क्षमी वीरस्य भूषणम् :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

23 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (40 बार पढ़ा जा चुका है)

क्षमी वीरस्य भूषणम् :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे भारत देश में अनेकों महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने महान गुणों से एक नवीन आदर्श किया है | धर्म को मानने वाले या धारण करने वाले मनुष्यों का सबसे बड़ा गुण होता है क्षमाशीलता | क्षमाशील मनुष्य स्वयं में महान होता है | यह भी सत्य है कि क्षमाशील वही हो सकता है जो बीती हुई बातों को हृदय में न रखता हो | शायद इसीलिए हमारे शास्त्रों में कहा गया गया है :-- गतं शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिन्तयेत् ! वर्तमानेषु कार्येषु वर्तयन्ति विचक्षण: !! अर्थात जो महान व बुद्धिमान होते हैं वे बीती बातों पर चिंतन करके न तो दुखी होते हैं और न ही भविष्य की चिंता करते हैं बल्कि वर्तमान को सुंदर से सुंदर बनने का प्रयास करते हैं ऐसे लोगों का मानना होता है कि यदि वर्तमान सुंदर बनाया गया है तो भविष्य अतिसुंदर हो सकता है | बीती बातों को वही भूल सकता है जो क्षमाशील होगा | प्राय: लोग किसी के द्वारा अपने प्रति कहे गये कटु वचनों को याद करके स्वयं में घुटा करते हैं | यहीं यदि मनुष्य क्षमाशील है तो किसी के द्वारा कही गये कटु वचनों के लिए उसे क्षमा करके चिंतामुक्त हो जाता है | विश्वास कीजिए एक दिन ऐसा अवश्य आयेगा जब कि कटु वचन कहने वाला पश्चाताप करके आपके पास क्षमा माँगने चला आयेगा | क्षमाशीलता ऐसा गुण है जो मनुष्य को आदर्शों की ऊंचाईयों पर ले जाने का कार्य करता है |* *आज मानव स्वभाव उग्र होता चला जा रहा है | आज किसी के अंदर क्षमाशीलता का भाव शायद ही देखने को मिलता है | स्वयं को धार्मिक कहने वाले भी धर्म के दस लक्षणों में से एक लक्षण क्षमा को नहीं अपना पा रहे हैं | क्षमाशीलता यदि देखनी है तो धरती मैया की ओर मनुष्य को देखना चाहिए जो कि अपने ऊपर अनेक आघात होने के बाद भी मनुष्यों को अपने ऊपर टिकाए हुए हैं | क्षमाशीलता का अद्भुत एवं जागृत उदाहरण देखना हो तो किसी भी नारी के जीवन को देखा जा सकता है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" समाज में हो रही घटनाओं को देख कर यह कह सकता हूं कि एक नारी अपने पति , परिवार व समाज के द्वारा बार-बार प्रताड़ित किए जाने के बाद भी उनको क्षमा करके एक नए जीवन नींव रखने का सतत् प्रयास जीवन भर करती रहती है | यह गुण नारियों में ईश्वर प्रदत्त ही होता है | कहा भी गया है :-- "क्षणे रुष्टा क्षणे तुष्टा , रुष्टा तुष्टा क्षणे - क्षणे" | पल भर में ही प्रसन्न हो जाना और पल भर में ही क्रोधित हो जाना यह है शक्ति के गुण होते हैं | नारियाँ क्षमाशील ना होती तो शायद इस संसार का स्वरूप ही आज कोई दूसरा होता | स्वयं को समाज का अगुआ कहने वाले पुरुषों को एक नारी से क्षमाशीलता का गुण सीखने की आवश्यकता है , क्योंकि यह ऐसा गुण है जिसे अपनाकर ही मानव जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है , अन्यथा मनुष्य अवसाद , चिंता , घृणा आदि में ही जीवन व्यतीत करता रहता है |* *क्षमाशीलता को अपना करके हम भले ही थोड़ी देर के लिए समाज की दृष्टि में अपमानित हो जाए , परंतु यह भी सत्य है कि किसी के द्वारा कहे गए कटु वचनों को तुरंत क्षमा कर देने से हम चिंता मुक्त अवश्य हो जाते हैं |*

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