आवश्यक है कन्याओं का संरक्षण :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

20 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (60 बार पढ़ा जा चुका है)

आवश्यक है कन्याओं का संरक्षण :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*नवरात्र के छठे दिन मैया कात्यायनी कात्यायन ऋषि के यहाँ कन्या बनकर प्रकट हुईं | नारी का जन्म कन्यारूप में ही होता है इसीलिए सनातन धर्म ने कन्या की पूजा का विधान बनाया है | सनातन धर्म के पुरोधा यह जानते थे कि जिस प्रकार एक पौधे से विशाल वृक्ष तैयार होता है उसी प्रकार एक कन्या ही नारी रूप में परिवर्तित होकर संपूर्ण संसार को अपनी ममता के आंचल में आश्रय देती है | जिस प्रकार मनुष्य किसी वृक्ष का छोटा पौधा लगा करके उसकी देखभाल तब तक करता है जब तक कि वह बड़ा ना हो जाए , ठीक उसी प्रकार कन्या का संरक्षण मनुष्य तब तक करता है जब तक वह विवाह करके अपने घर नहीं चली जाती | हमारे पुराणों में दान की अनेक विधियां बताई गयी हैं | विशेषकर कलयुग में दान का बड़ा महत्व है | कहते हैं कि धर्म चार पैरों वाला था परंतु कलयुग में दान स्वरूप उसका एक ही पैर बचा है , इसलिए मनुष्य को दान करते रहना चाहिए | सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ कन्यादान कहा गया है | ऐसा भी लिखा है कि जिस मनुष्य के हाथों कन्यादान नहीं होता है उस मनुष्य की सद्गति नहीं होती है | शायद इसीलिए प्राचीन परंपरा में किसी भी जाति की कन्या के विवाह के समय गांव के प्रायः सभी लोग उस कन्या का पूजन जाया करते थे | सनातन धर्म में कन्या पूजन का विधान बनाते हुए सृष्टि के संरक्षण का कार्य किया है , क्योंकि बिना कन्या की सृष्टि की कल्पना करना व्यर्थ है | एक कन्या ही पुत्री , बहन , पत्नी बन करके मां बनती है | कन्या के पूरे जीवन काल में अनेकों रूप देखने को मिलते हैं इसलिए कन्या का संरक्षण बहुत आवश्यक है |* *आज समय बदल रहा है | कन्याओं ने अपनी प्रतिभा दिखाते हुए इस संसार के प्रायः सभी क्षेत्रों में अपना परचम लहराया है | कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं बचा है जहां कन्याओं ने अपनी प्रतिभा न दिखलाई हो | इतना सब होने के बाद भी कन्याओं का जीवन सुरक्षित नहीं दिख रहा है | जिस का सबसे बड़ा कारण मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" जो देख पा रहा हूं उसके अनुसार दहेज रूपी दानव की भूमिका अधिक है | आज दहेज रूपी दानव अपने वीभत्स रूप में कन्याओं का जीवन निगल रहा है | इसी दहेज रूपी दानव के भय के कारण कन्या भ्रूण हत्या की घटनाएं बढ़ गई है | यदि पिता के द्वारा किसी तरह अपनी जमीन जायदाद बेंच कर विवाह भी कर दिया जाता है तो ससुराल वाले दहेज की कमी बताकरके उसकी हत्या कर देते हैं | ऐसी अनेक घटनाएं आज समाज में देखने को मिल रही हैं | ऐसा करने वाले शायद यह नहीं विचार कर पा रहे हैं कि यदि कन्या ही नहीं रह जाएगी तो आगे यह सृष्टि संतुलित कैसे रहेगी ! क्योंकि ब्रह्मा जी ने कई बार सृष्टि का सृजन किया परंतु जब तक मैथुनी सृष्टि नहीं की उनकी सृष्टि तब तक गतिमान नहीं हो पाई | जब ब्रह्मा जी बिना नारी के सृष्टि को गतिमान नहीं कर सके तो हम बिना नारी जाति के इस सृष्टि के गतिमान होने की कल्पना भी कैसे कर सकते हैं | आज कन्याओं की जो दुर्दशा है उसका एक कारण इंटरनेट एवं सोशल मीडिया भी है ! जहां आज के नवयुवक दर्शनीय / अदर्शनीय कार्यक्रम देख कर के अपनी मानसिकता को विकृत करते हुए कन्याओं के लिए काल बन रहे हैं | इसी प्रकार कन्याओं के ऊपर कुठाराघात होता रहा तो वह दिन दूर नहीं है जब इस संसार में अधिकतर लोग बिना पत्नी के ही रह जाएंगे और सृष्टि का संचालन प्रभावित हो जाएगा |* *मैया कात्यायनी की पूजा आज सभी कर रहे हैं , परंतु शायद उतनी ही देर के लिए जब तक पांडाल में रहते हैं | ऐसी विचारधारा से उबर कर बाहर आना पड़ेगा |*

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यही सबसे बड़ी विडम्बना है. जहाँ पे स्त्री की पूजा देवी के रूप में होती है उस देश में दहेज़ का दानव अभी भी जिन्दा है.

आदरणीय अमिताभ जी , आपकी बातों से पूर्णत: सहमत हूँ

बुक रिवर प्रेस
22 अक्तूबर 2018

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