इश्क

07 नवम्बर 2018   |  pradeep   (6 बार पढ़ा जा चुका है)

अब रूठने की बगावत नहीं कोई,

अब मनाने की बनावट नहीं कोई.

इश्क हमको ही नहीं उनको भी है हमसे,

बात ये कहने की ज़रूरत नहीं कोई. (आलिम)

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