विजयादशमी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

22 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (59 बार पढ़ा जा चुका है)

विजयादशमी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मनाए जाने वाले प्रत्येक त्योहारों में एक रहस्य छुपा हुआ है | नौ दिन का दिव्य नवरात्र मनाने के बाद दशमी के दिन दशहरा एवं विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है | शक्ति की उपासना का पर्व शारीेय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है | इस अवसर पर लोग नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा के अलग-अलग रूपों की उपासना करके शक्तिशाली बने रहने की कामना करते हैं | भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है | दशहरे का उत्सव भी शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला उत्सव है | दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा हमें देता है | रावण से युद्ध करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जब उसका वध करने का रास्ता नहीं पाते हैं तब नौ दिन तक महामाया का आराधन बड़ी भक्ति के साथ करते हैं | महा नवमी के दिन महामाया प्रकट हो कर के भगवान श्रीराम को रावण का वध करने का मार्ग सुझाती है और दशमी के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम रावण का वध करते हैं | बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में आज देश में ही नहीं विदेशों में भी विजयदशमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | दशहरे का सांस्कृतिक पहलू भी है | भारत कृषि प्रधान देश है जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का ठिकाना हमें नहीं रहता | इस प्रसन्नता के अवसर पर वह भगवान की कृपा को मानता है और उसे प्रकट करने के लिए वह उसका पूजन करता है |* *आज संपूर्ण भारत देश में लोग यत्र तत्र सर्वत्र विजयदशमी के दिन विशाल मेले का आयोजन करते हैं | रावण का पुतला जलाया जाता लोग बहुत प्रेम से शक्ति आराधना करने के बाद बुराई के प्रतीक रावण का पुतला दहन करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं | विचार कीजिए त्रेतायुग के एक रावण ने तीनो त्रिलोक को कंपा रखा था तब भगवान श्री राम ने उसका वध करके लोगों को सुख प्रदान किया था , परंतु आज तो समाज में इतने रावण घूम रहे हैं जिनका वेष तो राम का है परंतु उनके आचरण रावण से भी ज्यादा गिरे हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" यह कहना चाहूंगा कि रावण वध का उत्सव विजयादशमी मनाना तभी सार्थक होगा जब हम अपने भीतर बैठे हुई दस माहपापों का शमन कर सकें | आज समाज के प्रत्येक व्यक्ति के अंदर एक रावण पल रहा है जिसे मारने के लिए भगवान राम नहीं आएंगे बल्कि इसका वथ हमें स्वयं करना होगा , जिससे कि हमारा समाज और देश स्वयं में प्रसन्नता का आभास कर सकें | विश्वास मानिए जिस दिन हमारे अंदर बैठा हुआ रावण समाप्त हो जाएगा उसी दिन भारत देश में पुनः राम राज्य की स्थापना स्वयं हो जाएगी | हम विजयादशमी के दिन रावण के पुतले का दहन तो कर देते हैं परंतु अपने अंदर बैठे रावण का पोषण करते रहते हैं | जब तक इस रावण का वध नहीं होता है तब तक विजयदशमी मनाने का कोई अर्थ नहीं है |* *नौ दिन के नवरात्र में शक्ति संचय करते हुए प्रत्येक मनुष्य को अपने भीतर विद्यमान दश महा पापों का समन करके विजयदशमी का पर्व मनाना चाहिए |*

