सिकंदर महान की पूरी सच्चाई -Truth of Alexander | Sikander Mahan in Hindi

28 नवम्बर 2018   |  अंकिशा मिश्रा   (61 बार पढ़ा जा चुका है)

सिकंदर महान की पूरी सच्चाई  -Truth of Alexander | Sikander Mahan  in Hindi

शायद सिकंदर इतिहास का पहला राजा था जिसने पूरी दुनिया को जीतने का सपना देखा था। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए मिश्र, सीरिया, ईरान, अफगानिस्तान और वर्तमान पाकिस्तान को जीतता हुआ व्यास नदी तक आ पहुंचा।इतिहास में भले ही पढ़ाया जाता हो कि सिकंदर की सेना लगातार युद्ध करते हुए थक गई और आगे युद्ध करना नहीं चाहती थी ये बात किसी हद तक सच हो भी सकती है लेकिन असली वजह कुछ और ही थी वजह थी कि व्यास नदी के आगे हिन्दू गणराज्य और जनपदों ने सिकंदर की एक न चलने दी और इसके चलते सिकंदर को वापस लौटना पड़ा।


सिकंदर का जन्म 356 ईसा पूर्व में ग्रीस के मकदूनिया में हुआ था। उनके पिता फिलिप मकदूनिया का राजा था। सिकंदर जब लगभग 20 साल का था तो उसके पिता फिलिप की हत्या कर दी गई।ऐसी अवधारणा है की सिकंदर के पिता की हत्या की साजिश सिकंदर की माँ ओलम्पिया ने की थी। अपनी पिता की मृत्यु के पश्चात् सिकंदर ने राज गद्दी के लिए अपने सौतेले और चचेरे भाइयों को मौत के घाट उतार दिया और खुद मकदूनिया का राजा बन राजगद्दी पर बैठ गया।


बता दें कि सिकंदर का गुरु अरस्तु था जो कि एक बहुत प्रसिद्ध और महान दार्शनिक थे।सिकंदर को निखारने का काम अरस्तु ने ही किया था। वो अरस्तु ही था जिसने सिकंदर को पूरी दुनिया को जीतने का ख्वाब दिखाया था। इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है की सिकंदर के विजयी अभियान के दौरान अरस्तु का भतीजा कालस्थनीज़ एक सेनापति के रूप में उसके साथ गया था।




सिकंदर ने सबसे पहले मकदूनिया के आस पास के राज्यों को जीतना शुरू किया। मक़दूनिया के आस पास के राज्यों को जीतने के बाद सिकंदर आधुनिक तुर्की की और आगे बढ़ा और जीता।और फिर अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए फ़ारसी साम्राज्य पर आक्रमण कर दिया और जीता भी। अब सिकंदर लगभग आधे विश्व का साम्राज्य अपने कब्ज़े में कर चुका था। फ़ारसी साम्राज्य को जीतने में सिकंदर को लगभग 10 साल का वक्त लग गया। जीत के बाद सिकंदर ने एक भव्य जुलूस निकला और तब से ही अपने आप को विश्व विजेता कहलाना शुरू कर दिया।


अब सिकंदर की नज़र थी भारत पर। भारत तक पहुँचते पहुँचते सिकंदर का सामना कई छोटे छोटे राज्यों से हुआ और वो राज्यों को जीतता हुआ भारत की और आगे बढ़ता जा रहा था। ये सिकंदर की योग्यता का परिणाम था की सिकंदर की छोटी सी सेना कई बड़ी बड़ी सेनाओं को मात दे देती थी। इसका कारण था सिकंदर का कुशल नेतृत्व और सेना के लिए एक कुशल मार्गदर्शक की तरह रहना। सिकंदर की सेना सिकंदर को भगवान मानती थी। सिकंदर हमेशा ही हर युद्ध में अपनी सेना का हौसला अफ़ज़ाई करता और खुद हर युद्ध में आगे रहता था। यही वजह थी की सिकंदर की सेना हर बड़ी सेना को टक्कर देती थी और जीतती थी। सिकंदर की युद्ध राजनीतियों को आज भी इतिहास में पढ़ाया जाता है।


सिकंदर ने भारत पर 326 ईसा पूर्व में हमला किया।वो समय था जब भारत छोटे छोटे राज्यों और गणराज्यों में बंटा हुआ था। राज्यों में राजा शासन करते थे और गणराज्यों में मुखिया होते थे जो प्रजा की इच्छ्नुसार फैसले लेते थे।भारत में सिकंदर ने सबसे पहले तक्षशिला और आंभी पर आक्रमण किया। और बहुत ही काम समय में तक्षशिला के राजा ने आत्मसमर्पण कर दिया। इन राज्यों से जीती गई दौलत को देख कर सिकंदर के मन में ये विचार आया की यदि इस छोटे से राज्य के पास इतनी दौलत है तो पूरे भारत के पास कितना धन होगा। भारत की धन सम्पदा को देख कर सिकंदर की इक्छा और बढ़ गयी।




