रामराज्य की परिकल्पना :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

27 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (81 बार पढ़ा जा चुका है)

रामराज्य की परिकल्पना :---- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

*इस संसार में जीवधारियों को तीन प्रकार से कष्ट होते हैं जिन्हें त्रिविध ताप कहा जाता है | ये हैं - आध्यात्मिक, आधिभौतिक तथा आधिदैविक | सामान्यतः इन्हें दैहिक, भौतिक तथा दैविक ताप के नाम से भी जाना जाता है | इस शरीर को स्वतः अपने ही कारणों से जो कष्ट होता है उसे दैहिक ताप कहा जाता है | इसे आध्यात्मिक ताप भी कहते हैं क्योंकि इसमें आत्म या अपने को अविद्या, राग, द्वेष, मू्र्खता, बीमारी आदि से मन और शरीर को कष्ट होता है। जो कष्ट भौतिक जगत के बाह्य कारणों से होता है उसे आधिभौतिक या भौतिक ताप कहा जाता है | शत्रु आदि स्वयं से परे वस्तुओं या जीवों के कारण ऐसा कष्ट उपस्थित होता है | जो कष्ट दैवीय कारणों से उत्पन्न होता है उसे आधिदैविक या दैविक ताप कहा जाता है | अत्यधिक गर्मी, सूखा, भूकम्प, अतिवृष्टि आदि अनेक कारणों से होने वाले कष्ट को इस श्रेणी में रखा जाता है | कहा जाता है कि राम राज्य में किसी को भी तीनों प्रकार के कष्ट नहीं थे | तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस में लिखा - "दैहिक, दैविक, भौतिक तापा ! राम राज्य नहिं काहुहिं व्यापा !!" अर्थात :- राम राज्य में किसी को दैहिक, दैविक व् भौतिक ताप नहीं व्यापते थे | सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते और सभी नीतियुक्त स्वधर्म का पालन किया करते थे | वहां कोई शत्रु नहीं था | इसलिए जीतना शब्द केवल मन को जीतने के लिए प्रयोग में लाया जाता था | कोई अपराध नहीं करता था इसलिए दण्ड किसी को नहीं दिया जाता था , यही था रामराज्य |* *आज भी राम राज्य की इन विशेषताओं को जानने के पश्चात मानवमात्र में एक जिज्ञासा अवश्य उठती है कि राम राज्य की इस भौतिक व अध्यात्मिक समृद्धि के पीछे कारण क्या था | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" बताना चाहूँगा कि जैसे एक हरे भरे वृक्ष का मूल उसकी स्वस्थ जड़ें होती हैं उसी प्रकार एक राज्य का कर्णधार उसका राजा होता है | "यथा राजा तथा प्रजा" – जैसा राजा होता है वैसी ही उसकी प्रजा हो जाती है | राजा को आत्मज्ञानी होना चाहिए, अन्यथा एक आत्मज्ञानी को राजा बना देना चाहिए | ऐसा इसलिए, क्योंकि एक आत्मज्ञानी ही निस्वार्थ भावना से समस्त मानवता के कल्याणार्थ परमार्थ कर सकता है | उसकी दूरदर्शिता, उसका उज्जवल चरित्र एवं त्रुटिरहित संचालन ही राज्य को पूर्णरुपेण विकसित व व्यविस्थत कर सकता है | त्रेता के मर्यादित रामराज्य में यही तथ्य पूर्णत: चरितार्थ था | वर्तमान समय में भी यदि हम ऐसे ही अलौकिक राम राज्य की स्थापना करना चाहते हैं, तो हमें सर्वप्रथम रामराज्य के आधार – श्री राम व उनके दिव्य चरित्र को जानना होगा ! ऐसे ब्रह्मस्वरूप श्री राम को केवल ब्रह्मज्ञान के द्वारा ही जाना जा सकता है | एक तत्ववेत्ता गुरु जब हमें ब्रह्मज्ञान प्रदान करते हैं, तभी हमारे भीतर प्रभु का तत्वरूप ज्योति – स्वरूप प्रकट होता है और हम उनकी प्रत्यक्ष अनुभूति करके उनके चरित्रों का पालन कर पाते हैं |* *रामराज्य की पुनर्स्थापना के लिए समाज बदलने की आवश्यकता नहीं बल्कि मानवमात्र यदि स्वयं को श्री राम के गुणों का अनुयायी बना ले तो पुन: रामराज्य की स्थापना स्वमेव हो जायेगी |*

