माँ कूष्माण्डा एवं मातृशक्ति :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

13 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (64 बार पढ़ा जा चुका है)

माँ कूष्माण्डा एवं मातृशक्ति :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च !* *दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे !!* *नवरात्र के चतुर्थ दिवस महामाया कूष्माण्डा का पूजन किया जाता है | "कूष्माण्डेति चतुर्थकम्" | सृष्टि के सबसे ज्वलनशील सूर्य ग्रह के अंतस्थल में निवास करने वाली महामाया का नाम कूष्माण्डा है , जिसका अर्थ है कि :- जिनके स्मित हास्य से ब्रहाण्ड की उत्पत्ति हुई है वही है - "कूष्माण्डा" | ऐसा पुराणों का मानना है कि जब सृष्टि नहीं थी चारों ओर अंधकार व्याप्त था महामाया कूष्माण्डा ने अपने ईषत् हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी इसीलिए इनको आदि स्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है | प्रथम स्वरूप "शैलपुत्री" के बाद विकासक्रम में "ब्रह्मचारिणी" एवं "चन्द्रघण्टा" के बाद महामाया के चौथे स्वरूप "कूष्माण्डा" का पूजन करने का अर्थ यही है कि बिना कूष्माण्डा माँ के सृष्टि की कल्पना करना ही व्यर्थ है | क्योंकि बिना बिना इनकी कृपा से प्रजनन नहीं हो सकता इसी विशेषता के कारण महामाया को जगतजननी कहा जाता है | अष्टभुजा धारी कूष्माण्डा माता के दाहिने प्रथम हाथ में कुंभ (घड़ा) है जिसे महामाया ने अपनी कोख से लगा रखा है , यह गर्भावस्था का प्रतीक है | यह सिंह पर सवार शांत मुद्रा में रहने वाली भक्तवत्सला हैं |* *आज भी यदि लोग चाहें तो कूष्माण्डा माता का दर्शन कर सकते हैं | आवश्यकता है भावना की , विकृत मानसिकता से उबरने की | कूष्माण्डा का अर्थ हुआ जन्मदात्री | प्रत्येक नारी कन्यारूप में जन्म लेकर "शैलपुत्री" के रूप में जीवन प्रारम्भ करके विवाहोपरान्त गर्भधारण करके कूष्माण्डा माता के रूप में पूजनीय होती है | आज पुरुष समाज बड़े प्रेम से दुर्गापूजा महोत्सव में भागीदारी करता हुआ देखा जा सकता है परंतु घर में बैठी महालक्ष्मी का सम्मान नहीं कर पाता | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि जो लोग घर की नारी का सम्मान न करके उन्हें उपेक्षित या तिरस्कृत करते रहते हैं उनके द्वारा भगवती का पूजन किया जाय तो यह निश्चित है कि वह फलदायी नहीं हो सकता | एक नारी अपने जीवनकाल में भगवती के नौ रूपों को प्राप्त होती है | प्रत्येक मनुष्य को एक नारी कूष्माण्डा बनकर जन्म देती है | जीवन भर विभिन्न रूपों में पुरुष वर्ग को समर्पित रहने वाली नारी का दुर्भाग्य ही है वह पुरुष से हार जाती है | पुरुष वर्ग एक नारी पर शासन करके गौरवान्वित भले हो ले परंतु यह उसका गौरव नहीं कहा जा सकता | नारी सदैव से सम्माननीय रही है , नारी का सम्मान करना ही चाहिए |* *एक नारी जब तक कूष्माण्डा (गर्भ धारण करने वाली) नहीं बनती तब तक सृष्टि का सृजन नहीं हो सकता ! अत: नारी सम्मान करते रहें |*