तक्षशिला विश्वविद्यालय के एक आचार्य जिनका नाम चाणक्य था , उनसे भारत पर होते विदेशी हमलों को देखा न गया और उन्होंने सभी राजाओ और गणराज्यों को एकजुट होकर इस परिस्थिति का सामना करने के लिए आग्रह किया। लेकिन सभी राजा अपनी आपसी दुश्मनी के चलते एक साथ न आये। उसके बाद चाणक्य ने सबसे शक्तिशाली राज्य मगध के राजा से भी गुहार लगाई परन्तु राजा ने चाणक्य का अपमान कर उन्हें महल से निकल दिया।इसके बाद चाणक्य ने गणराज्यों से एक होकर साथ आने की अपील की और इसमें वे काफी हद तक सफल रहे और सिकंदर को इससे काफी नुकसान भी हुआ।


सिकंदर का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध झेलम नदी के पास राजा पुरु या पोरस से हुआ इस युद्ध को पितस्ता का युद्ध या हाईडेस्पेस का युद्ध भी कहा जाता है। महाराजा पुरु एक वीर राजा थे जो की सिंध और पंजाब के बहुत बड़े भू-भाग के स्वामी भी थे।महाराजा पुरु के रहते सिकंदर के लिए झेलम नदी पार करना बहुत मुश्किल था और साथ ही ख़राब ,मौसम के चलते झेलम नहीं में बाढ़ आ गई और ये और भी मुश्किल हो गया। पर किसी तरह यमन सेना ने नदी पार की। जिसके बाद सिकंदर ने पोरस को एक सन्देश भेजा जिसमें लिखा था की अधीनता स्वीकार कर ले और राजा पुरु ने इस अधीनता स्वीकार करने से साफ़ इंकार कर दिया। जिसके बाद दोनों सेनाओं के बीच भयंकर युद्ध हुआ। पोरस की सेना हर रूप में यमन की सेना से ऊपर थी युद्ध के पहले ही दिन सिकंदर की सेना का मनोबल टूट चुका था और खुद सिकंदर को भी पता चल गया था कि वो पोरस से जीत नहीं पायेगा और युद्ध जारी रखने में उसका ही नुकसान है। दिन ख़तम होने पर सिकंदर ने पोरस को युद्ध रोकने का प्रस्ताव भेजा और इस प्रस्ताव को पोरस ने स्वीकार कर लिया और दोनों के बीच एक संधि हुई कि पोरस सिकंदर को आगे हर युद्ध में सहायता देगा जिसके बदले में जीते हुए सभी राज्यों पर शासन पोरस करेगा।




जिसके बाद सिकंदर और पोरस की सेना कई छोटे छोटे गणराज्यों से भिड़ी और इसमें कठ राज्य से हुई लड़ाई काफी बड़ी रही।कठों ने एक बार तो यवनो के छक्के छुड़ा दिए पर छोटी सेना होने के कारण वो हार गई। लेकिन जब सिकंदर के कानों में भनक पड़ी की व्यास नदी को पार करते ही एक विशाल सेना है युद्ध के लिए तो सिकंदर घबरा गया और उसके चलते उसे व्यास नदी से ही वापस लौट जाना पड़ा। सभी गणराज्यों को एक साथ लाने में आचार्य चाणक्य की बहुत बड़ी भागीदारी थी जिसकी वजह से सिकंदर को बहुत नुकसान झेलना पड़ा था।


इतिहास में सिकंदर को एक महान योद्धा कहा जाता है और ये भी लिखा गया है कि सिकंदर कभी कोई भी लड़ाई नहीं हारा।और पोरस को उसका साम्राज्य सिकंदर ने उसकी वीरता को देख कर वापस किया था। लेकिन इतिहासकरों की मानें तो सिकंदर एक बहुत ही क्रूर और अत्याचारी शासक था। उसने कभी भी किसी के प्रति उदारता नहीं दिखाई। अपने ही साथियों को उसने तड़पा तड़पा के मारा था। अपने करीबी मित्र क्लीटोस, अपने पिता पर्मीनियन और यहां तक की अपने गुरु क्र भतीजे कलास्थनीज़ तक को सिकंदर ने नहीं बक्शा। तो क्या ऐसा क्रूर सिकदर यदि पोरस से जीता होता तो उसको उसका साम्राज्य वापस करता ? ऐसे कई सवाल सिकंदर से जुड़े हुए हैं जिन पर इतिहास कुछ बताती है और इतिहासकार कुछ और ही बताते है।


ऐसा ही एक सवाल जिसका खुलसा आज भी नहीं हुआ की सिकंदर की मौत कैसे हुई ? ये सवाल आज भी एक रहस्य बना हुआ है। कहा जाता है की विश्व विजेता बनने का सपना टूटने के बाद सिकंदर बहुत ज्यादा शराब पीने लगा था। और करीब 19 महीने भारत रहने के बाद जब वह ईराक पंहुचा तो 33 वर्ष की उम्र में मलेरिया के कारन उसकी मौत हो गए। कई इतिहासकरों का ये भी कहना है कि सिकंदर की मौत पोरस की सेना द्वारा चलाये गए ज़हरीले तीरों की वजह से हुई। सिकंदर की मौत आज भी इतिहास में एक रहस्य बानी हुई है।



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