जीवन में सामंजस्य :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

07 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (89 बार पढ़ा जा चुका है)

जीवन में सामंजस्य :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि को गतिमान करने के लिए कई बार सृष्टि की रचना की , परंतु उनकी बनाई सृष्टि गतिमान न हो सकी , क्योंकि उन्होंने प्रारंभ में जब भी सृष्टि की तो सिर्फ पुरुष वर्ग को उत्पन्न किया | जो भी पुरुष हुए उन्होंने सृष्टि में कोई रुचि नहीं दिखाई | अपनी बनाई हुई सृष्टि को विफल होता देख कर के ब्रह्मा जी ने भगवान शिव की तपस्या प्रारंभ कर दी | उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर के भगवान शिव प्रकट हुए एक विचित्र रूप में | जिस स्वरूप का आधा भाग नर का था आधा नारी का था | जिसका साफ संकेत था कि यह सृष्टि बिना नर नारी के समागम के आगे नहीं बढ़ सकती | भगवान शिव के संकेत को समझ कर के ब्रह्मा जी ने मनु - शतरूपा के रूप में नर-नारी का जोड़ा उत्पन्न किया | जिससे सृष्टि आगे बढ़ी | कहने का तात्पर्य है कि इस सृष्टि में नर नारी के सहयोग से ही सफल हुआ जा सकता है | नर नारी का संयोग तभी हो सकता है जब आपसी सामंजस्य बहुत अच्छे हो | आपस में प्रेम श्रद्धा एवं विश्वास के बिना यह जोड़ी सफल नहीं हो सकती | इसी को ध्यान में रखते हुए सनातन काल के ऋषियों ने गृहस्थ धर्म का पालन किया | सनातन धर्म में बताए गए चार आश्रमों में गृहस्थाश्रम को सर्वश्रेष्ठ इसीलिए माना गया है क्योंकि गृहस्थाश्रम ही सृष्टि में उत्पन्न सभी जड़ चेतन का पालन करने में सक्षम है | जहां पर नारी और पुरुष का आपसी सामंजस्य बिगड़ जाता है वहां वह परिवार विनाश के कगार पर पहुंच जाता है | हम सभी को अपने परिवार में आपसी सामंजस्य बना कर रखना चाहिए |* *आज के युग में जहां भारतीय परिवार भी पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने में आतुर दिख रहे हैं वहीं परिवारों का सामंजस्य भी बिगड़ा है | आज समाज पर निगाह डाली जाए तो अधिकतर पति - पत्नी के संबंध में कटुता देखी जा सकती है , और यह कटुता इतनी बढ़ती हुई देखी जा रही है कि उनको न्यायालय की शरण लेना पड़ रहा है | कहीं पत्नी की महत्वाकांक्षा इसका कारक बन रही है तो कहीं पति की निकृष्टता एवं पत्नी के प्रति निर्ममता भी एक कारण बनता हुआ दिख रहा है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" अनेकों उदाहरण इस समाज में इस प्रकार का देख रहा हूं जहां पत्नी यह चाहती है कि मेरा पति अपने मां बाप को छोड़ कर के मुझे लेकर के एकल परिवार में रहे | यदि पति उस बात को नहीं मानता है और अपने मां बाप को नहीं छोड़ना चाहता है तो पत्नी संबंध विच्छेद के लिए न्यायालय की शरण ले लेती है | या तो पति की निर्ममता से त्रस्त होकर के पत्नी को ऐसा कदम उठाना पड़ रहा है | इसका एक कारण दहेज रूपी दानव भी बन रहा है | विचार कीजिए कि जब नर नारी के जोड़े के बिना ब्रह्मा जी की सृष्टि नहीं चल पाई तो हम भला एक दूसरे के बिना परिवार को आगे कैसे बढ़ा सकते हैं | परिवार जिसे समाज की इकाई कहा जाता था आज वह अपने संक्रमण काल से गुजर रहा है | अधिकतर परिवारों में पति पत्नी में आपसी सामंजस्य का ना होना इसका मुख्य कारण बन रहा है जो कि आने वाले भविष्य के लिए उचित नहीं कहा जा सकता |* *ईश्वर ने हमारे भाग्य में जो लिख दिया है उसको कोई मिटा नहीं सकता परंतु मनुष्य अपने कर्म से लिखे भाग्य के फल को कम अवश्य कर सकता है | हमें अपने परिवार में सामंजस्य बना कर रखना चाहिए जिससे कि हमारी आने वाली पीढ़ी हमारे ऊपर उंगली ना उठा सके |*

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