विजयादशमी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

22 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (85 बार पढ़ा जा चुका है)

विजयादशमी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मनाए जाने वाले प्रत्येक त्योहारों में एक रहस्य छुपा हुआ है | नौ दिन का दिव्य नवरात्र मनाने के बाद दशमी के दिन दशहरा एवं विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है | शक्ति की उपासना का पर्व शारीेय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है | इस अवसर पर लोग नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा के अलग-अलग रूपों की उपासना करके शक्तिशाली बने रहने की कामना करते हैं | भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है | दशहरे का उत्सव भी शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला उत्सव है | दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा हमें देता है | रावण से युद्ध करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जब उसका वध करने का रास्ता नहीं पाते हैं तब नौ दिन तक महामाया का आराधन बड़ी भक्ति के साथ करते हैं | महा नवमी के दिन महामाया प्रकट हो कर के भगवान श्रीराम को रावण का वध करने का मार्ग सुझाती है और दशमी के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम रावण का वध करते हैं | बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में आज देश में ही नहीं विदेशों में भी विजयदशमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है | दशहरे का सांस्कृतिक पहलू भी है | भारत कृषि प्रधान देश है जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का ठिकाना हमें नहीं रहता | इस प्रसन्नता के अवसर पर वह भगवान की कृपा को मानता है और उसे प्रकट करने के लिए वह उसका पूजन करता है |* *आज संपूर्ण भारत देश में लोग यत्र तत्र सर्वत्र विजयदशमी के दिन विशाल मेले का आयोजन करते हैं | रावण का पुतला जलाया जाता लोग बहुत प्रेम से शक्ति आराधना करने के बाद बुराई के प्रतीक रावण का पुतला दहन करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं | विचार कीजिए त्रेतायुग के एक रावण ने तीनो त्रिलोक को कंपा रखा था तब भगवान श्री राम ने उसका वध करके लोगों को सुख प्रदान किया था , परंतु आज तो समाज में इतने रावण घूम रहे हैं जिनका वेष तो राम का है परंतु उनके आचरण रावण से भी ज्यादा गिरे हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" यह कहना चाहूंगा कि रावण वध का उत्सव विजयादशमी मनाना तभी सार्थक होगा जब हम अपने भीतर बैठे हुई दस माहपापों का शमन कर सकें | आज समाज के प्रत्येक व्यक्ति के अंदर एक रावण पल रहा है जिसे मारने के लिए भगवान राम नहीं आएंगे बल्कि इसका वथ हमें स्वयं करना होगा , जिससे कि हमारा समाज और देश स्वयं में प्रसन्नता का आभास कर सकें | विश्वास मानिए जिस दिन हमारे अंदर बैठा हुआ रावण समाप्त हो जाएगा उसी दिन भारत देश में पुनः राम राज्य की स्थापना स्वयं हो जाएगी | हम विजयादशमी के दिन रावण के पुतले का दहन तो कर देते हैं परंतु अपने अंदर बैठे रावण का पोषण करते रहते हैं | जब तक इस रावण का वध नहीं होता है तब तक विजयदशमी मनाने का कोई अर्थ नहीं है |* *नौ दिन के नवरात्र में शक्ति संचय करते हुए प्रत्येक मनुष्य को अपने भीतर विद्यमान दश महा पापों का समन करके विजयदशमी का पर्व मनाना चाहिए |*

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