तनाव

26 अक्तूबर 2018   |  सुधीर कुमार सोनी   (46 बार पढ़ा जा चुका है)

कई दिनों से देख रहा हूं कि मेरे कई मित्र इस बीच कम बोलने लगे हैं . वह कटे कटे से रहते हैं. उदासीन रहते हैं या फिर गुस्से से भर जाते हैं.

ऐसे व्यक्ति तनाव और घबराहट के शिकार होते हैं और यही तनाव ज्यादा हो जाने पर भी आत्महत्या की शिकार भी हो जाते हैं.

अगर आंकड़े की बात करें तो पूरी दुनिया में 25 करोड़ लोग तनाव से ग्रस्त हैं. एक रिपोर्ट नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेंटल एंड न्यूरो सर्जन के मुताबिक भारत का हर व्यक्ति तनाव का शिकार है.

क्रियाकलाप ही ऐसा है कि छोटी उम्र से ही हम पर तनाव हावी होने लगता है और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इसका हल भी हम कृतिम ढूंढते हैं आप ही सोचिए कि क्या आत्महत्या की पहचान अब सॉफ्टवेयर से होगी. सोशल साइट यह चेतावनी देंगे कि फलां व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है जबकि हमें परामर्श, बातचीत ,प्यार चाहिए . इसके लिए हमें अपने परिवार दोस्त आसपास के लोगों की मदद लेनी चाहिए.

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