हमारे वेद :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

22 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (36 बार पढ़ा जा चुका है)

हमारे वेद :---- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

*भारतीय सनातन संस्कृति एवं हिंदू धर्म का आधार हमारे चारों वेद रहे हैं | हमारे इन वेदों में विश्व के समस्त ज्ञान , समस्त कलायें एवं जीवन जीने का दिशा - निर्देशन समस्त मानव जाति को प्राप्त होता रहा है | जब संसार में कोई धर्म नहीं था तब मानवमात्र के कल्याण के लिए वेदों का प्राकट्य हुआ | इन्हीं वेदों की ऋचाओं से उद्धृत ज्ञान को आधार बनाकर हमारे ऋषियों - महर्षियों ने अनेक शास्त्रों की रचना करके मानवजाति को जीवन जीने की कला सिखाई | एक छोटे से अणु से लेकर परमाणु तक का ज्ञान हमारे वेदों में समाया हुआ है | विधर्मी यह जानते थे कि जिस दिन ये वेद समाप्त हो जायेंगे उसी दिन सनातन धर्म भी समाप्त हो जायेगा , इसी को ध्यान में रखकर आदिकाल से ही सनातन विरोधियों का लक्ष्य हमारे वेद ही रहे हैं | परंतु इतिहास गवाह है कि जिसने भी वेदों को विनष्ट करने का प्रयास किया है उसका समूल विनाश हो गया है | प्राचीनकाल में दुर्गमासुर नामक एक असुर हुआ था जिसने अपने गुरु शुक्राचार्य के कहने पर ब्रह्मा जी की तपस्या करके चारों वेदों को मांग लिया | वेदों का हरण होते ही दैवशक्तियाँ निर्बल हो गयीं तब महामाया जगदम्बा ने दुर्गमासुर का वध किया और दुर्गा कहलाईं | इसके अतिरिक्त भी अनेक बार विधर्मियों द्वारा ऐसे प्रयास किये गये जिसके परिणामस्वरूप ईश्वरीय शक्तियों द्वारा उनका विनाश करके वेदों को संरक्षित किया जाता रहा है |* *आज युगों बीत जाने के बाद भी कुछ तथाकथित विधर्मी वेदों को नष्ट तो नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि हमारे महापुरुषों द्वारा वेदों के अनेक विभाग करके भाष्य के रूप में विस्तारित कर दिये गये हैं परंतु इन विधर्मियों का कुचक्र रुका नहीं है | बस इनका तरीका बदल गया है | वेदों की ऋचाओं के अर्थों का अनर्थ करके सनातन धर्म को बदनाम करके समाज में भ्रम फैलाने का भरसक प्रयास जारी है | इसी का परिणाम है कि सनातन हिन्दू कई विभिन्न धर्मों , मतों में विभक्त हो गये | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" दुखी एवं आश्चर्यचकित तब हो जाता हूँ जब यह देखता हूँ कि स्वयं को सनातन धर्म का झंडावरदार कहने वाले लोग भी जाने - अनजाने वेदों पर विस्मित होकर भ्रम फैलाने का कार्य कर रहे हैं | ऐसे सभी लोगों को इतिहास देखकर सीख लेते हुए यह जान लेना चाहिए कि सनातन धर्म के आधार वेद न कभी नष्ट हुए हैं और न कभी नष्ट होंगे क्योंकि सत्य कभी पराजित नहीं होता है | सनातन धर्मावलम्बियों से निवेदन मात्र है कि किसी भी तथ्य को सार्वजनिक करने के पहले उसकी सत्यता अवश्य जाँच लें | सनातन धर्म शाश्वत एवं सत्य और यह सदैव अक्षुण्ण रहा है एवं रहेगा | इसमें किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए | यह सार्वभौमिक सत्य है कि जिसका जितना ज्यादा विरोध होता है वह उतना ही निखार प्राप्त करता है |* *हम अपने वैदिक विधान से विमुख होकर आधुनिकता में रंग करके अपनी ही मान्यताओं पर उंगली उठाते हुए स्वयं को आधुनिक दिखाने पर तुले हुए हैं , जो कि हमारे लिए घातक है |*

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