नारियों को नहीं रखने चाहिए खुले बाल :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

13 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (48 बार पढ़ा जा चुका है)

नारियों को नहीं रखने चाहिए खुले बाल :---- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

*नवरात्र के पावन पर्व पर आदिशक्ति भगवती दुर्गा के पूजन का महोत्सव शहरों से लेकर गाँव की गलियों तक मनाया जा रहा है | जगह - जगह पांडाल लगाकर मातारानी का पूजन करके नारीशक्ति की महत्ता का दर्शन किया जाता है | माता जगदम्बा के अनेक रूप हैं , कहीं ये दुर्गा तो कहीं काली के रूप में पूजी जाती हैं | जहाँ दुर्गा जी स्वरूप महिषासुर का वध करते हुए भी सौम्य एवं मनमोहक दिखाई पड़ता है वहीं महाकाली का वीभत्स स्वरूप भक्तजन देखते हैं | दुर्गा जी की मूर्ति प्राय: प्रत्येक घर में प्राप्त हो सकती है परंतु काली जी का स्थान प्राय: तंत्रसाधकों के साधनास्थल पर या फिर गाँव के बाहर किसी नीम के छाँव में मिलता है | इस तथ्य पर विचार किया जाय तो यही प्राप्त होता है कि जहाँ दुर्गा जी सभी श्रृंगारों से से युक्त होती हैं वहीं महाकाली का बिना श्रृंगार के खुले बालों के साथ दर्शन होता है | हमारे शास्त्रों ने महिलाओं के खुले बाल को विनाशक एवं दुर्भाग्य को निमंत्रण देने वाला बताया गया है | स्त्रियों को बालों का बांधकर रखना चाहिए, इनको खोलकर रखना अशुभ होता है | स्त्रियों के बालों से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं, जिन्हें आज लोग अंधविश्वास मानते हैं | केश महिलाओं का श्रृंगार होते हैं जो उनको भव्यता प्रदान करते हैं | इसीलिए पहले महिलाएं किसी विशेष अवसर पर ही बाल खोलती थीं, अधिकतर उन्हें बांध कर रखा जाता था क्योंकि खुले बाल रखना शोक की निशानी माना जाता है | द्रौपदी के खुले बालों की कथा लगभग सभी जानते हैं जिन्होंने महाभारत जैसे विनाशक युद्ध की पटकथा तैयार कर दी | अत: स्त्रियों को सदैव अपने बाल बाँधकर रखना चाहिए अन्यथा खुले बाल दुर्भाग्य को निमंत्रण देने वाले ही होते हैं |* *आज आधुनिकता के परिवेश में लगभग सभी लोग प्राचीन मान्यताओं से किनारा कर रहे हैं | जहाँ नारियों के बंधे बाल उनके आकर्षण को बढाते थे वहीं आज के फैशन में बाल खुले ही रखने का चलन सा होता जा रहा है | प्राचीन मान्यताओं को अंधविश्वास बता करके आज का समाज अपने अनुसार नियम बनाता है और उसी नियम पर चलता है | आज समाज में जिस प्रकार व्यभिचार फैला है लोग अंधे से होते जा रहे हैं ऐसे समय में नारियों को प्राचीन मान्यताओं को आत्मसात करते हुए ही चलना चाहिए | आज प्राय: ९९% नारियाँ बालों को खोलकर यत्र तत्र भ्रमण करती दिखाई पड़ती हैं | यदि किसी संस्कारवान परिवार की बेटी का विवाह आधुनिक परिवार में हो जाता है तो उसके पति को अपनी पत्नी के बंधे बाल नहीं भाते और विवशता में बेचारी को बाल खुले ही संवारकर पार्टियों में जाना पड़ता है | हो सकता है कि कुछ लोग मेरी बात को न पचा सकें परंतु मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का कहना है कि यदि सनातन धर्म में किसी बात को वर्जित किया गया है तो उसमें वैज्ञानिक कारण भी निहित है , क्योंकि सनातन धर्म की मान्यतायें वैज्ञानिकता से ओतप्रोत हैं | किसी भी मान्यता को मानने की जितनी जिम्मेदारी नारी की है उससे अधिक पुरुष की भी है | पुरानी मान्यताओं से किनारा करके मनुष्य सुखी भी नहीं है | जिस माँ को अपनी बच्चियों को शिक्षा देनी चाहिए वह स्वयं बालों को खुले रखकर पारिवारिक कलह एवं दुर्भाग्य को निमंत्रण दे रही है |जब खुले बालों के कारण महाकाली का स्थान गाँव बाहर निश्चित कर दिया गया है तो साधारण मनुष्य को इस पर विचार अवश्य करना चाहिए |* *नारियों को सदैव बालों को बाँधकर ही रखना चाहिए ! जिससे कि जीवन में समरसता , सौभाग्य की अभिवृद्धि निरंतर होती रहे |*