अगला लेख: सर्वपितृ अमावस्या पर अवश्य करें श्राद्ध :---- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
24 अक्तूबर 2018
*हमारे पुराणों में वर्णित व्याख्यानों के अनुसार सनातन हिन्दू धर्म में अनेक तिथियों को विशेष महत्व देते हुए विशेष पर्व मनाया जाता है | इस संसार को प्रकाशित करने वाले जिन दो प्रकाश पुञ्जों का विशेष योगदान है उनमें से एक है सूर्य और दूसरा है चन्द्रमा | चन्द्रमा की चाँदनी में रात्रि अपना श्रृंगार करती ह
24 अक्तूबर 2018
13 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पावन पर्व पर आदिशक्ति भगवती दुर्गा के पूजन का महोत्सव शहरों से लेकर गाँव की गलियों तक मनाया जा रहा है | जगह - जगह पांडाल लगाकर मातारानी का पूजन करके नारीशक्ति की महत्ता का दर्शन किया जाता है | माता जगदम्बा के अनेक रूप हैं , कहीं ये दुर्गा तो कहीं काली के रूप में पूजी जाती हैं | जहाँ दुर्
13 अक्तूबर 2018
07 अक्तूबर 2018
*इस सकल सृष्टि में हर प्राणी प्रसन्न रहना चाहता है , परंतु प्रसन्नता है कहाँ ???? लोग सामान्यतः अनुभव करते हैं कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि प्रसन्नता के मुख्य सूचक हैं | यह सत्य है कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि अल्प समय के लिए एक स्तर की संतुष्टि दे सकती है | परन्तु यदि यह कथन पूर्णतयः सत्य था तब वो सभी जि
07 अक्तूबर 2018
11 अक्तूबर 2018
*पराम्बा जगदंबा जगत जननी भगवती मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है ब्रह्मचारिणी | जिसका अर्थ होता है तपश्चारिणी अर्थात तपस्या करने वाली | महामाया ब्रह्मचारिणी नें घोर तपस्या करके भगवान शिव को अपने पति के रुप में प्राप्त किया और भगवान शिव के वामभाग में विराजित होकर के पतिव्रताओं में अग्रगण्य बनीं | इसी प्र
11 अक्तूबर 2018
13 अक्तूबर 2018
*सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च !* *दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे !!* *नवरात्र के चतुर्थ दिवस महामाया कूष्माण्डा का पूजन किया जाता है | "कूष्माण्डेति चतुर्थकम्" | सृष्टि के सबसे ज्वलनशील सूर्य ग्रह के अंतस्थल में निवास करने वाली महामाया का नाम कूष्माण्डा है , जिसका अर्थ है कि :- जि
13 अक्तूबर 2018
12 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पावन अवसर पर चल रही नारीगाथा पर आज एक विषय पर सोंचने को विवश हो गया कि नारियों पर हो रहे अत्याचारों के लिए दोषी किसे माना जाय ??? पुरुषवर्ग को या स्वयं नारी को ??? परिणाम यह निकला कि कहीं न कहीं से नारी की दुर्दशा के लिए नारी ही अधिकतर जिम्मेदार है | जब अपने साथ कम दहेज लेकर कोई नववधू सस
12 अक्तूबर 2018
08 अक्तूबर 2018
*मृत्युलोक में जन्म लेने के बाद मनुष्य तीन प्रकार के ऋणों से ऋणी हो जाता है यथा :- देवऋण , ऋषिऋण एवं पितृऋण | पूजन पाठ एवं दीपदान करके मनुष्य देवऋण से मुक्त हो सकता है , वहीं जलदान करके ऋषिऋण एवं पिंडदान (श्राद्ध) करके पितृऋण से मुक्त हुआ जा सकता है | प्रत्येक वर्ष आश्विनमास के कृष्णपक्ष में पितरों
08 अक्तूबर 2018
11 अक्तूबर 2018
*सनातन धर्म की दिव्यता का प्रतीक पितृपक्ष आज सर्वपितृ अमावस्या के साथ सम्पन्न हो गया | सोलह दिन तक हमारे पूर्वजों / पितरों के निमित्त चलने वाले इस विशेष पक्ष में सभी सनातन धर्मावलम्बी दिवंगत हुए पूर्वजों के प्रति श्रद्धा दर्शाते हुए श्राद्ध , तर्पण एवं पिंडदान आदि करके उनको तृप्त करने का प्रयास करते
11 अक्तूबर 2018
11 अक्तूबर 2018
*सृष्टि के प्रारम्भ में विराट पुरुष से वेदों का प्रदुर्भाव हुआ | वेदों ने मानव के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है | जीवन के प्रत्येक अंगों का प्रतिपादन वेदों में किया गया है | मानव जीवन पर वेदों का इतना प्रभाव था कि एक युग को वैदिक युग कहा गया | परंतु वेदों में वर्णित श्लोकों का अर्थ न निकालकर क
11 अक्तूबर 2018
02 नवम्बर 2018
*संसार के सभी धर्मों का मूल सनातन धर्म को कहा जाता है | सनातन धर्म को मूल कहने का कारण यह है कि सकल सृष्टि में जितनी भी सभ्यतायें विकसित हुईं सब इसी सनातन धर्म की मान्यताओं को मानते हुए पुष्पित एवं पल्लवित हुईं | सनातनधर्म की दिव्यता का कारण यह है कि इस विशाल एवं महान धर्म समस्त मान्यतायें एवं पूजा
02 नवम्बर 2018
07 अक्तूबर 2018
वि
*सनातन काल से हमारे विद्वानों ने संपूर्ण विश्व को एक नई दिशा प्रदान की | आज यदि हमारे पास अनेकानेक ग्रंथ , उपनिषद एवं शास्त्र उपलब्ध हैं तो उसका कारण है हमारे विद्वान ! जिन्होंने अपनी विद्वता का परिचय देते हुए इन शास्त्रों को लिखा | जिसका लाभ हम आज तक ले रहे हैं | जिस प्रकार एक धनी को धनवान कहा जात
07 अक्तूबर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x