मैया ब्रह्मचारिणी एवं आज की नारी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

11 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (38 बार पढ़ा जा चुका है)

मैया ब्रह्मचारिणी एवं आज की नारी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*पराम्बा जगदंबा जगत जननी भगवती मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है ब्रह्मचारिणी | जिसका अर्थ होता है तपश्चारिणी अर्थात तपस्या करने वाली | महामाया ब्रह्मचारिणी नें घोर तपस्या करके भगवान शिव को अपने पति के रुप में प्राप्त किया और भगवान शिव के वामभाग में विराजित होकर के पतिव्रताओं में अग्रगण्य बनीं | इसी प्रकार एक नारी का जीवन तपस्या में ही बीत जाता है, जन्म से लेकर मरण तक नारी तपश्चारिणी ही होती है | जब वह कन्या स्वरूप में होती है तभी से वह परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का प्रयास करने लगती है | छोटे भाइयों को संभालना और माता के साथ रसोई में हाथ बंटाना, पिता के खान पान का ध्यान रखना ! यह सब एक नारी किशोरावस्था में ही सीखना प्रारंभ कर देती है | विवाहोपरांत अपनी सभी इच्छाओं का दमन करके एक नई जगह पर स्वयं को स्थापित करने से बढ़कर कोई दूसरी तपस्या नहीं हो सकती , जहां के लोग उसके लिए बिल्कुल अनजान हैं अपने लोगों को छोड़कर के एक नारी त्याग एवं तपस्या का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है | जब वह माँ बनती है तो उसकी तपस्या देखने लायक होती है | अपने शिशु का ध्यान रखने में वह स्वयं की नींद, भूख, प्यास तक का त्याग करके एक तपस्विनी की तरह ही अपने शिशु का एकाग्रता से पालन करती है | यही है ब्रह्मचारिणी का वास्तविक अर्थ जो कि प्रत्येक नारी में परिलक्षित होता है |* *नवरात्र सिर्फ पूजा और अनुष्ठान का पर्व ही नहीं है, बल्कि नारी सशक्तीकरण का उत्सव मनाने का अवसर भी है। मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की अपार शक्ति नारी सशक्तीकरण का प्रतीक है। आज की नारी में जहां मां दुर्गा का ममतामयी रूप सजा है वहीं कुछ कर गुजरने का जोश भी निहित है। सृजन और संहार के दोनों रूपों को अपनाकर सशक्त हुई है आज की यह नारी। यह सांस्कृतिक पर्व है जो दुर्गा जी की शक्ति को सम्बंधित करता है नारी सशक्तीकरण से | आदिशक्ति हैं मां दुर्गा। इनके तीन गुण हैं सृजन, पालन और संहार। कभी वह सृजन करती हैं तो कभी मां के रूप में पालन करती हैं और कभी अपने भीतर की शक्ति को जागृत कर महिषासुर जैसे दानवों का संहार करती हैं। आज की नारी देवी दुर्गा के इन्हीं रूपों को साक्षात तौर पर निभा रही है। वह सृजन करती है, मां की हर जिम्मेदारी निभाती है और जब कुछ करने की ठान लेती है तो करके ही मानती है। आज की इस नारी की शक्ति असीम है और अपनी इस काबिलियत को इसने पहचान भी लिया है। आज नारी का निर्बल नहीं सबल पक्ष देखने को मिलता है। वह सहनशील है, मजबूत है, किसी के दबाव में नहीं है। अंतरिक्ष से लेकर राजनीति तक सारे क्षेत्रों में अपनी काबिलियत साबित कर रही है। कहा भी गया है- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता... यानी जहां स्त्री का आदर-सम्मान होता है, उनकी अपेक्षाओं की पूर्ति होती है, उस स्थान, समाज, तथा परिवार पर देवतागण प्रसन्न रहते हैं। ठीक इसी प्रकार आज की कर्मठ नारी भी जहां बसती है वहां देवता का वास होता है।* *नारी सशक्तीकरण के इसी रूप को दुर्गा पूजा के रूप में मनाने की परम्परा आज हम सब मनाने को कटिबद्ध हैं |*