अगला लेख: सर्वपितृ अमावस्या पर अवश्य करें श्राद्ध :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
05 अक्तूबर 2018
*इस संसार में मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ इसलिए माना गया है क्योंकि मनुष्य में निर्णय लेने की क्षमता के साथ परिवार समाज व राष्ट्र के प्रति एक अपनत्व की भावना से जुड़ा होता है | मनुष्य का व्यक्तित्व उसके आचरण के अनुसार होता है , और मनुष्य का आचरण उसकी भावनाओं से जाना जा सकता है | जिस मनुष्य की जैसी भावना ह
05 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के छठे दिन मैया कात्यायनी कात्यायन ऋषि के यहाँ कन्या बनकर प्रकट हुईं | नारी का जन्म कन्यारूप में ही होता है इसीलिए सनातन धर्म ने कन्या की पूजा का विधान बनाया है | सनातन धर्म के पुरोधा यह जानते थे कि जिस प्रकार एक पौधे से विशाल वृक्ष तैयार होता है उसी प्रकार एक कन्या ही नारी रूप में परिवर्ति
20 अक्तूबर 2018
15 अक्तूबर 2018
*चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन |* *कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ||* *महामाई आदिशक्ति भगवती के पूजन का पर्व नवरात्र शनै: शनै: पूर्णता की ओर अग्रसर है | महामाया इस सृष्टि के कण - कण में विद्यमान हैं | जहाँ जैसी आवश्यकता पड़ी है वैसा स्वरूप मैया ने धारण करके लोक
15 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*इस सकल सृष्टि में हर प्राणी प्रसन्न रहना चाहता है , परंतु प्रसन्नता है कहाँ ???? लोग सामान्यतः अनुभव करते हैं कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि प्रसन्नता के मुख्य सूचक हैं | यह सत्य है कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि अल्प समय के लिए एक स्तर की संतुष्टि दे सकती है | परन्तु यदि यह कथन पूर्णतयः सत्य था तब वो सभी जि
07 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*आज हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं | यही हमारे लिए घातक एवं पतन का कारण बन रहा है | सोलह संस्कारों का विधान सनातनधर्म में बताया गया है | उनमें से एक संस्कार "उपनयन संस्कार" अर्थात यज्ञोपवीत -संस्कार का विधान भी है | जिसे आज की युवा पीढी स्वीकार करने से कतरा रही है | जबकि यज्ञोपवीत द्विजत्व का
07 अक्तूबर 2018
01 अक्तूबर 2018
*मनुष्य इस पृथ्वी पर इकलौता प्राणी है जिसमें अन्य प्राणियों की अपेक्षा सोंचने - समझने के लिए विवेकरूपी एक अतिरिक्त गुण ईश्वर ने प्रदान किया है | अपने विवेक से ही मनुष्य निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर होता रहा है | मनुष्य को कब क्या करना चाहिये इसका निर्णय विवेक ही करता है | अपने विवेक का प्रयोग जिसने स
01 अक्तूबर 2018
01 अक्तूबर 2018
*मनुष्य इस पृथ्वी पर इकलौता प्राणी है जिसमें अन्य प्राणियों की अपेक्षा सोंचने - समझने के लिए विवेकरूपी एक अतिरिक्त गुण ईश्वर ने प्रदान किया है | अपने विवेक से ही मनुष्य निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर होता रहा है | मनुष्य को कब क्या करना चाहिये इसका निर्णय विवेक ही करता है | अपने विवेक का प्रयोग जिसने स
01 अक्तूबर 2018
02 अक्तूबर 2018
*हमारे सनातन ग्रंथों में इस संसार को मायामय के साथ साथ मुसाफिरखाना भी कहा गया है | मुसाफिरखाना अर्थात जहां यात्रा के अंतर्गत एक - दो रात्रि व्यतीत करते हैं | कहने का तात्पर्य यह संसार एक किराए का घर है और इस किराए के घर को एक दिन छोड़ कर सबको जाना ही पड़ता है | इतिहास गवाह है कि संसार में जो भी आया
02 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*मानव जीवन में संगति का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है | जिस प्रकार मनुष्य कुसंगत में पड़कर के नकारात्मक हो जाता है उसी प्रकार अच्छी संगति अर्थात सत्संग में पढ़कर की मनुष्य का व्यक्तित्व बदल जाता है | सत्संग का मानव जीवन पर इतना अधिक प्रभाव पड़ता है कि इसी के माध्यम से मनुष्य को समस्याओं का समाधान तो मिल
20 अक्तूबर 2018
23 अक्तूबर 2018
*हमारे भारत देश में अनेकों महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने महान गुणों से एक नवीन आदर्श किया है | धर्म को मानने वाले या धारण करने वाले मनुष्यों का सबसे बड़ा गुण होता है क्षम
23 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि को गतिमान करने के लिए कई बार सृष्टि की रचना की , परंतु उनकी बनाई सृष्टि गतिमान न हो सकी , क्योंकि उन्होंने प्रारंभ में जब भी सृष्टि की तो सिर्फ पुरुष वर्ग को उत्पन्न किया | जो भी पुरुष हुए उन्होंने सृष्टि में कोई रुचि नहीं दिखाई | अपनी बनाई हुई सृष्टि क
07 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*चौरासी योनियों में सर्वश्रेष्ठ एवं सबसे सुंदर शरीर मनुष्य का मिला | इस सुंदर शरीर को सुंदर बनाए रखने के लिए मनुष्य को ही उद्योग करना पड़ता है | सुंदरता का अर्थ शारीरिक सुंदरता नहीं वरन पवित्रता एवं स्वच्छता से हैं | पवित्रता जीवन को स्वच्छ एवं सुंदर बनाती है | पवित्रता, शुद्धता, स्वच्छता मानव-जीवन
07 अक्तूबर 2018
12 अक्तूबर 2018
*पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।* *प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥* *हमारे सनातन धर्म में नवरात्र पर्व के तीसरे दिन महामाया चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है | चंद्रघंटा की साधना करने से मनुष्य को प्रत्येक सुख , सुविधा , ऐश्वर्य , धन एवं लक्ष्मी की प्राप्
12 अक्तूबर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x