सतसंग :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

20 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (40 बार पढ़ा जा चुका है)

सतसंग :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में संगति का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है | जिस प्रकार मनुष्य कुसंगत में पड़कर के नकारात्मक हो जाता है उसी प्रकार अच्छी संगति अर्थात सत्संग में पढ़कर की मनुष्य का व्यक्तित्व बदल जाता है | सत्संग का मानव जीवन पर इतना अधिक प्रभाव पड़ता है कि इसी के माध्यम से मनुष्य को समस्याओं का समाधान तो मिल ही जाता है साथ ही उसे जीवन में आगे बढ़ने का मार्गदर्शन भी प्राप्त होता रहता है | मनुष्य का मन आग की तरह होता है जिस प्रकार अग्नि में दुर्गंधयुक्त प्लॉस्टिक या रबर डालने से उस की दुर्गंध चारों ओर फैल जाती है उसी प्रकार यदि अग्नि में सुगंधित चंदन डाल दिया जाए तो चारों तरफ सुगंधी फैल जाती है | ठीक उसी प्रकार हमारे मनरूपी हवनकुंड में कैसी सामग्री पड़ रही है ? कैसे विचार उत्पन्न हो रहे हैं ? उसी के अनुसार हमारा जीवन नकारात्मक एवं सकारात्मक बनता चला जाता है | यदि हमारे मन में अच्छे विचार पड़ रहे हैं तो जीवन आनंदित होगा , और यदि नकारात्मक विचार आ रहे हैं तो जीवन में चिंता , तनाव आदि का प्रभाव फैलने लगता है | मनुष्य का जीवन उसके परिवार के परिवेश के ऊपर आधारित होता है | जिस परिवार के लोग सत्संग किया करते हैं उस परिवार का बालक भी सत्संग करने वाला बनता है , और जिस परिवार में सदैव लड़ाई - झगड़े एवं तनाव होता है वहां का बालक सत्संग से विमुख होकर के तनावग्रस्त रहने लगता है और उसे चारों ओर से समस्याएं घेरने लगती हैं |* *आज प्राय: लोग सत्संग करने का मतलब सिर्फ कथा एवं प्रवचन प्रवचन सुनने से लगाने लगे हैं | जबकि मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि सत्संग करने का मतलब सिर्फ प्रवचन सुनना नहीं हुआ , बल्कि सत्संग का अर्थ है कि :- आप किस तरह की पुस्तके पढ़ रहे हैं ? किस तरह की बातें सोच रहे हैं ? किस प्रकार के लोगों से मिल रहे हैं ? और जो भी कार्य कर रहे हैं उसका हमारे जीवन पर कैसा प्रभाव पड़ रहा है ? वह सभी संग - सानिध्य - संपर्क के अंतर्गत आते हैं | यदि संगति का प्रभाव सकारात्मक पड़ा है तो सत्संग हुआ , और यदि संगति का प्रभाव नकारात्मक रूप से पड़ रहा है तो वह कुसंग कहा जाएगा | मानव जीवन में सत्संग का प्रभाव इतना प्रभावशाली होता है कि इससे व्यक्ति के जीवन की दिशा धारा को पूर्णत: बदला जा सकता है | केवल अध्यात्म क्षेत्र में ही नहीं बल्कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सत्संग चाहिए , क्योंकि कुसंग से व्यक्ति भटक जाता है और मनोवांछित लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाता |सत्संग का ही प्रभाव है कि व्यक्ति थोड़े से समय के लिए भी यदि किसी महापुरुष की संगति में आ जाता है तो उसका जीवन परिवर्तित हो जाता है | बाबा जी लिखते हैं :- एक घरी आधी घरी आधिहुं में पुनि आध ! तुलसी संगत साधु की हरइ कोटि अपराध !! अत: मनुष्य को सतसंग करते रहना चाहिए |* *मनुष्य को यह सदैव याद रखना चाहिए कि हम जिन लोगों की संगति में बैठ रहे हैं वे हमें हमारे सक्ष्य तक ले जा रहे बैं या हमें भटका रहे हैं | इस पर विचार करते हुए मनुष्य को सतसंग करते रहना चाहिए |*