अगला लेख: हमारे संस्कार :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
02 अक्तूबर 2018
*सृष्टि के अखिलनियंता देवों के देव महादेव को शिव कहा जाता है | शिव का अर्थ होता है कल्याणकारी | मानव जीवन में सबकुछ कल्याणमय हो इसके लिए शिवतत्व का होना परम आवश्यक है | शिवतत्व के बिना जीवन एक क्षण भी नहीं चल सकता | शिव क्या हैं ?? मानस में पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान शिव को विश्वास का स्
02 अक्तूबर 2018
15 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पाँचवे दिन स्कन्दमाता का पूजन किया जाता है ! कार्तिक कुमार का एक नाम स्कंद भी है इसीलिए भगवती को "स्कन्दमाता" कहा गया है | माता शब्द ऐसा है जिसका वर्णन कर शायद किसी के वश की बात नहीं है | मानव जीवन में माता का सर्वोच्च स्थान है | जीव के गर्भ में आते ही एक माता उसके प्रति कर्तव्य प्रारम्भ
15 अक्तूबर 2018
02 अक्तूबर 2018
*हमारे सनातन ग्रंथों में इस संसार को मायामय के साथ साथ मुसाफिरखाना भी कहा गया है | मुसाफिरखाना अर्थात जहां यात्रा के अंतर्गत एक - दो रात्रि व्यतीत करते हैं | कहने का तात्पर्य यह संसार एक किराए का घर है और इस किराए के घर को एक दिन छोड़ कर सबको जाना ही पड़ता है | इतिहास गवाह है कि संसार में जो भी आया
02 अक्तूबर 2018
28 सितम्बर 2018
<!--[if gte mso 9]><xml> <o:OfficeDocumentSettings> <o:RelyOnVML/> <o:AllowPNG/> </o:OfficeDocumentSettings></xml><![endif]--><!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSc
28 सितम्बर 2018
28 सितम्बर 2018
*मानव समाज में एक दूसरे के ऊपर दोषारोपण करने का कृत्य होता रहा है | जबकि हमारे आर्ष ग्रंथों में स्थान - स्थान पर इससे बचने का निर्देश देते हुए लिखा भी है :- "परछिद्रेण विनश्यति" अर्थात दूसरों के दोष देखने वाले का विनाश हो जाता है अर्थात अस्तित्व समाप्त हो जाता है | इसी से मिलता एक शब्द है "निंदा" |
28 सितम्बर 2018
07 अक्तूबर 2018
*इस धराधाम पर जीवन जीने के लिए हमारे महापुरुषों ने मनुष्य के लिए कुछ नियम निर्धारित किए हैं | इन नियमों के बिना कोई भी मनुष्य परिवार , समाज व राष्ट्र का सहभागी नहीं कहा जा सकता | जीवन में नियमों का होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि बिना नियम के कोई भी परिवार , समाज , संस्था , या देश को नहीं चलाया जा सक
07 अक्तूबर 2018
02 अक्तूबर 2018
*पुरातन काल से भारतीय संस्कृति अपने आप में अनूठी रही है | भारत से लेकर संपूर्ण विश्व के कोने-कोने तक भारतीय संस्कृति एवं संस्कार ने अपना प्रभाव छोड़ा है , और इसे विस्तारित करने में हमारे महापुरुषों ने , और हमारे देश के राजाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था | किसी भी समस्या के निदान के लिए या किसी नवी
02 अक्तूबर 2018
27 सितम्बर 2018
*इस मायामय संसार में कोई भी ऐसा प्राणी (विशेषकर मनुष्य) नहीं है जो कि सुख की इच्छा न रखता हो ! प्रत्येक प्राणी सुखी ही रहना चाहता है | कोई भी नहीं चाहता कि उसे दुख प्राप्त हो | परंतु इस संसार में यह जीव स्वतंत्र नहीं है | काल के अधीन रहकर कर्मानुसार सुख एवं दुख जीव भोगता रहता है | यदि जीव स्वतंत्र ह
27 सितम्बर 2018
27 सितम्बर 2018
*सनातन धर्म के आर्षग्रंथों (गीतादि) में मनुष्य के कल्याण के लिए तीन प्रकार के योगों का वर्णन मिलता है :- ज्ञानयोग , कर्मयोग एवं भक्तियोग | मनुष्य के लिए कल्याणकारक इन तीनों के अतिरिक्त चौथा कोई मार्ग ही नहीं है | प्रत्येक मनुष्य को अपने कल्याण के लिए इन्हीं तीनों में से किसी एक को चुनना ही पड़ेगा |
27 सितम्बर 2018
01 अक्तूबर 2018
*इस सृष्टि का सृजन करके हमेम इस धरा धाम पर भेजने वाली उस परमसत्ता को ईश्वर कहा जाता है | ईश्वर के बिना इस सृष्टि की परिकल्पना करना ही व्यर्थ है | कहा भी जाता है कि मनुष्य के करने से कुछ नहीं होता जो कुछ करता है ईश्वर ही करता है | वह ईश्वर जो सर्वव्यापी है और हमारे पल पल के कर्मों का हिसाब रखता है |
01 अक्तूबर 2018
02 अक्तूबर 2018
*हमारे सनातन ग्रंथों में इस संसार को मायामय के साथ साथ मुसाफिरखाना भी कहा गया है | मुसाफिरखाना अर्थात जहां यात्रा के अंतर्गत एक - दो रात्रि व्यतीत करते हैं | कहने का तात्पर्य यह संसार एक किराए का घर है और इस किराए के घर को एक दिन छोड़ कर सबको जाना ही पड़ता है | इतिहास गवाह है कि संसार में जो भी आया
02 अक्तूबर 2018
01 अक्तूबर 2018
*मनुष्य इस पृथ्वी पर इकलौता प्राणी है जिसमें अन्य प्राणियों की अपेक्षा सोंचने - समझने के लिए विवेकरूपी एक अतिरिक्त गुण ईश्वर ने प्रदान किया है | अपने विवेक से ही मनुष्य निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर होता रहा है | मनुष्य को कब क्या करना चाहिये इसका निर्णय विवेक ही करता है | अपने विवेक का प्रयोग जिसने स
01 अक्तूबर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x