माँ कूष्माण्डा एवं मातृशक्ति :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

13 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (89 बार पढ़ा जा चुका है)

माँ कूष्माण्डा एवं मातृशक्ति :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च !* *दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे !!* *नवरात्र के चतुर्थ दिवस महामाया कूष्माण्डा का पूजन किया जाता है | "कूष्माण्डेति चतुर्थकम्" | सृष्टि के सबसे ज्वलनशील सूर्य ग्रह के अंतस्थल में निवास करने वाली महामाया का नाम कूष्माण्डा है , जिसका अर्थ है कि :- जिनके स्मित हास्य से ब्रहाण्ड की उत्पत्ति हुई है वही है - "कूष्माण्डा" | ऐसा पुराणों का मानना है कि जब सृष्टि नहीं थी चारों ओर अंधकार व्याप्त था महामाया कूष्माण्डा ने अपने ईषत् हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी इसीलिए इनको आदि स्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है | प्रथम स्वरूप "शैलपुत्री" के बाद विकासक्रम में "ब्रह्मचारिणी" एवं "चन्द्रघण्टा" के बाद महामाया के चौथे स्वरूप "कूष्माण्डा" का पूजन करने का अर्थ यही है कि बिना कूष्माण्डा माँ के सृष्टि की कल्पना करना ही व्यर्थ है | क्योंकि बिना बिना इनकी कृपा से प्रजनन नहीं हो सकता इसी विशेषता के कारण महामाया को जगतजननी कहा जाता है | अष्टभुजा धारी कूष्माण्डा माता के दाहिने प्रथम हाथ में कुंभ (घड़ा) है जिसे महामाया ने अपनी कोख से लगा रखा है , यह गर्भावस्था का प्रतीक है | यह सिंह पर सवार शांत मुद्रा में रहने वाली भक्तवत्सला हैं |* *आज भी यदि लोग चाहें तो कूष्माण्डा माता का दर्शन कर सकते हैं | आवश्यकता है भावना की , विकृत मानसिकता से उबरने की | कूष्माण्डा का अर्थ हुआ जन्मदात्री | प्रत्येक नारी कन्यारूप में जन्म लेकर "शैलपुत्री" के रूप में जीवन प्रारम्भ करके विवाहोपरान्त गर्भधारण करके कूष्माण्डा माता के रूप में पूजनीय होती है | आज पुरुष समाज बड़े प्रेम से दुर्गापूजा महोत्सव में भागीदारी करता हुआ देखा जा सकता है परंतु घर में बैठी महालक्ष्मी का सम्मान नहीं कर पाता | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि जो लोग घर की नारी का सम्मान न करके उन्हें उपेक्षित या तिरस्कृत करते रहते हैं उनके द्वारा भगवती का पूजन किया जाय तो यह निश्चित है कि वह फलदायी नहीं हो सकता | एक नारी अपने जीवनकाल में भगवती के नौ रूपों को प्राप्त होती है | प्रत्येक मनुष्य को एक नारी कूष्माण्डा बनकर जन्म देती है | जीवन भर विभिन्न रूपों में पुरुष वर्ग को समर्पित रहने वाली नारी का दुर्भाग्य ही है वह पुरुष से हार जाती है | पुरुष वर्ग एक नारी पर शासन करके गौरवान्वित भले हो ले परंतु यह उसका गौरव नहीं कहा जा सकता | नारी सदैव से सम्माननीय रही है , नारी का सम्मान करना ही चाहिए |* *एक नारी जब तक कूष्माण्डा (गर्भ धारण करने वाली) नहीं बनती तब तक सृष्टि का सृजन नहीं हो सकता ! अत: नारी सम्मान करते रहें |*

