आत्मविश्वास :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

28 अक्तूबर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (14 बार पढ़ा जा चुका है)

आत्मविश्वास :----- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

*इस सकल सृष्टि में चौरासी लाख योनियों का विवरण मिलता है | जिसमें सर्वश्रेष्ठ मानव योनि कही गई है | परमपिता परमात्मा ने मनुष्य शरीर देकरके हमारे ऊपर जो उपकार किया है इसकी तुलना नहीं की जा सकती है | मानव जीवन पाकर के यदि मनुष्य के अंदर आत्मविश्वास न हो तो यह जीवन व्यर्थ ही समझना चाहिए | क्योंकि मानव जीवन तभी सार्थक माना जा सकता है जब जीवन के प्रत्येक क्षण को आत्मविश्वास के साथ निश्चिंतता , निर्द्वंदता एवं निर्भीकता के साथ व्यतीत किया जाय | जहां पर मनुष्य डरते हुए आशंकाओं से ग्रस्त रहते हुए जीवन व्यतीत करता है उसे दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है | क्योंकि मानवयोनि वह योनि है जिसे प्राप्त करने के लिए देव , दानव , यक्ष , गंधर्व तक लालायित रहते हुए परमपिता परमात्मा से एक बार मनुष्य योनि में भेजने की प्रार्थना किया करते हैं | ऐसे दुर्लभ मानव जीवन को पा करके यदि मात्र चिंता करते हुए या आशंकित रहते हुए यह जीवन व्यतीत किया जाए तो यह दुर्लभ मानव जीवन नहीं बल्कि एक शाप ही कहा जा सकता है | यह मानव जीवन सौभाग्य में तभी परिवर्तित हो सकता है जब मनुष्य के अंदर आत्मविश्वास हो | आत्मविश्वास उसी को हो सकता है जिसको ईश्वर के ऊपर पूरा विश्वास है | जिस प्रकार कोई अधिकारी अपनी सुरक्षा में लगे हुई जवानों के सुरक्षाचक्र में स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है , उसी प्रकार उस परमसत्ता के सुरक्षाचक्र में स्वयं को सुरक्षित महसूस करने वाला मनुष्य ही आत्मविश्वासी हो सकता है |* *आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य ना तो ईश्वर के ऊपर विश्वास कर पा रहा है और ना ही उसे स्वयं के ऊपर ही विश्वास रह गया है | यह अकाट्य सत्य है कि स्वयं के ऊपर विश्वास तभी हो सकता है जब मनुष्य यह मान ले उसके सुरक्षा का भार ईश्वरीय सत्ता स्वयं संभाल रही है | आज किसी भी क्षेत्र में , किसी भी कार्य में यदि मनुष्य असफल हो जाता है तो वह दोषारोपण करने लगता है , कभी समाज पर , तो कभी ईश्वर पर | जबकि उसके असफल होने का एक ही कारण होता है उसके स्वयं की आत्मविश्वास की कमी होना | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" इतना ही कहना चाहूंगा कि जिस मनुष्य के अंदर आत्मविश्वास की पूर्णता है वह कभी भी किसी भी कार्य में असफल नहीं हो सकता | यदि वह एकाध बार असफल भी हो जाता है तो पुन: उस कार्य को पूरा करने के लिए प्रयासरत हो जाता है , क्योंकि उसे ईश्वर के ऊपर पूर्ण विश्वास होता है | ऐसा करके वह अपने परिश्रम एवं ईश्वर की कृपा से अपने कार्य में सफल हो जाता है और उसका आत्मविश्वास उसे बिजयी बनाता है | प्राय: मनुष्य अपनी क्षमता को पहचान नहीं पाता क्योंकि अपनी क्षमता को पहचान करके अपने ऊपर पूर्ण विश्वास करने की क्षमता उसमें ही हो सकती है जो उस अदृश्य शक्ति परमात्मा के ऊपर विश्वास करना जानता हो | क्योंकि यह सत्य है जिसका स्वयं अपने ऊपर विश्वास नहीं है वह दूसरों का भी विश्वास पात्र नहीं बन पाता | परमात्मा भी उसी की सहायता करता है जो स्वयं अपनी सहायता करना जानता है | मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति उसका आत्मविश्वास है बिना आत्मविश्वास के किसी भी कार्य में सफल होना दिवास्वप्न के अतिरिक्त और कुछ नहीं है |* *प्रत्येक मनुष्य में आत्मविश्वास का होना बहुत आवश्यक है , क्योंकि बिना आत्मविश्वास के कोई भी मनुष्य सफलता नहीं प्राप्त कर सकता है और न ही वह अपना भविष्य स्वर्णिम कर सकता है |*