अगला लेख: सर्वपितृ अमावस्या पर अवश्य करें श्राद्ध :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
11 अक्तूबर 2018
*पराम्बा जगदंबा जगत जननी भगवती मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है ब्रह्मचारिणी | जिसका अर्थ होता है तपश्चारिणी अर्थात तपस्या करने वाली | महामाया ब्रह्मचारिणी नें घोर तपस्या करके भगवान शिव को अपने पति के रुप में प्राप्त किया और भगवान शिव के वामभाग में विराजित होकर के पतिव्रताओं में अग्रगण्य बनीं | इसी प्र
11 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*इस सकल सृष्टि में हर प्राणी प्रसन्न रहना चाहता है , परंतु प्रसन्नता है कहाँ ???? लोग सामान्यतः अनुभव करते हैं कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि प्रसन्नता के मुख्य सूचक हैं | यह सत्य है कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि अल्प समय के लिए एक स्तर की संतुष्टि दे सकती है | परन्तु यदि यह कथन पूर्णतयः सत्य था तब वो सभी जि
07 अक्तूबर 2018
08 अक्तूबर 2018
*मृत्युलोक में जन्म लेने के बाद मनुष्य तीन प्रकार के ऋणों से ऋणी हो जाता है यथा :- देवऋण , ऋषिऋण एवं पितृऋण | पूजन पाठ एवं दीपदान करके मनुष्य देवऋण से मुक्त हो सकता है , वहीं जलदान करके ऋषिऋण एवं पिंडदान (श्राद्ध) करके पितृऋण से मुक्त हुआ जा सकता है | प्रत्येक वर्ष आश्विनमास के कृष्णपक्ष में पितरों
08 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*चौरासी योनियों में सर्वश्रेष्ठ एवं सबसे सुंदर शरीर मनुष्य का मिला | इस सुंदर शरीर को सुंदर बनाए रखने के लिए मनुष्य को ही उद्योग करना पड़ता है | सुंदरता का अर्थ शारीरिक सुंदरता नहीं वरन पवित्रता एवं स्वच्छता से हैं | पवित्रता जीवन को स्वच्छ एवं सुंदर बनाती है | पवित्रता, शुद्धता, स्वच्छता मानव-जीवन
07 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि को गतिमान करने के लिए कई बार सृष्टि की रचना की , परंतु उनकी बनाई सृष्टि गतिमान न हो सकी , क्योंकि उन्होंने प्रारंभ में जब भी सृष्टि की तो सिर्फ पुरुष वर्ग को उत्पन्न किया | जो भी पुरुष हुए उन्होंने सृष्टि में कोई रुचि नहीं दिखाई | अपनी बनाई हुई सृष्टि क
07 अक्तूबर 2018
02 अक्तूबर 2018
*हमारे सनातन ग्रंथों में इस संसार को मायामय के साथ साथ मुसाफिरखाना भी कहा गया है | मुसाफिरखाना अर्थात जहां यात्रा के अंतर्गत एक - दो रात्रि व्यतीत करते हैं | कहने का तात्पर्य यह संसार एक किराए का घर है और इस किराए के घर को एक दिन छोड़ कर सबको जाना ही पड़ता है | इतिहास गवाह है कि संसार में जो भी आया
02 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*इस धराधाम पर जीवन जीने के लिए हमारे महापुरुषों ने मनुष्य के लिए कुछ नियम निर्धारित किए हैं | इन नियमों के बिना कोई भी मनुष्य परिवार , समाज व राष्ट्र का सहभागी नहीं कहा जा सकता | जीवन में नियमों का होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि बिना नियम के कोई भी परिवार , समाज , संस्था , या देश को नहीं चलाया जा सक
07 अक्तूबर 2018
23 अक्तूबर 2018
*सकल संसार में जितने भी प्राणी हुए हैं सब अपने-अपने गुण लेकर पैदा हो पैदा होते हैं | जड़ चेतन सबके अपने-अपने गुण हैं | सोना, चांदी, सर्प, गाय, गेहूं-चावल आदि सबके अपने एक विशेष गुण हैं | अपने अपने विशेष गुणों के कारण सबकी अलग-अलग पहचान है | उनके गुणों में कभी बदलाव नहीं होता | जैसे गाय कभी मांस नही
23 अक्तूबर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x