बर 2018
*मानव समाज में एक दूसरे के ऊपर दोषारोपण करने का कृत्य होता रहा है | जबकि हमारे आर्ष ग्रंथों में स्थान - स्थान पर इससे बचने का निर्देश देते हुए लिखा भी है :- "परछिद्रेण विनश्यति" अर्थात दूसरों के दोष देखने वाले का विनाश हो जाता है अर्थात अस्तित्व समाप्त हो जाता है | इसी से मिलता एक शब्द है "निंदा" |
28 सितम्बर 2018
07 अक्तूबर 2018
*चौरासी योनियों में सर्वश्रेष्ठ एवं सबसे सुंदर शरीर मनुष्य का मिला | इस सुंदर शरीर को सुंदर बनाए रखने के लिए मनुष्य को ही उद्योग करना पड़ता है | सुंदरता का अर्थ शारीरिक सुंदरता नहीं वरन पवित्रता एवं स्वच्छता से हैं | पवित्रता जीवन को स्वच्छ एवं सुंदर बनाती है | पवित्रता, शुद्धता, स्वच्छता मानव-जीवन
07 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*चौरासी योनियों में सर्वश्रेष्ठ एवं सबसे सुंदर शरीर मनुष्य का मिला | इस सुंदर शरीर को सुंदर बनाए रखने के लिए मनुष्य को ही उद्योग करना पड़ता है | सुंदरता का अर्थ शारीरिक सुंदरता नहीं वरन पवित्रता एवं स्वच्छता से हैं | पवित्रता जीवन को स्वच्छ एवं सुंदर बनाती है | पवित्रता, शुद्धता, स्वच्छता मानव-जीवन
07 अक्तूबर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x