सतसंग :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

अगला लेख: सर्वपितृ अमावस्या पर अवश्य करें श्राद्ध :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
08 अक्तूबर 2018
*मृत्युलोक में जन्म लेने के बाद मनुष्य तीन प्रकार के ऋणों से ऋणी हो जाता है यथा :- देवऋण , ऋषिऋण एवं पितृऋण | पूजन पाठ एवं दीपदान करके मनुष्य देवऋण से मुक्त हो सकता है , वहीं जलदान करके ऋषिऋण एवं पिंडदान (श्राद्ध) करके पितृऋण से मुक्त हुआ जा सकता है | प्रत्येक वर्ष आश्विनमास के कृष्णपक्ष में पितरों
08 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*आज हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं | यही हमारे लिए घातक एवं पतन का कारण बन रहा है | सोलह संस्कारों का विधान सनातनधर्म में बताया गया है | उनमें से एक संस्कार "उपनयन संस्कार" अर्थात यज्ञोपवीत -संस्कार का विधान भी है | जिसे आज की युवा पीढी स्वीकार करने से कतरा रही है | जबकि यज्ञोपवीत द्विजत्व का
07 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*सनातन काल से यदि भारतीय इतिहास दिव्य रहा है तो इसका का कारण है भारतीय साहित्य | हमारे ऋषि मुनियों ने ऐसे - ऐसे साहित्य लिखें जो आम जनमानस के लिए पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाते रहे हैं | हमारे सनातन साहित्य मनुष्य को जीवन जीने की दिशा प्रदान करते हुए दिखाई पड़ते हैं | कविकुल शिरोमणि परमपूज्यपाद गोस्वा
07 अक्तूबर 2018
11 अक्तूबर 2018
*पराम्बा जगदंबा जगत जननी भगवती मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है ब्रह्मचारिणी | जिसका अर्थ होता है तपश्चारिणी अर्थात तपस्या करने वाली | महामाया ब्रह्मचारिणी नें घोर तपस्या करके भगवान शिव को अपने पति के रुप में प्राप्त किया और भगवान शिव के वामभाग में विराजित होकर के पतिव्रताओं में अग्रगण्य बनीं | इसी प्र
11 अक्तूबर 2018
05 अक्तूबर 2018
*इस संसार में मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ इसलिए माना गया है क्योंकि मनुष्य में निर्णय लेने की क्षमता के साथ परिवार समाज व राष्ट्र के प्रति एक अपनत्व की भावना से जुड़ा होता है | मनुष्य का व्यक्तित्व उसके आचरण के अनुसार होता है , और मनुष्य का आचरण उसकी भावनाओं से जाना जा सकता है | जिस मनुष्य की जैसी भावना ह
05 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के छठे दिन मैया कात्यायनी कात्यायन ऋषि के यहाँ कन्या बनकर प्रकट हुईं | नारी का जन्म कन्यारूप में ही होता है इसीलिए सनातन धर्म ने कन्या की पूजा का विधान बनाया है | सनातन धर्म के पुरोधा यह जानते थे कि जिस प्रकार एक पौधे से विशाल वृक्ष तैयार होता है उसी प्रकार एक कन्या ही नारी रूप में परिवर्ति
20 अक्तूबर 2018
13 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पावन पर्व पर आदिशक्ति भगवती दुर्गा के पूजन का महोत्सव शहरों से लेकर गाँव की गलियों तक मनाया जा रहा है | जगह - जगह पांडाल लगाकर मातारानी का पूजन करके नारीशक्ति की महत्ता का दर्शन किया जाता है | माता जगदम्बा के अनेक रूप हैं , कहीं ये दुर्गा तो कहीं काली के रूप में पूजी जाती हैं | जहाँ दुर्
13 अक्तूबर 2018
27 अक्तूबर 2018
*प्राचीनकाल में मंदिर एक ऐसा स्थान होता था जहां बैठ कर समाज की गतिविधियां संचालित की जाती थी , वहीं से समाज को आगे बढ़ाने के लिए योजनाएं बनाई जाती थी | समाज के लिए नीति - निर्धारण का कार्य यहीं से संचालित होता था | हमारे वैदिक काल की शिक्षा व्यवस्था ऐसी थी जहां एक गुरु का आश्रम होता था , और उस आश्रम
27 अक्तूबर 2018
13 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पावन पर्व पर आदिशक्ति भगवती दुर्गा के पूजन का महोत्सव शहरों से लेकर गाँव की गलियों तक मनाया जा रहा है | जगह - जगह पांडाल लगाकर मातारानी का पूजन करके नारीशक्ति की महत्ता का दर्शन किया जाता है | माता जगदम्बा के अनेक रूप हैं , कहीं ये दुर्गा तो कहीं काली के रूप में पूजी जाती हैं | जहाँ दुर्
13 अक्तूबर 2018
11 अक्तूबर 2018
*सृष्टि के प्रारम्भ में विराट पुरुष से वेदों का प्रदुर्भाव हुआ | वेदों ने मानव के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है | जीवन के प्रत्येक अंगों का प्रतिपादन वेदों में किया गया है | मानव जीवन पर वेदों का इतना प्रभाव था कि एक युग को वैदिक युग कहा गया | परंतु वेदों में वर्णित श्लोकों का अर्थ न निकालकर क
11 अक्तूबर 2018
12 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पावन अवसर पर चल रही नारीगाथा पर आज एक विषय पर सोंचने को विवश हो गया कि नारियों पर हो रहे अत्याचारों के लिए दोषी किसे माना जाय ??? पुरुषवर्ग को या स्वयं नारी को ??? परिणाम यह निकला कि कहीं न कहीं से नारी की दुर्दशा के लिए नारी ही अधिकतर जिम्मेदार है | जब अपने साथ कम दहेज लेकर कोई नववधू सस
12 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*इस सकल सृष्टि में हर प्राणी प्रसन्न रहना चाहता है , परंतु प्रसन्नता है कहाँ ???? लोग सामान्यतः अनुभव करते हैं कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि प्रसन्नता के मुख्य सूचक हैं | यह सत्य है कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि अल्प समय के लिए एक स्तर की संतुष्टि दे सकती है | परन्तु यदि यह कथन पूर्णतयः सत्य था तब वो सभी जि
07 अक्तूबर 2018
12 अक्तूबर 2018
*पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।* *प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥* *हमारे सनातन धर्म में नवरात्र पर्व के तीसरे दिन महामाया चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है | चंद्रघंटा की साधना करने से मनुष्य को प्रत्येक सुख , सुविधा , ऐश्वर्य , धन एवं लक्ष्मी की प्राप्
12 अक्तूबर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x