अगला लेख: सर्वपितृ अमावस्या पर अवश्य करें श्राद्ध :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
01 अक्तूबर 2018
*इस सृष्टि का सृजन करके हमेम इस धरा धाम पर भेजने वाली उस परमसत्ता को ईश्वर कहा जाता है | ईश्वर के बिना इस सृष्टि की परिकल्पना करना ही व्यर्थ है | कहा भी जाता है कि मनुष्य के करने से कुछ नहीं होता जो कुछ करता है ईश्वर ही करता है | वह ईश्वर जो सर्वव्यापी है और हमारे पल पल के कर्मों का हिसाब रखता है |
01 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
वि
*सनातन काल से हमारे विद्वानों ने संपूर्ण विश्व को एक नई दिशा प्रदान की | आज यदि हमारे पास अनेकानेक ग्रंथ , उपनिषद एवं शास्त्र उपलब्ध हैं तो उसका कारण है हमारे विद्वान ! जिन्होंने अपनी विद्वता का परिचय देते हुए इन शास्त्रों को लिखा | जिसका लाभ हम आज तक ले रहे हैं | जिस प्रकार एक धनी को धनवान कहा जात
07 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*सनातन काल से यदि भारतीय इतिहास दिव्य रहा है तो इसका का कारण है भारतीय साहित्य | हमारे ऋषि मुनियों ने ऐसे - ऐसे साहित्य लिखें जो आम जनमानस के लिए पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाते रहे हैं | हमारे सनातन साहित्य मनुष्य को जीवन जीने की दिशा प्रदान करते हुए दिखाई पड़ते हैं | कविकुल शिरोमणि परमपूज्यपाद गोस्वा
07 अक्तूबर 2018
01 अक्तूबर 2018
*मनुष्य इस पृथ्वी पर इकलौता प्राणी है जिसमें अन्य प्राणियों की अपेक्षा सोंचने - समझने के लिए विवेकरूपी एक अतिरिक्त गुण ईश्वर ने प्रदान किया है | अपने विवेक से ही मनुष्य निरन्तर प्रगति पथ पर अग्रसर होता रहा है | मनुष्य को कब क्या करना चाहिये इसका निर्णय विवेक ही करता है | अपने विवेक का प्रयोग जिसने स
01 अक्तूबर 2018
22 अक्तूबर 2018
*सनातन धर्म में मनाए जाने वाले प्रत्येक त्योहारों में एक रहस्य छुपा हुआ है | नौ दिन का दिव्य नवरात्र मनाने के बाद दशमी के दिन दशहरा एवं विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है | शक्ति की उपासना का पर्व शारीेय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल
22 अक्तूबर 2018
02 अक्तूबर 2018
*सृष्टि के अखिलनियंता देवों के देव महादेव को शिव कहा जाता है | शिव का अर्थ होता है कल्याणकारी | मानव जीवन में सबकुछ कल्याणमय हो इसके लिए शिवतत्व का होना परम आवश्यक है | शिवतत्व के बिना जीवन एक क्षण भी नहीं चल सकता | शिव क्या हैं ?? मानस में पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान शिव को विश्वास का स्
02 अक्तूबर 2018
11 अक्तूबर 2018
*सृष्टि के प्रारम्भ में विराट पुरुष से वेदों का प्रदुर्भाव हुआ | वेदों ने मानव के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है | जीवन के प्रत्येक अंगों का प्रतिपादन वेदों में किया गया है | मानव जीवन पर वेदों का इतना प्रभाव था कि एक युग को वैदिक युग कहा गया | परंतु वेदों में वर्णित श्लोकों का अर्थ न निकालकर क
11 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*इस धराधाम पर जीवन जीने के लिए हमारे महापुरुषों ने मनुष्य के लिए कुछ नियम निर्धारित किए हैं | इन नियमों के बिना कोई भी मनुष्य परिवार , समाज व राष्ट्र का सहभागी नहीं कहा जा सकता | जीवन में नियमों का होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि बिना नियम के कोई भी परिवार , समाज , संस्था , या देश को नहीं चलाया जा सक
07 अक्तूबर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x