अगला लेख: प्रत्येक नारी है स्कन्दमाता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
15 अक्तूबर 2018
*चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहन |* *कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ||* *महामाई आदिशक्ति भगवती के पूजन का पर्व नवरात्र शनै: शनै: पूर्णता की ओर अग्रसर है | महामाया इस सृष्टि के कण - कण में विद्यमान हैं | जहाँ जैसी आवश्यकता पड़ी है वैसा स्वरूप मैया ने धारण करके लोक
15 अक्तूबर 2018
20 अक्तूबर 2018
*आश्विन मास के शुक्लपक्ष में प्रतिपदा से महानवमी तक पराअम्बा जगदम्बा जगतजननी भगवती दुर्गा जी के नौ रूपों की पूजा भक्तों के द्वारा की जाती है | दसवें दिन (विजयादशमी के दिन) हर्षोल्लास के साथ भक्तजन महामाया की भव्य शोभायात्रा निकालकर उनका विसर्जन नदियों , सरोवरों आदि में करते हैं | जगदम्बा का वास तो प
20 अक्तूबर 2018
22 अक्तूबर 2018
*भारतीय सनातन संस्कृति एवं हिंदू धर्म का आधार हमारे चारों वेद रहे हैं | हमारे इन वेदों में विश्व के समस्त ज्ञान , समस्त कलायें एवं जीवन जीने का दिशा - निर्देशन समस्त मानव जाति को प्राप्त होता रहा है | जब संसार में कोई धर्म नहीं था तब मानवमात्र के कल्याण के लिए वेदों का प्राकट्य हुआ | इन्हीं वेदों की
22 अक्तूबर 2018
13 अक्तूबर 2018
*नवरात्र के पावन पर्व पर आदिशक्ति भगवती दुर्गा के पूजन का महोत्सव शहरों से लेकर गाँव की गलियों तक मनाया जा रहा है | जगह - जगह पांडाल लगाकर मातारानी का पूजन करके नारीशक्ति की महत्ता का दर्शन किया जाता है | माता जगदम्बा के अनेक रूप हैं , कहीं ये दुर्गा तो कहीं काली के रूप में पूजी जाती हैं | जहाँ दुर्
13 अक्तूबर 2018
22 अक्तूबर 2018
*आदिकाल से सनातन धर्म यदि दिव्य एवं अलौकिक रहा है तो उसका कारण हमारे सनातन धर्म के विद्वान एवं उनकी विद्वता को ही मानना चाहिए | संसार भर में फैले हुए सभी धर्मों में सनातन धर्म को सबका मूल माना जाता है | हमारे विद्वानों ने अपने ज्ञान का प्रचार किया सतसंग के माध्यम से इन्हीं सतसंगों का सार निकालकर ग्र
22 अक्तूबर 2018
06 नवम्बर 2018
*इस संसार में सब का अंत निश्चित है ! चाहे वह जीवन हो या जीवन में होने वाली अनुभूतियां ! मानव जीवन भर एक हिरण की तरह कुछ ढूंढा करता है | हर जगह मानव को आनंद की ही खोज रहती है चाहे वह भोजन करता हो, या भजन करता , हो कथा श्रवण करता हो सब का एक ही उद्देश्य होता है आनंद की प्राप्ति करना | आनंद भी कई प्रक
06 नवम्बर 2018
20 अक्तूबर 2018
*मानव जीवन में संगति का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है | जिस प्रकार मनुष्य कुसंगत में पड़कर के नकारात्मक हो जाता है उसी प्रकार अच्छी संगति अर्थात सत्संग में पढ़कर की मनुष्य का व्यक्तित्व बदल जाता है | सत्संग का मानव जीवन पर इतना अधिक प्रभाव पड़ता है कि इसी के माध्यम से मनुष्य को समस्याओं का समाधान तो मिल
20 अक्तूबर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x