लोग क्या कहेंगे

09 अक्तूबर 2018   |  जतिन दीक्षित   (7 बार पढ़ा जा चुका है)

लोग क्या कहेंगे


वो 29 साल की है, कामयाब है, अपने पैरों पर खड़ी है, ज़िन्दगी अपने तरीके से जीती है, खुश है।

फिर भी हर रोज़ माँ-बाप और रिश्तेदार उसे, "शादी की उम्र निकल रही है, अब तुझे कौन मिलेगा!"

के ताने सुनाएंगे।


क्योंकि बेटी की शादी नहीं हुई, तो लोग क्या कहेंगे?


वो दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं, शायद शादी भी हुई है, या नहीं भी हुई।

लोग सड़कों पर, खुलेआम शौच करेंगे, चोरी, मर्डर और बलात्कार तक करेंगे, पर वो दोनों पब्लिक में एक-दूसरे को किस करने से पहले सौ बार सोचेंगे।


क्योंकि अगर किसी ने देख लिया, तो लोग क्या कहेंगे?


वो 27 साल का है, अपने माँ-बाप का लाडला, उनकी सेवा में कोई कमी नहीं करता, अपनी कामयाबी से हर वक्त उनका सिर गर्व से ऊँचा रखता है।

वो गे है, उसे लड़कियाँ नहीं, लड़के पसंद हैं। वो शादी को टालने के लिए हर रोज़ नए बहाने बनाएगा लेकिन अपना सच, माँ-बाप को कभी नहीं बता पाएगा।

शायद वो समाज के डर से ज़बरदस्ती शादी भी कर ले।

इस शादी से कई ज़िंदगियाँ हमेशा के लिए तबाह कर देंगे, लेकिन अगर 'गे' शब्द मुँह से भी निकल गया, तो लोग क्या कहेंगे?


वो लड़का है, उसे नाचना पसंद है, वो हिप-हॉप नहीं कत्थक करता है, इसी में अपना करियर बनाना चाहता है।


उसकी ट्रॉफीज़ से अलमारियां भरी पड़ी हैं, फिर भी माँ उसकी 5th क्लास में 'दूसरी पोजिशन' लाने पर मिली ट्रॉफी ही सब को दिखाऐंगी।

कोई उसके कत्थक के बारे में पूछ ले, तो "ऐसे ही, बस उसका शौक है" कहकर बात टाल जाऐंगी।

सब उसका मज़ाक बनाएँगे, नौकरी के लिए उस पर दबाव डालेंगे।

क्योंकि "वो लड़का होकर कत्थक करता है!"


अगर किसी को पता चल गया, तो

लोग क्या कहेंगे?


ऐसे ही ना जाने कितने हैं, जो समाज के बंधनों को तोड़कर कुछ अलग करना चाहते हैं।

इंजीनियरों और डॉक्टरों की रेस में कुछ लेखक, नर्तक या एक्टर बनना चाहते हैं।

कुछ समाज के उसूलों से समझौता कर अपने सपनों और इच्छाओं का क़त्ल कर देते हैं। कुछ नहीं सह पाते समाज और मन के बीच के द्वन्द को और खुद अपनी ही जान ले लेते हैं।


कुछ माँ-बाप की इज्ज़त की खातिर ज़िन्दगी भर चुप रह जाते हैं, ज़िन्दगी घुटन में जी लेते हैं पर इन बेतुके नियमों पर सवाल नहीं उठा पाते।


क्योंकि अगर हर कोई अपनी ज़िन्दगी अपने तरीके से जीने लग गया, तो ये समाज के ठेकेदार 'जॉबलेस' हो जाएंगे।


और उन 'चार' लोगों को सोचने लिए कुछ ना मिला, तो लोग क्या कहेंगे?

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