अगला लेख: प्रत्येक नारी है स्कन्दमाता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
13 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पावन पर्व पर आदिशक्ति भगवती दुर्गा के पूजन का महोत्सव शहरों से लेकर गाँव की गलियों तक मनाया जा रहा है | जगह - जगह पांडाल लगाकर मातारानी का पूजन करके नारीशक्ति की महत्ता का दर्शन किया जाता है | माता जगदम्बा के अनेक रूप हैं , कहीं ये दुर्गा तो कहीं काली के रूप में पूजी जाती हैं | जहाँ दुर्
13 अक्तूबर 2018
13 अक्तूबर 2018
*सिंहासनगता नित्यं, पद्माश्रितकरद्वया |* *शुभदास्तु सदा देवी, स्कन्दमाता यशस्विनी ||* *नवरात्र का पाँचवा दिन भगवती "स्कन्दमाता" को समर्पित है | नवरात्रि की नौ देवियों में ही नारी का सम्पूर्ण जीवन निहित है | गर्भधारण करके जो "कूष्माण्डा" कहलाती है वही पुत्र को जन्म जन्म देकर "स्
13 अक्तूबर 2018
05 नवम्बर 2018
अजीब विरोधाभास है शब्दों में। अजीब द्वंद्व है शब्द भरोसे में, विश्वास में, आस्था में, घृणा में, प्रेम में। दरअसल शब्दों का कार्य है एक खास तरह के विचार को प्रस्तुत करना। किसी मनःस्थिति, परिस्थिती, भाव , वस्तु , रंग, दिशा, दशा, जगह, स्थान, गुण, अवगुण इत्यादि को दर्शाना। शब
05 नवम्बर 2018
15 अक्तूबर 2018
*चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन |* *कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ||* *महामाई आदिशक्ति भगवती के पूजन का पर्व नवरात्र शनै: शनै: पूर्णता की ओर अग्रसर है | महामाया इस सृष्टि के कण - कण में विद्यमान हैं | जहाँ जैसी आवश्यकता पड़ी है वैसा स्वरूप मैया ने धारण करके लोक
15 अक्तूबर 2018
22 अक्तूबर 2018
*सनातन धर्म में मनाए जाने वाले प्रत्येक त्योहारों में एक रहस्य छुपा हुआ है | नौ दिन का दिव्य नवरात्र मनाने के बाद दशमी के दिन दशहरा एवं विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है | शक्ति की उपासना का पर्व शारीेय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल
22 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*सनातन धर्म में नारियों का एक महत्वपूर्ण स्थान है | पत्नी के पातिव्रत धर्म पर पति का जीवन आधारित होता है | प्राचीनकाल में सावित्री जैसी सती हमीं लोगों में से तो थीं जिसने यमराज से लड़कर अपने पति को मरने से बचा लिया था | भगवती पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त कर लिया था | भारत की स्त्रियों
20 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*एकवेणी जपाकर्ण , पूर्ण नग्ना खरास्थिता,* *लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी , तैलाभ्यक्तशरीरिणी।* *वामपादोल्लसल्लोह , लताकण्टकभूषणा,* *वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा , कालरात्रिर्भयङ्करी॥-------* *नवरात्र की सप्तमी तिथि को देवी कालरात्रि की उपासना का विधान है। पौराणिक मतानुसार देवी क
20 अक्तूबर 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x